फाइनल रिपोर्ट स्पेशल

किसान कर्ज माफ़ी के निर्णय से पूर्वांचल के गन्ना किसानों की जागी उम्मीदें

गोरखपुर (संदीप त्रिपाठी/अमृता सिंह): प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किये गए वादे को निभाते हुए सूबे के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पहली ही कैबिनेट मीटिंग में लघु और सीमान्त किसानों की कर्ज माफ़ी का एक बड़ा निर्णय लिया।योगी के इस निर्णय से सरकारी खजाने पर लगभग 36359 करोड़ रुपये का अतरिक्त भार पड़ेगा। और 86 लाख किसानों को इसका लाभ मिलेगा।
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के द्वारा किसानों के कर्ज माफ़ी मुद्दे पर हाथ खड़ा करने के बाद यह निर्णय लेना योगी सरकार के लिए आसान नहीं था। आजादी के बाद से ही लगातार किसान कभी मौसम की मार तो कभी सरकारी तंत्रो की असफलता का शिकार होता आ रहा है। लेकिन पहली बार किसी सरकार ने सर्व प्रथम अपनी पहली कैबिनेट की बैठक में किसानो के हित को सर्वोपरि माना।
अगर हम 2012 के समाजवादी पार्टी की सरकार की बात करें तो यह पाएंगे की लंबे-लंबे वादे कर सत्ता में आने के बाद क़र्ज़ माफ़ी के मुद्दे पर किसानों से छल किया गया। तब की सपा सरकार ने भूमि विकास बैंक से लिए ऋण को माफ़ करने का ऐलान किया। जब फाइनल रिपोर्ट की टीम ने पहले की जानकारी हासिल करनी चाही तो पता चला की ये बैंक ऋण देने की स्थिति में ही नही है। बहरहाल जो भी हो पूर्वी उत्तर प्रदेश का मुख्य मुद्दा किसानों की समस्या रहा है और यहाँ के सांसद रहते हुए मुख्य मंत्री संसद में यहाँ के आवाम की आवाज बनते रहे हैं। और पूर्वी उत्तर प्रदेश की जमीनी हकीकत से खुद वाकिफ हैं।
क़र्ज़ माफ़ी के ऐलान के बाद से ही यहाँ के गन्ना किसानो में भी एक बड़ी उम्मीद जगी है। जो अरसे से गन्ने की मिठास नही हासिल कर सके है। उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादित राज्य है जिस का मुख्य केंद्र बलिया से लेकर गोरखपुर के साथ साथ यहाँ का तराई इलाका है जो यहाँ के किसानों के जीवीकोपार्जन का मुख्य जरिया है।
इन सबको देखते हुए ये कहा जा सकता है की एक बार फिर से यहाँ के मिलों से धुआँ निकलते देखा जा सकता है। गोरखपुर की धुरियापार, बलिया की रसड़ा और ग़ाज़ीपुर की नंदन मिल एशिया की सबसे बड़ी मिल होने का गौरव होने के बाद भी जंग खाये बैठी है। रोजगार के लिए यहाँ का युवा पलायन कर रहा है।
किसानों का बड़ा तबका रह गया वंचित
हालांकि मात्रा 86 लाख किसानों के कर्ज माफ़ी से किसानों का एक बड़ा तबका निराश भी हुआ है। पुरे प्रदेश में 2 करोड़ 15 लाख किसान है और मात्र 86 लाख किसान इससे लाभवन्तित है। भाजपा अपने वादे के अनुसार लघु और सीमांत किसानों को भी संतुष्ट नहीं कर सकी। क्यों की लघु और सीमांत किसान की बात तो सरकार कर रही है पर यह जानना जरुरी है की इनमे से भी बहुत से किसान लाभ पाने से वंचित रह गएँ हैं।
जो भी हो ऐसे वक़्त में जब केंद्र सरकार सब्सिडी ख़त्म करने की बात कर रही है, योगी सरकार द्वारा लिया गया यह लोकलुभावन फैसला किसानों के दर्द पर कितना मरहम लगाएगा ये तो आने वाला समय ही बताएगा।

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