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वैशाली एक्सप्रेस में 6 घंटे तक लावारिस पड़ा रहा यात्री का लैपटॉप बैग; सुरक्षा व्यवस्था में लगे लोगों की भी नहीं पड़ी नज़र 

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ग़ाज़ियाबाद:
इसे संयोग कहें, सुरक्षा में चूक, लोगों की ईमानदारी या ख़ौफ़ नहीं पता लेकिन यह वाकया जान कर आप भी दंग रह जायेंगे। हुआ यूँ की बरौनी से नई दिल्ली आने वाली वैशाली एक्सप्रेस से आज सुबह अनुकूल सिंह ग़ाज़ियाबाद स्टेशन पर उतरे। स्टेशन से इंदिरापुरम जाने के लिए उन्होंने ऑटो पकड़ा और पहुँच गए अपने गंतव्य पर।
लेकिन असली कहानी की शुरुआत यहाँ से होती है। मुजफ्फरपुर से आने वाले अनुकूल को शहर के इंदिरामपुरम स्तिथ अपने घर पहुँचने पर पता चला की वो अपना कीमती लैपटॉप के साथ कुछ अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज़ कही भूल आएं हैं।
वो तुरंत ऑटो वाले की तलाश में ग़ाज़ियाबाद स्टेशन पहुँचे जहा किस्मत से उनकी मुलाकात उस ऑटो वाले से हो गयी। पूछने पर ऑटो वाले ने बताया की अनुकूल सिर्फ एक बैग लेकर ऑटो में चढे थे।
उसके बाद अनुकूल स्टेशन पर आरपीएफ थाने पहुंचे। वह अधिकारीयों ने उन्हें बताया की वो एक बार नई दिल्ली स्टेशन जाकर चेक करें क्यूंकि वैशाली एक्सप्रेस वही तक जाती है।
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अनुकूल भागते-भागते नई दिल्ली स्टेशन पहुंचे। वह पहुँचने पर पता चला की ट्रेन शकुरबस्ती यार्ड में भेज दी गयी है। अनुकूल अपने भाई सिद्दार्थ के साथ शकुरबस्ती पहुंचे तो पता चला की ट्रेन दयाबस्ती पर खड़ी है।
दयाबस्ती में रेलवे जवान अनुकूल को अपने साथ पैंट्री कार में ले गया जहाँ सफाई का काम चल रहा था। पैंट्री से एक अटेंडेंट और जवान अनुकूल को अपने बर्थ पर ले गए जहा उनका लैपटॉप वाला बैग ज्यों का त्यों पड़ा हुआ था।
अपना कीमती लैपटॉप पाकर अनुकूल ने तो चैन की सांस ली। लेकिन यहाँ एक बात पर गौर करना जरुरी है की ग़ाज़ियाबाद से लेकर दयाबस्ती तक ट्रेन
के पहुँचने में पुरे 6 घंटे से ज्यादा का समय व्यतीत हुआ लेकिन किसी की भी नज़र उस लैपटॉप के बैग पर नहीं पड़ी।
 वैसे तो अनुकूल का लैपटॉप मिलना बहुत अच्छी बात है लेकिन यह घटना इस बात पर सोचने को मज़बूर कर देती है वैशाली एक्सप्रेस जैसी वीआईपी ट्रेन में एक बैग तक़रीबन 6 घंटे तक वैसे ही पड़ा रहता है और किसी की भी नज़र नहीं पड़ती है। न आम आदमी की ना ही सुरक्षा व्यवस्था में लगे लोगों की।
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