फाइनल रिपोर्ट स्पेशल

पोस्टर में कभी राम, कभी हनुमान, कर ना दे कहीं आदित्यनाथ का नुकसान

Poster-of-adityanathगोरखपुर: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधान सभा के चुनाव होने हैं। और अगर हम मैदान में लगे चार प्रमुख पार्टी की बात करें तो उनमे से तीन–बसपा, सपा और कांग्रेस– के मुख्य मंत्री पद के उम्मीदवार सब के सामने है केवल भाजपा ने अभी तक अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
बसपा हमेशा की तरह मायावती के ही नेत्रत्व में चुनाव लड़ेगी और वही पार्टी की मुख्य मंत्री पद की उम्मीदवार भी हैं। वैसे भी बसपा में उनके अलावा कोई कद्दावर नेता नहीं है। रही बात सपा की तो वो वर्तमान मुख्य मंत्री अखिलेश यादव रखकर चुनाव मैदान में उतरेगी। कांग्रेस ने भी दिल्ली की पूर्व मुख्य मंत्री शीला दीक्षित को अपने मुख्य मंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है।
और अब देखना ये है की भाजपा बिहार की तर्ज पर बिना किसी नेता के चुनाव लड़ती है या अपना प्रदेश में अपना नेता घोषित करकर चुनाव के मैदान में उतरती है? पार्टी ने मुख्य मंत्री पद के उम्मीदवार के लिए आतंरिक सर्वे भी करा लिए हैं लेकिन अभी भी पार्टी अपना उम्मीदवार घोषित करने से कोताही बरत रही है। कारण पार्टी में कई नेताओं को लेकर चल रहा आतंरिक कसमकश है।
Poster-of-adityanath-1चाहे आदित्यनाथ हो या वरुण गांधी सभी ने अपने अपने तरफ से जोर लगा राखी है लेकिन अगर पार्टी के विश्वस्त सूत्रों की माने तो आदित्यनाथ कार्यकर्ताओं की पहली पसंद है। गोरखपुर से सांसद और गोरक्षपीठाधिस्वर आदित्यनाथ ने 22 जुलाई को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को ज़बर्दस्त रूप से सफल बन कर अपना दावा और पुख्ता कर लिया है।
वैसे तो पार्टी में आदित्यनाथ को लेकर कोई एक राय अभी तक नहीं बानी है और सूत्रों के अनुसार पार्टी के कुछ बड़े नेता आदित्यनाथ के नेतृत्व में चुनाव लड़ने से कतरा रहे हैं। उनकी कट्टर छवि, और कुछ धड़ों का उनके खिलाफ होने तो उनके विपक्ष में माहौल बन ही सकता है एक कारण और है जो गोरखनाथ मंदिर के महंत के मुख्य मंत्री उम्मेद्वार बनने के खिलाफ जा सकती है और वो है गोरखपुर में उनक पक्ष में आये दिन लगने वाले पोस्टर।
पोस्टर के माध्यम से गोरखपुर में कभी योगी को शेर पर बिठा कर नायक बनाया जाता है तो कभी उन्हें हनुमान घोषित कर दिया जाता है। पिछले दो दिनों में ही उनके दो पोस्टर ऐसे लगे हैं जिससे केंद्रीय नेतृत्व ने हाथो हाथ तो नहीं ही लिया होगा।
Poster-of-adityanath-2प्रधान मंत्री के गोरखपुर दौरे के एक दिन पूर्व भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा ने योगी को तो पोस्टर में बादशाह ही बना दिया। इस पोस्टर की सब से ख़ास बात थी इसका समय। पीएम के दौरे के ठीक पहले इस पोस्टर का लगना एक तरह से ये सन्देश देना था की आदित्यनाथ निर्विवाद रूप से प्रदेश में भाजपा के सर्वमान्य नेता हैं। लेकिन बात यही पर गड़बड़ हो सकती है क्यों की ऐसे वक़्त में जब बीजीपी में केवल एक व्यक्ति की सुनी जाती है और एक व्यक्ति की ही चलती है कोई और नेता अपने को बड़ा प्रोजेक्ट करे ये बात उस नेता के खिलाफ भी जा सकती है।
बात वही तक नहीं थमती है और गोरखपुर में पीएम द्वारा एम्स और फ़र्टिलाइज़र कारखाने की आधारशिला रखने के बाद एक और पोस्टर अवतरित होता है और उसमे योगी को तो भगवान् राम ही बन दिया गया। अब ऐसा तो नहीं माना जा सकता इन पोस्टरों के पीछे योगी का कोई हाथ ही न हो। क्योंकि गोरखपुर में कुछ भी उनकी सहमति के बिना संभव नहीं है।
एक बात और गौर करने की है गोरखनाथ मंदिर के महंत आदित्यनाथ के पक्ष में ज्यादातर पोस्टर बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा द्वारा लगाए गए हैं। और इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है की ऐसे पोस्टर के द्वारा यह सन्देश देने का प्रयास किया जा रहा की कट्टर हिंदूवादी छवि के नेता आदित्यनाथ का एक्सेप्टेंस माइनॉरिटी समुदाय में भी है।
जो भी हो अब देखना यह है पोस्टर में कभी हनुमान, कभी राम और कभी शेर पर बैठे नायक बने योगी आदित्यनाथ को केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश अपना नेता मान उन्हें मुख्य मंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करता है या नहीं।
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