फाइनल रिपोर्ट स्पेशल

राजनीति में साहबजादों को जमाने में अब तक फेल रहें हैं मंडल के दिग्गज नेता

Vinay-Shankar-Tiwari-and-CPगोरखपुर: यूँ तो हर पार्टी में भाई-भतीजावाद, परिवारवाद का आरोप-प्रत्यारोप चलता रहता है और हो भी क्यों ना जब परिवार का मुखिया सियासत में नाम और दाम कमा लिया हो तो उसे संचित रखने की जिम्मेदारी अगली पीढ़ी को ही जाती है। राजनीति की जंग में विरासत की खोज भी चलती रहती है। जिसमे चुनाव एक अहम विषय होता है जिसके माध्यम से विरासत का वारिस तलाश किया जाता है।
लेकिन देखा जाए तो गोरखपुर-बस्ती मण्डल में पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान दिग्गज नेताओं के साहबजादे इस विरासत के इम्तेहान में औंधे मुंह गिरकर असफल हो गए थे। कुछ ऐसे ही साहबजादों के बारे में हम बता रहे है चुनावी इतिहास के झरोखे से।
अगर कोई भी पार्टी उनको हिम्मत बटोर कर इस बार भी टिकट देती है तो इस चुनाव में भी उनका इम्तेहान होना लाजिमी है। इन दिग्गजों में पहले दो नाम पंडित हरिशंकर तिवारी और मार्कण्डेय चंद का आता है।
हरिशंकर तिवारी के पुत्र विनय शंकर त्रिपाठी इस बार चिल्लूपार से बसपा के प्रत्यशी हैं तो वही पुत्र सीपी चंद का है,जो सफलता की इबारत लिखकर अब एमएलसी बन चुके है।
अब उनकी ही राह पर अन्य दिग्गज नेता पुत्र भी टिकट की कतार में है। बता दें कि वर्ष 2012 के पिछले विधान सभा चुनाव में कद्दावर नेता अमर मणि त्रिपाठी ने अपने पुत्र अमन मणि त्रिपाठी को महराजगंज के नौतनवां विधानसभा से सपा प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतारा। लेकिन अमन मणि त्रिपाठी की स्थिति चुनाव में सेकेण्ड रनर की रही।
इसके बाद अगर बात करें लोकतांत्रिक कांग्रेस के अध्यक्ष हरिशंकर तिवारी की तो उनके पुत्र विनय शंकर तिवारी सिद्धार्थनगर के बांसी विधानसभा से बसपा प्रत्याशी के रूप में मुकद्दर आजमाने उतरे लेकिन वहां भी निराशा हाथ लगी। उन्हें इस चुनाव में तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। अब वर्ष 2017 के आगामी चुनाव में उन्हें चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से बसपा से टिकट मिल चुका है। जबकि पिछले चुनाव में हरिशंकर तिवारी इस क्षेत्र से चुनाव हार गए थे।
इसी क्रम में महराजगंज के पूर्व कांग्रेसी सांसद व जमीन से जुड़े नेता हर्षवर्धन ने गोरखपुर के कैम्पियरगंज से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में अपने पुत्र राज्यवर्धन को चुनाव लड़ाया लेकिन वह भी नाकाम रहे। उन्हें करारी हार का चेहरा देखते हुए पांचवे स्थान से संतोष करना पड़ा।
अब बात करे सत्ताधारी दल सपा के पूर्व राज्यमंत्री दिग्गज केसी पांडेय की तो उन्होंने अपने पुत्र अनूप पांडेय को चौरीचैरा विधानसभा से सपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ाया। जो बसपा के जेपी निषाद से हारकर दूसरे स्थान पर पहुंच गए। पूर्व मंत्री मारकंडे चंद ने अपने पुत्र सीपी चंद को चिल्लूपार से सपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ाया लेकिन सीपी चंद चुनाव हार गए। सीपी चंद इस वक्त एमएलसी है।
कांग्रेस के जितेंद्र सिंह ने अपने पुत्र जय सिंह को महराजगंज के सिसवां से चुनाव में हाथ का साथ लेकर उतारा लेकिन उन्हे जनता का साथ नहीं मिला। वर्तमान भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने बस्ती सदर विधानसभा से अपने पुत्र अभिषेक पाल को कांग्रेस के टिकट से चुनाव मैदान में उतारा लेकिन वह भी जीत से दूर औंधे मुंह ही गिरे और दूसरे स्थान से ही संतोष करना पड़ा।
लेकिन एक बात यह कि सभी साहबजादे हारे तो किन्तु चुनाव दमदारी से लड़े। जिसमे विनय शंकर, राज्यवर्धन व जय सिंह को छोड़कर सभी दूसरे स्थान पर रहे।
अब चूँकि वर्ष 2017 का चुनाव सिर पर है और एक बार पुनः भविष्य की राह तलाश रहे इन दिग्गज नेताओं के नाकाम साहबजादे आगामी विधानसभा चुनाव में क्या गुल खिलाते है देखना दिलचस्प रहेगा।
एक नजर पिछले चुनाव में साहबजादों की रिपोर्ट कार्ड
पार्टी          उम्मीदवार              विधानसभा क्षेत्र             मिलें वोट        पोजिशन
सपा        अमन मणि त्रिपाठी          नौतनवां                 68747        दूसरा स्थान
बसपा      विनय शंकर त्रिपाठी          बांसी                    36412        तीसरा स्थान
कांग्रेस      राज्यवर्धन               कैंपियरगंज                  2389         पांचवा स्थान
सपा        अनूप पांडे                 चौरीचौरा                  29086          दूसरा स्थान
सपा        सीपी चंद                 चिल्लूपार                  42763          दूसरा स्थान
कांग्रेस   अभिषेक पाल              बस्ती सदर                34008           दूसरा स्थान

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