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वैभव मिश्रा: देवरिया के इस कैलाश खेर को सुन खड़े हो जाएंगे आपके रोंगटे, हो जाएंगे मंत्रमुग्ध

देवरिया के इस कैलाश खेर वैभव मिश्रा हो जाएंगे मंत्रमुग्ध

प्रीति मिश्रा
देवरिया: आमतौर पर यह माना जाता है कि छोटे शहर ज्यादा जीवंत होते हैं और यही कारण है कि इन शहरों में नवीन विचारों, नयी सोच की कमी नहीं होती है। आज के दौर में यह बात और प्रभावी हो गयी है। ऐसा नहीं है कि पहले छोटे शहरों या गावों में प्रतिभा नहीं बस्ती थी। लेकिन सच यह है कि कई प्रतिभाएं सही मंच ना मिलने से उन्ही छोटे शहरों में दब गयीं।

अब ऐसा नहीं है। सोशल मीडिया के चाहे लाख नुकसान हों लेकिन इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के इस युग में अब छोटे शहर के लोग भी अपने आप को, अपनी प्रतिभा को बड़े मंच पर दर्शा पा रहे हैं। आज हम ऐसे ही एक प्रतिभा की बात करेंगे। नाम है वैभव मिश्रा। लड़का रहता देवरिया में है। लेकिन जब गाता है तो बड़े बड़े भी ध्यान से सुनते हैं। यूँ तो इस युवा गायक की किसी से भी तुलना बहुत जल्दबाजी होगी लेकिन आप उसे देवरिया का कैलाश खेर कह सकते हैं।

मात्र 21 साल के इस लड़के ने देश के सैनिकों को समर्पित एक ऐसा गाना तैयार किया है जिसे सुनकर आपके रौंगटे खड़े हो जायेंगे। ना केवल गायकी बल्कि वीडियो यहभी सन्देश देता है कि एक परिवार के लाल का देश पर शहीद हो जाने के बाद कैसे उन वीरों का परिवार अपना जीवन यापन करता है। इस गाने को संगीत कृष्णा तिवारी ने दिया है। वहीँ वीडियो का कांसेप्ट खुद वैभव मिश्रा और काजल राज का है। यूट्यूब पर भी इस गाने ने अच्छा खासा धूम मचाया है। अभी तक कई हजार लोगों को सुना और देखा है।

यकीन ना हो तो आप खुद सुन लीजिये। देखें VIDEO

देवरिया के सोंदा गाँव में रहने वाले वैभव के पिता उदय शंकर मिश्रा अब इस दुनिया में नहीं हैं, वहीँ उनकी माता शिवकुमारी देवी एक गृहिणी हैं। वैभव के पिता का देहांत 2013 में हो गया था। वैभव ने शहर के नवजीवन मिशन स्कूल से 10वीं और सेंट्रल अकादमी से इंटरमीडिएट तक की पढाई की। उसके बाद वैभव ने मेरठ के सुभारती विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया। तीन भाइयों में सबसे छोटे वैभव का रुझान बचपन से ही संगीत की ओर था।

या यूँ कह सकते हैं कि वैभव को संगीत उसके ननिहाल से विरासत में मिली। वैभव के सबसे छोटे मामा प्रदीप शुक्ल को भी गीत संगीत का बहुत शौक था। बरहज के पास तेलिया शुक्ल गाँव के निवासी प्रदीप उस क्षेत्र में अपनी गायकी से भी जाने जाते हैं। प्रदीप द्वारा गाये हुए भजनों का अभी भी कोई सानी नहीं है। हालांकि कोई मंच ना मिल पाने के कारण प्रदीप गायकी के क्षेत्र में कोई बड़ा मुकाम नहीं हासिल कर पाए और एक प्रतिभा अपने गाँव में ही दबकर रही गयी।

अपने मामा प्रदीप को ही गाते सुनकर वैभव ने संगीत की दुनिया में अपना नाम बनाने की ठान ली। खास बात यह है कि वैभव ने संगीत की कोई बहुत बड़ी शिक्षा दीक्षा नहीं ली है। वैभव इस समय अपने शहर देवरिया में एक जाना पहचाना नाम हो गया है।

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