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विश्वविद्यालय गोरखपुर के निलंबित छात्रों प्रणव, प्रियेश का दर्द सोशल मीडिया पर छलका, शहर के युवाओं ने भी दिया समर्थन

विश्वविद्यालय गोरखपुर छात्रों ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर दर्द को किया बयान

आयुष द्विवेदी
गोरखपुर: दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर के चीफ प्रॉक्टर के घर पर पथराव मामले में निलंबित विधि के छात्रों ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर अपने दर्द को बयान किया है। यही नहीं इन छात्रों द्वारा अपने पक्ष में किये गए पोस्ट को सोशल मीडिया पर समर्थन भी खूब मिल रहा है। गोरखपुर के कई युवा इन छात्रों द्वारा फेसबुक पर डाले गए पोस्ट को अपने वॉल पर शेयर कर निलंबित छात्रों के प्रति अपनी संवेदना और समर्थन जता रहे हैं।

चीफ प्रॉक्टर के घर पर पथराव मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने विधि के छात्र प्रणव द्विवेदी, प्रियेश मालवीय, सुमित राय व जितेन्द्र मणि त्रिपाठी को निलंबित कर दिया।

निलंबन के विरोध में प्रणव अपने फेसबुक वॉल पर लिखते हैं,”पढ़ने लिखने के साथ साथ अन्य सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेता हूँ। मेरे दोस्त मेरे मोटापे को लेकर खूब मजाक करते हैं लेकिन मुझे बिलकुल बुरा नहीं लगता क्योंकि मैं जब उनके चेहरे पर तनाव भरी जिंदगानी में हंसी ख़ुशी के दो पल देखता हूँ तो मुझे सुकून मिलता है। और रह गयी बात मोटापे की तो इसकी वजह से मैं बहुत तेज़ दौड़भाग भी नहीं कर पाता। इतना तेज नहीं दौड़ पाता कि किसी के घर पर पत्थर भी चला दूं और गोली भी चला दूं और उसके परिवार वालों को जान से मारने की कोशिश करके तेजी से भाग कर वापस आ जाऊं और हत्या के प्रयास, दंगा, बलवा जैसे मुकदमे लिखे जाने जाने का इन्तजार करू या चुपचाप आराम से बैठा रहूँ कि मेरा कोई क्या बिगाड़ सकता है।”

इसी तरह की अपील दूसरे निलंबित छात्र प्रियेश मालवीय भी फेसबुक पर कर रहे हैं और उन्हें भी विश्वविद्यालय के तमाम छात्रों सहित गोरखपुर का कई युवाओं का खूब समर्थन मिल रहा है। प्रियेश लिखते हैं,”मेरे सर से पिता का साया उठ गया है, मेरे घर पर बूढ़ी माँ पड़ी हुई है, मैं कोई बहुत रईस खानदान से नहीं हूँ। बमुश्किल घर का गुजारा होता है। एक साधारण छात्र की हैसियत से जो गाँव से शहर की ओर इस उम्मीद से आया था कि शायद कुछ बेहतर करके नाम कमाऊँगा, अपनी पढ़ाई पूरी करके देश दुनिया के भलाई में अपना थोड़ा सा योगदान दे पाउँगा।”

”आज मैं 307 का आरोपी हूँ, मतलब मैं ह्त्या के प्रयास का गुनहगार बनाया जा रहा हूँ। मुझे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस छोड़ दी गयी है। मैं विधि का छात्र था रातोरात मैं एक अपराधी बन गया, वो भी भगोड़ा। मेरे इम्तहान शुरू होने में हफ्ते भर से कम समय बचा है, यह मेरा अंतिम साल और अंतिम सेमेस्टर था। आज मुझे गोरखपुर विश्वविद्यालय ने भी अपराधी मानकर निकाल बाहर किया। अब मेरे सामने दो बड़े सवाल हैं…. या तो मैं चुपचाप जेल की काल कोठरी में जाकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर लूँ या फिर इन सबके खिलाफ जोरदार आवाज़ बुलन्द कर के सबसे लड़ता फिरूं और अवसाद में चला जाऊं।”

आपको बता दें कि मुख्य नियंता प्रोफेसर गोपाल प्रसाद ने 27 दिसंबर को हीरापुरी कॉलोनी में आवासीय क्षेत्र में पथराव एवं उपद्रव के आरोप में निलंबित किए गये विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होने की छूट दे दी है। हलाकि उनके विरुद्ध लंबित शिकायत पर विधिसम्मत कार्यवाही होती रहेगी।

(फोटो साभार प्रणव द्विवेदी और प्रियेश मालवीय के फेसबुक वॉल से )

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