फाइनल रिपोर्ट स्पेशल

विभागीय उपेक्षा का शिकार हो गया अपना विनोद वन

Vinod-Van-in-Gorakhpurगोरखपुर: 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर की उबलती गर्मी से परेशान वन्य जीव, पशु पक्षी। जी हां गर्मी की मार सिर्फ इन्सानो पर ही नहीं बल्कि जानवरों के साथ साथ वन्य जीवो पर भी पड रही है। गोरखपुर के विनोद बन का हाल भी कुछ ऐसा ही है, वहा पर हिरन हो, अजगर हो, पशु पक्षी या फिर अन्य वन जीव हो, सभी का हाल बेहाल है।
ऊपर से वन अधिकारियो और कर्मचारियों की उदासीनता, हिरनों के जगह पर उनके लिए पानी पिने के लिए कई जगह बनाये गए है, लेकिन सभी सूखे हुए है, आसमन खुला होने के वजह से पेड़ो के निचे गर्मी से बचने की कवायद करते हिरन और पानी के एक बूंद के लिए तरसते वन्य जीव अब ये अनबोल पशु पक्षी और वन जीव अपनी तकलीफे कहे तो किससे।
Vinod-Vanगोरखपुर मुख्यालय से तक़रीबन 15 किलोमीटर की दुरी पर कुशीनगर मार्ग पर स्थित कुसमही जंगल में स्थित विनोद वन जो 1980 के दशक में पुर्व मुख्यमन्त्री स्व वीर बहादुर सिंह ने महानगर वाशियों के आमोद प्रमोद के कुछ क्षण बिताने के लिए बनवाया था। तक़रीबन ढाई हजार हेक्टेयर फैले इस विनोद वन में जहा पर एक मिनी चिड़िया घर बनाया गया था ,जहा पर पहले तो काफी जानवर हुआ करते थे, काफी पशु पक्षी देखने को मिला करते थे, लेकिन आज सरकारी उदासीनता के चलते महज गिने चुने पशु पक्षी यहा बचे है, और वो भी इस गर्मी में बेहाल है, उनकी देख रेख करने में वन विभाग विफल साबित हुआ है।
Vinod-Van-1अब ऐसे में ये वन्य जीव कहा पर जाएँ ये एक बड़ा सवाल है और इनके देख रेख के लिए बकायदे, हर साल बजट भी आता है, बावजूद इसके ये पैसा कहा जाता है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है, वन्य जीव जन्तुओ की बात करे तो खुले आसमान के निचे विभिन्न प्रजातियों के हिरन जिनकी संख्या बढाने के लिए निरंतर सरकार प्रयत्नशील रहती है, लेकिन गोरखपुर के विनोद वन में मौजूद हिरन की संख्या महज 16 में ही सिमट कर रही गई है।
Vinod-Van-2अजगर बाड़ा भी खाली हो गया है साथ ही मोर के बाड़े में केवल एक ही मोर और चन्द तोते और खरगोश ही बचे है।जिनमे खरगोश भी इलाज़ के अभाव में बीमार है। जो बचे भी है वो वन विभाग के अधिकारियो और कर्मचारियों की लापरवाही से दम तोड़ रहे है। उसपर भी अप्रैल माह में ही गर्मी जहा चरम पर है और इस गर्मी से जहाँ इंसानों का जीना मुहाल है और वो किसी तरह से इस गर्मी से निजात पा भी जा रहा है, लेकिन ये बेजुबान पशु पक्षी और वन्य जीव जंतु अपनी तकलीफ किससे कहे, और इस गर्मी से वो राहत कैसे पाए |
इस विनोद वन के हिरन इस गर्मी में जब अपने रहनुमा वन विभाग के उपेक्षा का शिकार हुए, तो अपने जीवन को कैसे जी रहे है। वन क्षेत्र के अंतिम छोर यानी सडक के किनारे बैरियर के पास आकर ये बाहरी लोगो के हाथो में इस गर्मी से निजात पाने के लिए खीरा व् अन्य ठंढा चीजो का सेवन कर रहे है। जबकि माना जाता है कि हिरन थोड़ा शर्मीले किस्म के होते है और वो आम इन्शानो से दूर होकर रहते है। लेकिन गर्मी के वजह से ये आज उन्हें अपना हमदर्द मान रहे है।
Vinod-Van-4चूँकि इन्हें भी मालुम है कि हर रोज इन्हें देखने के लिए इन्शान जररू आयेंगे, और उनके पास जाने से उन्हें थोड़ी ठंढी चीज खाने को मिलेगी, जिससे उन्हें इस गर्मी से थोड़े ही देर कम से राहत तो मिलेगी।
इस सम्बन्ध में जब जिले के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) जनार्दन शर्मा ने कहा कि देखिये बजट में जितना धन मिलता है उसे वन्य जीवो पर खर्च किया जाता है।रही बात संसाधनो के अभाव की तो अपने स्तर से इसकी बेहतरी के लिए कोशिश की जा रही है।
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