गोरखपुर

छोटी उम्र के अजहर के बड़े कारनामे

Azhar-in-its-libraryगोरखपुर: उम्र काबिलीयत की मोहताज नहीं होती है। दिल में लगन हो तो कोई काम नामुमकिन नहीं। इसे साबित किया इस शहर के मौलाना मोहम्मद अजहर शम्सी ने। तुर्कमानपुर रशीद मंजिल के रहने वाले मौलाना मोहम्मद अजहर शम्सी ने महज 19 साल की उम्र में अदबी कारनामा कर सभी को अचरज में डाल कर दिया।
शम्सी लाइब्रेरी की स्थापना, मदरसा जामिया रजा-ए-मुस्तफा, तंजीम कारवाने अहले सुन्नत, आधा दर्जन से ज्यादा किताबें, जिया-ए-शम्स मजमून में डेढ़ साल तक संपादन, आठ से दस किताबों में खुसूसी मेहनत अजहर के कारनामें है। जिसने भी सुना वह हैरतजदां हो गया।
Shamshi-libraryबात करते है किताब लेखन से। इन्होंनेब लिखी 313 इस्लाही मालूमात। जो हर खासोआम में मशहूर हो चुकी है। जिसका हिंदी अनुवाद भी जल्द बाजार में आने वाला है। इस किताब में उन्होंने समाज में फैली गलत फहमियों की निशानदेही कर उसके जवाबात लिखे। इसमें दीनी व दुनियावी तमाम तरह के मसले है।
बचपन से ही किताबों के शौकीन अजहर ने नामवर उलेमा किराम की जिदंगी का जायजा लिया तो पाया कि इनकी जिदंगी को नमूना-ए-अमल बना कर कामयाबी पायी जा सकती है। इसी से इन्हें किताब पायी जा सकती है। इसी से इन्हें किताब लिखने का शौक जागा। जिसका नमूना इनकी उक्त किताब है। इनकी मशहूर किताब मंजरे आम पर 10 जून 2013 को आ चुकी है। इसी दिन इन्हें कारी की डिग्री हिन्दुस्तान के मशहूर आलिमों के मौजूदगी में मदरसा शम्सुल उलूम घोषी मऊ में हजारों लोगों की तारीफ की।
Azhar-and-its-friend-in-itsइसके अलावा इन्होंने कई और किताबें लिखी जिनमें हैरतअंगेज कुरआनी मालूमात, मख्जने इस्लाह, निकाह और तलाक सवाल जवाब की रोशनी में, रसूल की बशारत सहाबा किराम की शहादत, अशरे हाजिर की कहानी हुजूर की जुबानी, नमाज और नमाजी, इल्म के बिखरे मोती जिस्म अतहर और साइंस, नौजवानी में बुढ़ापा क्यूं व चालीस हदीस चालीस जवान शमिल है। इसके अलावा कई किताबों को तरतीब दिलाने में काफी मेहनत की। जिसमें उलेमा-ए-हक, शाने बदंगी, तजिकरा-ए-मख्दमू सिमनां मसाइखे इजाम काबिले जिक्र है। यह बड़े अखबारात में मजमून भी लिखते हैं। खुससी तौर पर इन्होंने जिया-ए- शम्स में डेढ़ साल तक संपादन कार्य किया।
Azharइन्होंने 31 जुलाई 2014 को तुर्कमानपुर में शम्सी लाइब्रेरी की स्थापना की। जिसमें तकरीबन 500 से ज्यादा किताबंे फिक्ह, हदीस, सीरत, तफसीर, तारीख वगैरह विभिन्न टापिकों पर है। जिससे शहर के उलेमा व आवाम फायदा उठाते है। इसके अलावा तंजीम कारवाने अहले सुन्नत कायम किया। जो दीनी खिदमत अंजाम देती है। इसके अलावा एक मदरसा जामिया-रजा-ए-मुस्तफा कायम किया। जिसमें करीब 150 बच्चे तालीम हासिल कर रहे है। इनके दोस्तों मुनव्वर अहमद, तनवीर शब्बीर, मौलाना कलाम, अब्दुस्लाम, फरहान अहमद ने इनका काफी साथ दिया।
Shamshi-in-its-libraryइन्होंने अपनी पूरी तालीम जामिया शमसूल उलूम घोसी में हासिल की। इस समय यह मुफ्ती की डिग्री हासिल कर रहे है। अगले साल इन्हें मुफ्ती की डिग्री मिल जायेगी। इसके बाद यह जामिया अजहर मिस्र विवि में दाखिला लेने की ख्वाहिशमंद है। इन्होंने बताया कि 2012 में आलिम, 2013 में कारी , 2014 में मौलाना की डिग्री हासिल कर चुके है। इनके पिता जाबिर अली व मां आसमां खातून बेटे की कामयाबी से काफी खुश है।
अजहर की कामियाबी में कई आलिमें दीन का हाथ है। उनमें डा. मोहम्मद आसिम आजमी, मौलाना जियाउल मुस्तफा, मौलाना रिजवान अहमद शरीफी, मौलाना मुमताज आदि काबिले जिक्र है। इस होनहार ने एक चीज तो साबित कर दी कि दिल में पुख्ता इरादा हो तो हर काम आसानी से किया जा सकता है। उम्र किसी चीज की मोहताज नहीं होती है। दिशा निर्देशन सही मिले तो कामयाबी कदम चूूमती है।
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