गोरखपुर

मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट चढ़ा अतिक्रमण की भेंट, मोहद्दीपुर से विश्वविद्यालय चौराहे तक का साईकिल ट्रैक बना डग्गामार बसो का बसेरा

cycle-trakगोरखपुर: प्रदेश को प्रदूषणमुक्त करने और पार्टी के चुनाव चिन्ह को लोगों के जेहन में बनाये रखने के लिए मुख्यमंत्री की ड्रीम प्रोजेक्ट साईकिल पथ अपने लोकार्पण के बाद से ही किस्मत पर रो रहा है।

मुख्यमंत्री के हाथो लोकार्पण के लिए दिन रात एक कर तैयार हुए साईकिल ट्रैक का बुरा हाल है। पेड-पौधो और  बिजली के खंभों के लगभग 2 दर्जन से अधिक अवरोधो के साथ 1.35 करोड़ में बनकर तैयार हुआ साईकिल ट्रैक आज पूरी तरह से दुकानदारो द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। वही ट्रैक के दोनों तरफ खड़ी डग्गामार बसो की कतारे जाम की वजह भी बन रही है।

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मोहद्दीपुर से विश्वविद्यालय चौराहे तक बने साईकिल ट्रैक का मुख्यमंत्री ने बीते 17 दिसम्बर को लोकार्पण किया था। जीडीए और नगर निगम के अफसर एक माह के अंतराल के बाद ही अतिक्रमण को लेकर बेफिक्र है। वही दोनों जिम्मेदार एक दूसरे पर अतिक्रमण की जिम्मेदारी थोप रहे है, अस्थायी अतिक्रमण पर अब स्थायी होने की तैयारी में है।

ट्रैक पर आधा दर्जन लिट्टी चोखा की दुकाने बाकायदा कुर्सी मेज के साथ सजाई गई है। डग्गामार बसो के चलते लगभग दर्जन भर से अधिक मूंगफली, चाय नास्ते, जूस, भुजा व अन्य ठेलो पर दुकाने गुलजार हो रही है। इतना ही नहीं कुछ ने तो झोपड़ पट्टी भी लगा रखी है और उसी से वो अपना जीवन यापन भी कर रहे है।

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वही कुछ दुकानदारो से बात करने पर रमेश नामक लिट्टी चोखा के दुकानदार ने बताया कि बिहार जाने वाली बसो के चलते यहा लिट्टी चोखा की खूब डिमाण्ड है और जहा डिमाण्ड होगी वही दुकान लगाएंगे न थोडा बहुत देकर के काम चल जाता है।

मूंगफली विक्रेता अभिषेक ने बताया कि काफी अच्छी बिक्री हो जाती है यहा पर जब साईकिल ट्रैक नहीं चल रहा तो इसकी उपयोगिता ही कहा है।

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वही दूसरी तरफ जब जिम्मेदार अधिकारियो से बात हुई तो जीडीए के एक अधिकारी ने कहा की जीडीए का काम था ट्रैक बनाना सो हमने बना दिया अब उसपर अतिक्रमण रोकना नगर निगम की जिम्मेदारी है, इस बाबत पत्र भेजा गया है प्रक्रिया चल रही होगी।

नगर निगम के अधिकारी ने बताया की जीडीए ने अभी ट्रैक को हैंडओवर नहीं किया है, निर्माण पूरा होने का पत्र अभी जीडीए से प्राप्त नहीं हुआ है। और अतिक्रमण हटाने को लेकर एसएनए से बोला जा रहा है।

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ये हैं गोरखपुर के चुने हुए जनप्रतिनिधि । सांसद, विधायक, मेयर और अन्य जनता के नुमाइंदे

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