गोरखपुर

शहर के समाचार पत्र विक्रेताओं का हड़ताल रहा जारी, नहीं बंटा कोई भी छोटा-बड़ा अखबार


गोरखपुर: पारिश्रमिक बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे शहर के 1300 समाचार विक्रेताओं का हड़ताल आज ही जारी रहा। हड़ताल के कारण शहर के लगभग सभी छोटे-बड़े दैनिक अखबार शहर में नहीं बंटे। शहर में हालत यह है हॉकर स्टेशन से किसी को भी अखबार उठाने नहीं दे रही हैं। और अगर समाचार पत्र विक्रेता संघ की माने तो उनकी हड़ताल के कारण डेढ़ लाख अख़बारों का वितरण नहीं हुआ।
समाचार पत्र विक्रेता संघ के अद्यक्ष राम श्रेष्ठ पासवान का कहना है की अभी तक हॉकर चेतावनी स्वरुप हड़ताल पर थे लेकिन अब वो आर पार की लड़ाई लड़ने को कमर कस चुके हैं।
उनका कहना है की अमर उजाला का कॉम्पैक्ट जिस की कीमत 1 रुपये थी पर 50 % कमीशन देता था लेकिन अब कंपनी ने कीमत बढ़ा कर 2 रुपये कर दिया है लेकिन कमीशन पुराने रेट का ही मिल रहा है और विक्रेताओं को यह मंजूर नहीं है।
राम श्रेष्ठ ने कहा की वैसे तो बनारस से अख़बार मालिकों के कुछ प्रतिनिधि आये थे और बात तय हो गयी थी लेकिन बाद में अखबार कंपनी अपनी बातों से पीछे हैट गयी इसलिए विक्रेताओं ने हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया है।
समाचार पत्र विक्रेता पिछले चार महीने से पारिश्रमिक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। काफी दिनों से अखबार उन्हें तयशुदा 30 फीसदी कमीशन दे रहे हैं जबकि इस दौरान अखबारों की विज्ञापन से आय काफी बढ़ी है।
गोरखपुर में चार प्रमुख अखबारों के दाम 3.50 रूपए है। समाचार पत्र विक्रेताओं ने समाचार पत्रों के प्रबंधन से कमशीन बढ़ाने की मांग की। साथ ही उन्होंने पर्चा जारी कर पाठकों से अपनी समस्याओं का उल्लेख करते हुए उनसे हर माह 15 रूपए सार्विस चार्ज देने की अपील की।
संगठन के दबाव पर अमर उजाला और हिन्दुस्तान ने दो माह पहले समाचार पत्र विक्रेताओं को हर समाचार पत्र पर पहले से तयशुदा 30 फीसदी कमीशन के अलावा 25 पैसे अतिरिक्त शुल्क देना स्वीकार कर लिया। दैनिक जागरण ने अतिरिक्त शुल्क नहीं दिया। इसी बीच तीनों समाचार पत्रों ने एक राय होते हुए फरवरी से यह शुल्क भी देने से इंकार कर दिया।
इससे खफा समाचार पत्र विक्रेताओं ने एक फरवरी को दैनिक जागरण वितरित नहीं किया। और आज से उन्होंने किसी भी कीमत पर वितरण का कार्य पूरी तरह से ठप निर्णय ले।

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