गोरखपुर

सरकार के इशारे पर हुआ मेरे मानवाधिकारों का हनन: संजय निषाद

Sanjay-Nishadगोरखपुर: ”सामाजिक रूप से राजनैतिक संरक्षण न होने के कारण शासन के इशारे पर पुलिस प्रशासन ने तीस हजार आंदोलनकारियों पर गोलियां चलाई। जेल में मेरे मानवाधिकारों का हनन कर चिकित्सकीय सुविधा न देकर तन्हाई बैरक में रखा गया। आने वाले समय में जो भी पार्टी निषाद समाज को न्याय व अधिकार देगी निषाद एकता परिषद् 2017 में उसके साथ चुनाव मिलकर लड़ेगी।”
उक्त आरोप और बयान राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाक्टर संजय निषाद ने प्रेस वार्ता के दौरान दिया।
डॉक्टर संजय निषाद ने कहा कि घटना के वक्त जिले से सपा की एक मात्र विधायक और निषाद समाज से ताल्लुक रखने वाली विधायक राजमती निषाद के पुत्र अमरेंद्र निषाद भी मौजूद थे। उनके सामने ही पुलिस प्रशासन ने आंदोलनकारियों पर गोलियां चलाई थी। जिसमे एक की मौत भी हो गई तथा 37 निर्दोष लोगो को क्रूरता के साथ पीट कर जेल भेजा गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि संत कबीर नगर के मगहर में महिलाओं की इज़्ज़त लूटी गयी। जिसका वीडियो क्लिप उनके पास मौजूद है। राष्ट्रीय महिला आयोग को ज्ञापन देने के बाद भी कार्यवाही नहीं हुई।14 दिन बाद समाज के मंत्री ऍम एल सी एवम् नेतागण दिखावे के लिए जेल में मुलाकात किया और आश्वासन भी दिया कि हम रिहा कराएंगे लेकिन इसके उलट 7 दिन बाद 303,307 की धारा बढ़ा दिया।क्या यह निषाद समाज के साथ अन्याय नहीं है।
उन्होंने कहा,”जेल में मुझे दिल का दौरा पड़ने पर जेल प्रशासन द्वारा जिला अस्पताल रेफेर कर के वापस तन्हाई बैरक में डाल दिया गया। जबकि डॉक्टरों ने मेरी हालात देखकर पी जी आई और बी आर डी मेडिकल कालेज रेफर किया था।”
क्या है मामला:
पश्चिम उत्तर प्रदेश में जाट बिरादरी द्वारा बीते वर्ष आरक्षण की मांग को लेकर चलाये आंदोलन की तर्ज पर निषाद समाज ने भी प्रदेश में संख्या बल को देखते हुए बीते 7 जून 2015 को गोरखपुर लखनऊ रेल मार्ग स्थित मगहर के समीप रेल रोको आंदोलन किया था।जिसमे पुलिस द्वारा आंदोलनकारियो पर गोली चलाकर रेल ट्रैक खाली कराने की कोशिश की गयी थी और इसी फायरिंग में एक आंदोलनकारी इटावा जनपद निवासी अखिलेश सिंह की मौत हो गई थी।
इसके बाद से प्रशासन द्वारा मुक़दमा और गिरफ्तारियों का दौर शुरू हुआ।इस मामले में मुख्य आरोपी बनाये जाने के बाद संजय निषाद ने 14 दिसंबर 2015 को सर्रेंडर कर दिया था।जिसमे आज एक माह बाद हाई कोर्ट के निर्देश् पर उनकी जमानत हुई।

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