गोरखपुर

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में घोटाले का पर्दाफाश; 35 कर्मचारी बर्खास्त

MMMUTगोरखपुर: जनपद के एकमात्र प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गठन के दो वर्ष के भीतर ही इसमें हुए घोटालों की परते खुलने लगी है। पुर्व में मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कालेज बने रहने के दौरान इसमें समूह ग और घ की नियुक्तियों में तत्कालीन प्राचार्य ने नियम कानूनों को ताक पर रख दिया था।
इस मामले को लेकर गोरखपुर की एक संस्था भारत नेपाल मैत्री संघ के अध्यक्ष स्व मोहनलाल गुप्ता ने शासन स्तर तक जांच करने के लिए पत्राचार किया था। जिसमे काफी लेट लतीफी के बाद वर्ष 2015 में जांच के आदेश दिए गए थे।
बता दे कि पुर्व में मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कालेज के तत्कालीन प्राचार्य डॉ बी बी सिंह के कार्यकाल में कालेज में समूह ग और घ की लगभग सात दर्जन नियुक्तियां की गई थी। जिसमे बाद में अनियमितता का आरोप लगने लगा। जिसे लेकर भारत नेपाल मैत्री संघ के अध्यक्ष स्व मोहन लाल गुप्ता ने इसे गंभीर मुद्दा मानते हुए इसकी शिकायत कमिश्नर से लगायत शासन स्तर तक पत्राचार कर जांच की मांग किया। साल 2009 में हुईं इन नियुक्तियों में धांधली नियमों का उल्लंघन अपनों को उपकृत करने जैसे कई आरोप लगाए गए थे, जिनकी पुष्टि शासन स्तर से कराई गई जांच में हुई थी।
जिसे देखते हुए मामले में शासन से विशेष सचिव स्तर के अधिकारी ने जांच कर अपनी आख्या दी थी।किन्तु काफी दिनों तक यह मामला ठन्डे बस्ते में पड़ा रहा।
बाद में स्थानीय लोगो की मांग पर इसे लगभग दो वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व् विधानसभा अध्यक्ष की उपस्थिति में प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय घोषित कर दिया गया और शुरू हुई धांधली की जांच।
अब इस मामले में मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी (MMMUT) में वर्ष 2009 से सेवा दे रहे 35 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। कर्मचारियों की बर्खास्तगी शासन के निर्देश पर किया गया है।
शासन से जांच करने आये तत्कालीन विशेष सचिव ने अपनी आख्या में पुरे मामले में अनियमितताएं पाये जाने की बात कही थी। जिसमे बीते सप्ताह खुली फाइलो का अवलोकन करने के बाद शासन ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को जांच रिपोर्ट के हवाले से सभी 35 नियुक्तियां निरस्त करने का निर्देश दिया। जिसके अनुपालन में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी 35 कर्मचारियों की बर्खास्तगी का आदेश गुरुवार की देर शाम जारी कर दिया ।
बता दे कि इसके पुर्व मनमाने ढंग से नियुक्तियां करने के आरोपी रहे तत्कालीन कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. बीबी सिंह पर जुर्माने के रूप में उनके पेंशन से 30 फीसद की कटौती का आदेश भी हो चुका है।

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