गोरखपुर

जेएनयू घटना विश्वविद्यालय की शैक्षिक अराजकता को प्रदर्शित करता है: योगी आदित्यनाथ

Aditynath-on-JUN-incidentगोरखपुर: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के संदर्भ में भारत सरकार की कार्यवाहीं को सर्वथा उचित ठहराते हुए गोरक्षपीठाधीश्वर एवं गोरखपुर के सांसद महन्त योगी आदित्यनाथ ने कहा है की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा है और जब ये स्वतंत्रता राष्ट्रीय सम्प्रभुता पर ही प्रहार करने लग जाय तो उन स्थितियों में ऐसे उच्छखृल और उदंग तत्वों के खिलाफ कार्यवाहीं आवश्यक हो जाती है।
पुलिस की कार्यवाहीं का समर्थन करते हुए आदित्यनाथ ने कहा की जेएनयू के अन्दर जो कुछ हुआ वह वहां की शैक्षिक अराजकता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा की जब भी शिक्षा संस्कारो से कटेगी तो उसमें ऐसे उच्छखृलता और भटकाव स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

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उन्होंने कहा की ऐसा पहली बार जेएनयू में नही हो रहा है। यह वहाॅ की प्रवृत्ति बन चुकी है। भारत की जनता की खून-पसीने की कमाई से प्राप्त टैक्स के अनुदान से संचालित यह विश्वविद्यालय आज शिक्षा का कलंक बन चुका है। इसमें केवल वामंपथी छात्र ही जिम्मेदार नही बल्कि वहा पर मोटा वेतन ले रहे कुछ शिक्षक भी इन सब गतिविधियों में संलिप्त है।
आदित्यनाथ ने कहा की यह कल्पना से बाहर है कि देश के लोकतंत्र के सर्वोच्च स्तंम्भ देश की संसद पर हमले का गुनाहगार खुखांर आतंकवादी अफजल की स्मृति में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में न केवल दुर्दान्त आतंकवादी के लिए घडियाली आॅसू बहाये गये अपितु भारत को अलग करने वाले राग भारत की सम्प्रभुता पर सीधे-सीधे चुनौती दी गई। सेकुलरिजम के नाम पर वामंपथी दल, कांगेस और जेडीयू का आचरण अत्यन्त शर्मनाक है।
उन्होंने कहा की जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर राष्ट्र की सम्प्रभुता को चुनौती देने वाले तत्वों का समर्थन बेशर्मी से कर रहे है। उन्होंने कहा की 1999 में कारगिल युद्ध के तत्काल बाद एक मुशायरा जेएनयू में आयोजित था।
उन्होंने कहा पाकिस्तान के एक कलाकार के द्वारा जब भारत विरोधी प्रस्तुतीकरण की जा रही थी तो उस कार्यक्रम में मौजूद सेना के दो अधिकारियों ने इसका प्रतिकार किया। उस समय भी सेना के दोनों अधिकारियों के साथ जो व्यवहार हुआ वह इस विश्वविद्यालय में पनप रही गतिविधि पर स्पष्ट संकेत थी। चाहे गौ मांस की पार्टी की बात है अथवा महिषासुर जैसे राक्षसों की जयन्ती मनाने का। अगर प्रगतिशीलता के नाम पर कोई शैक्षिक संस्था इस प्रकार की गतिविधि करता अथवा करवाता है तो उसे आगे अनुदान देने की बजाय ऐसे संस्थानों को बन्द करना देश के हित में होगा।
उन्होंने कहा की दिल्ली पुलिस ने जो भी कार्यवाहीं जेएनयू के सन्दर्भ में की है वह सर्वथा उचित है। ऐसे राष्ट्रीय एकता और सम्प्रभुता को चुनौती देने वाले तत्वों को सख्ती से रोका जाना चाहिए।

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