गोरखपुर

संसद में योगी ने उठाया हिन्दू पलायन का मुद्दा

Adityanath-raises-Hindu-migगोरखपुर: उत्तर प्रदेश में खासतौर पर प्रदेश के पश्चिमी भाग के विभिन्न कस्बों में हिन्दुओं के हो रहे पलायन का मुद्दा आज लोकसभा में उठा। शून्यकाल में उक्त मुद्दे को उठाते हुए गोरखपुर के सांसद महन्त योगी आदित्यनाथ ने लोकसभा अध्यक्ष से कहा कि प्रदेश के अन्दर कानून व्यवस्था की स्थिति ध्वस्त हो चुकी है।
उन्होंने कहा की अराजकता, अव्यवस्था, गुण्डागर्दी इस कदर बिगड़ चुकी है कि सामान्य जन का जीना हराम हो गया है। एक वर्ग विशेष से जुड़े हुए आपराधिक तत्व एवं पेशेवर माफिया सत्ता के संरक्षण में न केवल गुंडागर्दी की हद कर दिए हैं अपितु जबरन धमकी देना, हिन्दुओं की जमीनो पर कब्जा करना, हिन्दू मां-बहनो के साथ छेड़कानी करना तथा जबरन अपहरण की घटनाएं, मार-पीट की घटनाएं लगातार सत्ता के संरक्षण में दिनो-दिन बढ़ती जा रही है।
आदित्यनाथ ने कहा की शामली जनपद के कैराना, कांधला हो अथवा अलीगढ़ का बाबरी मंडी, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, गाजियाबाद, बरेली, रामपुर, आगरा आदि जनपदों के विभिन्न कस्बों में एक जैसी स्थिति है। पेशेवर अपराधी तथा माफिया यदि एक वर्ग विशेष से जुड़े हैं तो स्थानीय प्रशासन उ.प्र. शासन के दबाव में कोई कार्यवाही नहीं करती।
उन्होंने कहा विभिन्न कस्बों में हो रहा पलायन इसी प्रशासनिक अकर्मण्यता, सुरक्षा की गारण्टी देने में असफल हुए प्रशासन और अपराधी तथा माफियाओं को शासन की तरफ से मिल रहा संरक्षण की ही परिणति है। इन आपराधिक और माफिया प्रवृत्ति के तत्वों के सम्बन्ध न केवल उ.प्र. सरकार में बैठे हुए मंत्रियों एवं जनप्रतिनिधियों से हैं साथ ही इनकी गतिविधियों के तार राष्ट्रविरोधी तत्वों से भी जुड़े हुए हैं। उ.प्र. सरकार सुरक्षा का माहौल बनाने में पूरी तरह विफल है।
सदर सांसद ने कहा की सम्पूर्ण पश्चिमी उ.प्र. की स्थिति 1980-90 के दशक के कश्मीर घाटी जैसी बन रही है जहां पर 1980 से 1990 के दशक में मारपीट, छेड़छाड़ और आपराधिक घटनाओं की अनदेखी का दुष्परिणाम रहा कि 1990 में कश्मीर घाटी से हिन्दुओं का व्यापक नरसंहार हुआ और सामूहिक पलायन के लिए हिन्दुओं को मजबूर होना पड़ा। पश्चिमी उ.प्र. के पलायन को मात्र कानून व्यवस्था की दृष्टि से न देखा जाए अपितु इसके पीछे गम्भीर अन्तर्राष्ट्रीय साजिश है। जनसांख्यिकी असन्तुलन इन क्षेत्रों में स्पष्ट देखा जा सकता है।
उन्होंने भारत सरकार से अनुरोध किया कि पश्चिमी उ.प्र. के पलायन को गम्भीरता से लें। जनसांख्यिकी असन्तुलन के कारण जो नासूर पश्चिमी उ.प्र. में फैल रहा है समय रहते इसके उपचार की आवश्यकता है। इससे पहले कि यह कैंसर बने सख्ती के साथ न केवल आपराधिक और माफिया प्रवृत्ति के तत्वों को रोकने की आवश्यकता है, साथ ही इन आपराधिक और माफिया प्रवृत्ति के तत्वों की अराष्ट्रीय तत्वों से सम्बन्धों की जांच तथा इनको मिल रहे राजनीतिक संरक्षण की जांच भी आवश्यक है।

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