गोरखपुर

जे ई और ए ईएस से निपटने को मनाएंगे जनजागरूकता सप्ताह: सी एम ओ

Gorakhpur-CMO-Ravindra-Kumaगोरखपुर: बरसात का सीजन आते ही मंडल में जे इ और ए इ एस का प्रकोप बढ़ने लगता है जिससे निपटने के लिए राज्य सरकार से लगायत केंद्र सरकार तक पिछले चार दशक से लगातार कोशिश कर रही है। किंतु नतीजा पूर्वांचल के लगभग दर्जनभर जिलो और पड़ोसी प्रांत बिहार तथा नेपाल के तराई इलाकों के हजारों नौनिहाल अकाल मौत की नींद सो गए।
इस सीजन में जब यह बीमारी अपने चरम पर होती है तभी सरकारों की नींद भी खुलती है। ऐसा नहीं है कि इस बीमारी से निपटने के लिए सरकारों के पास बजट न हो।
सोमवार को इसी क्रम में मंडल में जापानी इंसेफलाइटिस और ए्क्वायर इम्यून सिंड्रोम यानि ए इ एस दिमागी बुखार से निपटने के लिए गोरखपुर जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर रविंद्र कुमार ने एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया। जिसमें उन्होंने जन जागरूकता सप्ताह मनाने की बात कही ।
उन्होंने कहा कि हालांकि हमने इस बीमारी पर रोकथाम के लिए प्रत्येक ब्लाको में ETC यानि इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर खोल रखे हैं और हर phc पर दो बेड और सीएचसी पर छह बेड अनिवार्य कर दिया है जहां जहां इस रोग के मरीजों को देखने के लिए चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाफ की 24 घंटे अनिवार्यता कर दी गई है।
उन्होंने बताया की इसी जन जागरुकता सप्ताह के कार्यक्रम में हम प्रतिदिन प्रत्येक ब्लॉक में चौपाल लगाकर आम जन सहयोग मांगेंगे। इसके लिए पहले से ही क्षेत्रो में तैनात आशा बहुओ और एएनएम सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियो को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
जनजागरूकता सप्ताह में ही आगामी 14 जुलाई से हम जनपद के सभी स्कूलो के बच्चों के माध्यम से रैल्ली निकालेंगे। इसके अतिरिक्त इस रोग के मरीजो को लाने के लिए अब शासन से विशेष आदेश के तहत सीजन में 102 और 108 नम्बर की एम्बुलेंस सेवाएं भी ली जा सकेंगी।
उन्होंने एक विशेष प्रश्न कि बीते दो वर्षो से जब बारिस नही हो रही है तो इस रोग का प्रकोप भी कम है तो क्या यह बारिस से फैलने वाला रोग है के जवाब में कहा कि यूँ तो ये केवल बारिस में ही फैलता है किन्तु मैं इस विषय पर कुछ नही कहूँगा क्योंकि विशेषज्ञ इस बात पर शोध कर रहे है।
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