गोरखपुर

एक अनोखी मुहीम, जिसका गोरखपुर के अल्पसंख्यक वर्ग ने किया खैर मकदम

BJP-leader-inviting-muslimsगोरखपुर: एक मुहीम अल्पसंख्यको के लिए, एक हाथ में गुलाब, दुसरे हाथ में निमंत्रण पत्र, जी हां ये नजारा है, गोरखपुर के तिवारिपुर का जहाँ समाजसेवी और बीजेपी के नेता जटाशंकर तिवारी ने अल्पसंख्यको के बीच जा कर मोदी के रैली को सफल बनाने की एक अनोखी मुहीम छेडी है और लोगो को गुलाब का फुल देकर रैली में आने का निमंत्रण दिया है.
मोदी की रैली में संभाव्य भीड़ की यूँ तो कोई गिनती नही होगी। फिर भी अधिक से अधिक भीड़ लगाने के लिए बीजेपी कार्यकर्ता अब हर आम ओ खास से मिलकर रैली में आने का न्यौता दे रहे है।
इसी जनसम्पर्क कार्यक्रम के तहत गोरखपुर के तिवारीपुर इलाके में आज एक अनोखी मिशाल पेश की गई। आज तक ये माना जाता रहा है कि बीजेपी और अल्पसंख्यक वर्ग के बीच तल्खियां हमेशा ही बनी रहती है, और इन दोनों के बीच राजनीतिक कारणों से एक लम्बी खाई है, जिसे पार करना दोनों के बस में नामुनकिन माना जाता है । लेकिन इस बार ये दुरिया कम होती नजर आ रही है। कारण है, एम्स!
गोरखपुर में 22 जुलाई को एम्स और खाद कारखाना की ये दो बड़ी सौगात देने के लिए गोरखपुर में पीएम मोदी आ रहे है, इसी कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जब बीजेपी के नेता और समाज सेवी जटाशंकर त्रिपाठी अल्पसंख्यको के बीच पहुचे, तो उनका सम्मान हुआ, और जटाशंकर त्रिपाठी ने सभी अल्पसंख्यको को गुलाब का फुल देकर निमत्रण पत्र दिया, और इस रैली में आने के लिए आवाहन किया।
इस मौके पर अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों और मकबूल अहमद व् मोहम्मद परवेज अंसारी की माने तो आज वो बहुत खुश है, और वो भारी संख्या में मोदी जी की रैली में पहुच कर उनके इस कार्यक्रम को सफल बनायेगे । क्योकि मोदी जी से और बीजेपी से उनकी दुरिया रही है, इसमें कोई दो राय नहीं है । लेकिन इस बार जब मोदी विकास को लेकर कदम आगे बढा रहे है, और गोरखपुर को दो बड़े सौगात दे रहे है, तो हमारा भी फर्ज है, की उनके कदम से कदम मिलाकर आगे बढे।
जनसम्पर्क के क्रम में इसे एक अनोखी मुहीम कह सकते है, क्योकि मोदी की रैली को लेकर जिस तरह से इस मुहीम के ही बहाने कम से कम बरसो जो दुरिया अल्पसंख्यक और बीजेपी के बीच थी, वो अब कम होगी, और इन अल्पसंख्यक के लोगो ने ये साफ़ कह दिया है, कि विकास के मुद्दे पर वो मोदी के साथ है, क्योकि उन्हें राजनीती से कोई मतलब नहीं है, बल्कि विकास से मतलब है।
भले ही मुद्दा जो हो, लेकिन अल्पसंख्यक वर्ग का मोदी और बीजेपी के तरफ झुकाव आने वाले मिशन 2017 के लिए शुभ संकेत है।

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