गोरखपुर

छोटे व्यवसायियों की फीकी रही दिवाली, मिलावटखोरी के डर, प्रशासनिक चुस्ती ने किया धंधा चौपट

khoya-mandi-gorakhpur-1गोरखपुर: दीवाली का नाम लेते ही व्यापारियों की बांछे खिल जाती है। किंतु इस बार दीपावली में ऐसा कुछ नही हुआ। इसके पीछे जनजागरूकता के कारण मिलावटखोरी का भय और प्रशासन की चुस्ती दोनों ही है।
त्यौहारों के मौसम में खाद्यपदार्थों में मिलावटखोरी के डर से अबकी बार की दीपावली में डिब्बा पैक मिठाईयों की जबरदस्त डिमांड रही। एक- दूसरे को गिफ्ट देने से लेकर घर तक में इस्तेमाल करने के लिए लोगों ने पैक मिठाइयों को ही ज्यादा पसंद किया। इससे इस बार मिठाईयों का बाजार काफी हद तक सूना पड़ गया। प्रशासन की ओर से लगातार एक सप्ताह से मिलावटी सामानों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
इसे देखते हुए इस बार शहरवासियों ने डिब्बा पैक सोनपापड़ी और रसगुल्लों को अधिक पसंद किया। मिठाईयों की दुकानों पर भी रेडिमेड मिठाईयों की ही डिमांड रही।
पुलिस छापेमारी से तबाह हुआ पटाखा व्यवसाय:-
पुलिस की लगातार छापेमारी से शहर के तमाम बड़े पटाखा व्यवसायियों का माल जब्त हो गया। व्यापारियों के मुताबिक, अन्य शहरों से माल लाने की वजह से पटाखों की मार्केट में भारी उछाल आ गया। इससे सिर्फ गोरखपुर ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वाचल में पटाखों के रेट बढ़ गए। साथ ही व्यापारियों को दुकानें लगाने के लिए पटाखों की पूरी रेंज भी नहीं मिल पाई। इस वजह से इस बार पटाखों की मार्केट पूरी तरह खराब हो गया।
दीपावली के दिन भी देर रात तक सिटी के टाउनहाल, जुबिली इंटर कॉलेज, जूनियर इंस्टीटयूट आदि जगहों पर कस्टमर्स की कोई खास भीड़ नहीं रही। होलेसेल में पटाखों के रेट महंगे होने से फुटकर मार्केट में भी पटाखों के रेट काफी अधिक रहे। महंगाई की वजह से भी लोग इस बार पटाखे ज्यादा नहीं खरीद सके। पुलिस प्रशासन की कार्रवाई से अवैध पटाखों के कारोबार पर तो कोई अंकुश नहीं लगा। हां इससे इतना जरूर हुआ कि फुटकर मार्केट पूरी तरह बर्बाद हो गई। जिसका सीधा असर आमजन की जेब पर पड़ रहा है।

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