गोरखपुर

केंद्रीय टीम ने किया गन्ना संस्थान पर एम्स की प्रस्तावित भूमि का निरीक्षण

Central-team-inspecting-lanगोरखपुर: प्राइम मिनिस्टर ऑफिस (पीएमओ) से एम्स के लिए भेजी गयी चार सदस्यीय टीम केंद्रीय टीम ने आज गन्ना शोध संस्थान का निरिक्षण किया। निरीक्षण के बाद टीम ने कहा की वो अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेंगे।
गोरखपुर में एम्स निर्माण की प्रस्तावित भूमि को देखने आई चार सदस्यीय टीम में सुनील शर्मा, ज्वाइंट सेके्रटरी (पीएमएसएसवाई), राजीव कन्नौजिया, वरिष्ठ आर्टिटेक्ट, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, पी एस सैनी, अधीक्षण अभियंता, पी जी आई, चण्डीगढ़ तथा डी के शर्मा, एम एस, एम्स नई दिल्ली शामिल थे ।
Cane-research-institute,-goकेंद्रीय टीम से जब बात किया गया तो केंद्रीय टीम का कहना था कि हम अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे । उसके बाद उस पर टीम बैठेगी वह कोई फैसला लेगी। ऊंचाई के बारे में पूछने पर बीच में ही जिलाधिकारी साहब बोल पड़े कि अभी इसकी पंचायत नहीं होनी चाहिए।
हालांकि डीएम साहब को यह ज्ञात नहीं है कि पंचायत ना होने की वजह से ही गोरखपुर के नौनिहाल अकाल काल के गाल में समाते जा रहे हैं और यह प्रोजेक्ट ऑल रेडी 3 साल लेट हो गया है। अगर पहले ही जमीनों पर शुरु होने से पहले ही पंचायत हो गई होती तो शायद यह नौबत नहीं आया होता और वही इतिहास दोहराने जा रहे हैं डीएम साहब.
Proposed-land-for-AIIMS-in-कहीं एम्स के नाम पर ठगा तो नहीं जा रहा
एम्स को लेकर गोरखपुर में एक बार फिर राजनीति गर्म है। भाजपा फर्टिलाइजर से जहां बैकफुट पर आई है। वही सपा के हाथ से खुटहन की जमीन चली गई और सपा ने दूसरी जमीन के रूप में गन्ना शोध संस्थान कूड़ाघाट को केंद्र सरकार के हवाले AIIMS के लिए किया है। लेकिन देखने वाली बात यह है कि एयरपोर्ट से महज कुछ ही दूरी पर गन्ना संस्थान स्थित है।
सवाल यह है की क्या एयरफ़ोर्स NoC देगा? क्योंकि एयरफोर्स पहले ही काफी सख्त रहा है अपने एरिया में एक फ्लाई ओवर के निर्माण में वह 100 मीटर छोटा करा दिया था।जिसके कारण आज भी लोग फ्लाई ओवर का आभाव झेल रहे है। गन्ना शोध केंद्र की ही जब बिल्डिंग बन रही थी तब सेकंड फ्लोर के बाद एयर फोर्स ने उसको रोक दिया था।
Ganna-bhavan,-Gorakhpurजबकि इधर भाजपा के लोग काफी उत्साहित हैं उनका कहना है कि केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद यह जमीन मिल पाई है । वही जमीन को देखा जाए तो जहां AIIMS का मानक 200 एकड़ है। वहीं गन्ना शोध संस्थान में 112 एकड जमीन कागजों में है, बाकी जमीन प्रदेश सरकार कहती है कि हम सिकटौर के पास देंगे। खोराबार क्षेत्र में जहां पहले से ही जमीने मुकदमों में हैं ऐसे में राज्य सरकार कहा से बाकी जमीन उपलब्ध कराएगी,ये भी विचारणीय है।
यह दिगर बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम का शिलान्यास करेंगे। हो सकता है एयरफोर्स के नियमों में भी संशोधन कर दिया जाए लेकिन जो सबसे बड़ी परेशानी दिखती है वह दिखती है कि कहीं 2017 के चुनाव के चंद महीने पहले आनन-फानन में जनता को ठगने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा है जिसमें संभवत सपा और भाजपा दोनों बराबर शामिल है।
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  1. anand maurya says:

    Rules can’t be mold….. As an atc I can say that…. If possible than only they will allow…. Bcoz Wat is there requirements in approach path they only knows…… Let us….. And hope for better

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