गोरखपुर

जनविरोधी है क्लीनिक स्टेब्लिशमेंट बिल : आईएमए

IMA-press-conference-in-gorगोरखपुर: आई एम ए गोरखपुर ब्रांच ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दैनिक स्थापना और रजिस्ट्रीकरण विनिमय नियमावली 2016 को जन विरोधी अधिनियम करार दिया है। बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में आई एम ए ने कहा की यह अधिनियम जिसकी अधिसूचना 12 जुलाई को जारी कर दी गयी है, जन विरोधी है।
आई एम ए गोरखपुर ब्रांच के अध्यक्ष डॉक्टर डी के सिंह, सचिव डॉक्टर बिजेंद्र कुमार गुप्ता, उपाध्यक्ष डॉक्टर पीएम भाटिया, डॉक्टर बी एन अग्रवाल, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर आर एन सिंह, संयुक्त सचिव डॉक्टर मंगलेश , व डॉक्टर जी के भागवानी ने क्लीनिक स्टेब्लिशमेंट बिल पर प्रेस वार्ता करते हुए कहां
की इस अधिनियम से प्रदेश में अनेक अस्पताल बंद हो जाएंगे तथा चिकित्सा सेवाएं और महंगी होंगी।
उन लोगों ने कहा की भारतीय चिकित्सा संघ इस एक्ट के विरोध में आगामी 30 जुलाई को पूरे उत्तर प्रदेश में विरोध दिवस मनाएगा और जनता को इस एक्ट से होने वाले नुकसान के बारे में जन जागरण अभियान चलाकर बताएगा।
आई एम ए के पदाधिकारियों ने बताया कि यह बिल पश्चिमी देशों के मानकों के आधार पर बनाया गया है। इसके अनुसार सभी अस्पतालों में प्राप्त मान्यता प्राप्त नर्सो तथा अन्य चिकित्सा सेवा कर्मी को रखना अनिवार्य होगा। परंतु 2012 में जारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा प्रायोजित सर्वेक्षण में माना गया है कि भारत वर्ष में चिकित्सा सेवा कर्मियों की बेहद कमी है। डब्ल्यूएचओ द्वारा 2010 में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में लगभग 2400000 नर्सों की कमी है । इन सब तथ्यों के चलते हुए भी यदि एक्ट को लागू किया जाता है, तो अधिकांश अस्पताल एवं नर्सिंग होम बंद हो जाएंगे। हमारी मांग है की जब तक प्रदेश में मान्यता प्राप्त सेवा कर्मी उपलब्ध नहीं होते तब तक अस्पतालों को इससे छूट दी जाए।
आईएमए मांग करता है कि एकल क्लीनिक को इस एक्ट से बाहर रखें। एक डॉक्टर द्वारा चलाए जाने वाले यह क्लीनिक हमारे प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ की हड्डी हैं तथा 70% स्वास्थ सेवाएं इन्हीं एकल क्लीनिक द्वारा प्रदान की जाती है ।
2012 में जारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा प्रायोजित सर्वेक्षण में माना गया है कि भारत वर्ष में चिकित्सा सेवा कर्मियों की बेहद कमी है भारत में लगभग 2400000 नर्सों की कमी है यदि इस को लागू किया जाता है तो अधिकांश अस्पताल व नर्सिंग होम महंगे हो जाएंगे। आज हमारे देश में ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाएं बदतर हालत में हैं परंतु कोई भी सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए कोई भी प्रोत्साहन नहीं देती है । आज देश में अस्पताल शुरू करने के लिए लगभग दो दर्जन लाइसेंस और अनुमति प्राप्त करनी होती है यह सभी लाइसेंस और यह एक दृश्य देश में इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा देगा ।
उन्होंने मांग किया की अस्पताल शुरू करने के लिए इन सभी लाइसेंसों को एकल खिड़की से प्रदान किया जाए। आईएमए ने मांग किया कि मुख्यमंत्री द्वारा गठित रिव्यू कमेटी की जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक यह बिल स्थगित रखा जाए।

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