गोरखपुर

गोरखपुर की हार सांप्रदायिक शक्तियों, विकास के नाम पर ठगने वालों की हार है: विनय शंकर

 गोरखपुर की हार सांप्रदायिक शक्तियों, विकास के नाम पर ठगने वालों की हार है: विनय शंकर

गोरखपुर: 30 साल के बाद गोरखपुर लोक सभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की करारी हार पर बोलते हुए चिल्लूपार से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक विनय शंकर तिवारी ने कहा है कि यह सांप्रदायिक शक्तियों, विकास के नाम पर ठगने वालों और गरीब मजलूमों को धोखा देने वालों की हार है।

Gorakhpur Final Report से बात करते हुए श्री तिवारी ने कहा कि सपा-बसपा का यह गठबंधन आने वाले वक़्त में और मजबूत होकर निखरेगा और देश को बाटने वाली शक्तियों को आगे भी करारी शिकस्त देगा।

यह पूछने पर कि भाजपा प्रत्याशी उपेंद्र शुक्ल और केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ल से व्यक्तिगत सम्बन्ध होने के बाद भी हाता परिवार के लिए इस चुनाव में सपा का समर्थन करना कितना मुश्किल रहा पर श्री तिवारी ने कहा कि जब बात दलीय संबंधों की हो तो व्यक्तिगत सम्बन्ध नहीं देखे जाते। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनलोगों ने पार्टी द्वारा समर्थित प्रत्याशी को जिताने के लिए दिन रात एक कर दिया था और आज उसका नतीजा सबके सामने है।

उन्होंने कहा कि बसपा का हर कार्यकर्ता घर-घर में पहुंच चुका था। भाजपा इस चुनाव को केवल और केवल प्रशासन धांधली के माध्यम से ही जीत सकती थी। भाजपा ने इसके लिए कोशिश भी की लेकिन कामयाब नहीं हो पायी और यही कारण है कि उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा।

हालाकिं श्री तिवारी ने सपा-बसपा के गठबंधन के भविष्य पर बोलने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में क्या होगा क्या नहीं उसका फैसला
पार्टी की मुखिया बहन मायावती को करना है और उनका जो भी फैसला होगा वो पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए शिरोधार्य होगा।

श्री तिवारी ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अभी तक कुछ भी ऐसा नहीं किया जिसको वो गिना सके। उन्होंने कहा कि सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के गढ़ में ही भारतीय जनता पार्टी की हार इस बात को दर्शाती है कि लोग सत्तधारी दल से कितने नाराज हैं।

गौरतलब है कि 2017 में हुए विधान सभा चुनाव में गोरखपुर की 9 में से 8 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी तो वहीँ चिल्लूपार से बसपा ने जीत दर्ज की थी। चिल्लूपार से भाजपा के प्रत्याशी को जिताने के लिए तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ ने अपनी तरफ से कोई भी कसर नहीं छोड़ी थी। चुनाव में भाजपा प्रत्याशी राजेश तिवारी एक नजदीकी कड़े में विनय शंकर तिवारी से चुनाव हार गए थे।

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