गोरखपुर

गन्ने के साथ प्याज की खेती से नहीं होगा पिहका रोग

महेन्द्र तिवारी
गोरखपुर: जनपद के पिपराईच क्षेत्र के लेहनी गांव में गन्ना किसान प्रशिक्षण गोष्ठी सम्पन्न हुआ। इसमें गन्ने के मुख्य प्रजातियों के गुण दोष, गन्ना फसलों की सुरक्षा, सह फसली खेती, ट्रेच विधि से गन्ने की वैज्ञानिक विधि से बुआई, खाद बीज का समुचित प्रयोग, खर पतवार नियंत्रण आदि की जानकारी दी गयी।

गन्ना किसान प्रशिक्षण संस्थान तथा पिपराईच चीनी मिल के तत्वावधान में शुक्रवार को आयोजित गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए गन्ना संस्थान के सहायक निदेशक ओ पी गुप्ता ने कहा कि गन्ने की वैज्ञानिक खेती करके प्रति हेक्टेयर 800 कुन्तल पैदावार के साथ किसान अपनी आय स्वयं दोगुनी कर सकता है। इसके लिए नयी ट्रेंच विधि से 4-4 फिट की दूरी पर बनी नाली में गन्ना बोयें। बीच की जमीन में खर पतवार नियंत्रण के लिए सह फसली खेती जैसे आलू, प्याज, लहसुन, टमाटर, तोरी, गोभी आदि की खेती कर दोहरा लाभ कमा सकते हैं।

कृषि वैज्ञानिक बच्चा राव ने बताया की गन्ने के बीच प्याज बोने से प्याज में पाया जाने वाला कीट नाशक तत्व से गन्ने में पिहका रोग नहीं होगा। साथ प्रति एकड़ लगभग सौ कुन्तल प्याज पैदा कर किसान दोहरा लाभ ले सकता है। गर्मी के मौसम में प्याज की बार बार सिंचाई करने से गन्ने के पैदावार में भी 40% की वृद्धि होगी।

कृषि विशेषज्ञ वाई पी भारती ने बताया कि वैज्ञानिक खोज से अब आलू बोने के लिए प्रति एकड़ 60 -70 कुन्तल बीज की जरुरत नहीं है। अब 60 ग्राम आलू के बीज का बेहन डालकर धान की तरह रोपाई कर अधिक पैदावार लिया जा सकता है। जो गन्ने के खेत मे रोपाई के लिए बहुत उपयोगी है।

कृषि विशेषज्ञ सीताराम भारतद्वाज ने खाद, बीज तथा दवा के समुचित प्रयोग का गुण बताया। चीनी मिल पिपराईच के मुख्य प्रवन्धक बी एस बघेल तथा केन यूनियन के अध्यक्ष सत्येन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि गन्ना बुआई ,सहित कई कृषि यंत्र, दवा, बीज पर 50% तक का छूट मिल रहा है। किसान को अधिक से अधिक गन्ना बोकर धान गेहू से दूना लाभ तथा छूट का भी फायदा उठाना चाहिए।

इस अवसर क्षेत्र के प्रगतिशील किसान सीताराम सिंह, राम केवल सिंह, फूलबदन, राम अवध गुप्ता, कमरूद्दीन, लालधनी, सुदर्शन, हरिश्चन्द्र, राम मूरत सहित दर्जनों किसान मौजूद थे।

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