गोरखपुर

मिशाल बनी डायल 100 की महिला पॉयलट रेखा

dial-100-pilot-rekhaगोरखपुर: उम्‍मीदों को पंख लगे, तो हौसले खुद ब खुद उड़ान भरने लगते हैं। सपनों को हकीकत में बदलने का ख्‍वाब संजोने वाले अक्‍सर उसे पूरा कर समाज के लिए मिसाल बन जाते हैं। रेखा भी ऐसे ही लोगों में से हैं, जो डायल 100 की स्‍टेयरिंग संभाल आज महिलाओं के लिए मिसाल बन गई हैं।
डायल 100 की न्यू ब्लैक इनोवा की स्टेयरींग थामे जब वो सडकों पर फर्राटा भरती है तो उन्हें देखने के लिए लोग ठहर जाते है। बात हो रही है डायल 100 की पहली महिला पॉयलट रेखा की ,जो गोरखपुर शहर के कैंट इलाके में चलने वाली डायल 100 की पुलिस रिस्पॉन्स वैन को इन दिनों गोरखपुर से सडको पर डायल 100 की गाडी सरपट दौड़ाती देखी जा सकती हैं। रेखा गोरखपुर सहित पुरे पूर्वांचल के लिए नजीर बनी गई है।
dial-100-pilot-rekha-1बता दें कि गोरखपुर के मेडिकल कालेज रोड पर अपने माता-पिता और दो बच्‍चों के साथ रहने वाली रेखा मिश्रा वर्ष 1999 में पुलिस विभाग में होमगार्ड के पद पर भर्ती हुई थीं। रेखा की शादी देवरिया जिले में हुई थी। शादी के बाद उन्‍हें दो बेटे भी हैं। ससुराल और पति से प्‍यार की जगह जब तिरस्‍कार मिला और बेटों के पालन-पोषण में परेशानी आने लगी तो वह अपने माता-पिता के पास गोरखपुर आ गईं।
उसके बाद से वह पुलिस विभाग में होमगार्ड के पद पर कार्य कर रही हैं। रेखा के मन में कुछ अलग कर समाज के सामने नजीर पेश करने की ललक तो थी, लेकिन उन्‍हें अवसर नहीं मिल रहा था। ऊपर से दो बच्‍चों की परवरिश की जिम्मेदारी के कारण वह कुछ अलग करने की नहीं सोच पा रही थी। लेकिन एक दिन उन्‍हें पता चला कि डायल-100 के लिए टेस्‍ट चल रहा है, तो उन्‍होंने भी अप्‍लाई कर दिया।
dial-100-pilot-rekha-2रेखा बताती हैं कि घर में कार होने के कारण वह पिछले 12 साल से कार चला रही हैं। इसके अलावा उन्‍हें बस और ट्रक चलाना भी आता है । बस इसी बात से उनके भीतर हिम्‍मत आई और उनका टेस्‍ट और लोगों की अपेक्षा काफी बेहतर रहा। उन्‍होंने बहुत ही आसानी से टेस्‍ट में इनोवा कार की स्‍टेयरिंग संभाली और सड़क पर फर्राटा भरने लगी। फिर क्‍या था ,वह दिन भी आया जब उनके पास यह खुशखबरी मिली कि डायल-100 के लिए उनका सेलेक्‍शन हो गया है।
वह कहती हैं, कि दिन हो या रात किसी भी समय उनकी ड्यूटी लगाई जाए उन्‍हें कोई परेशानी नहीं है। उन्‍हें उम्‍मीद है कि उन्‍हें देखकर और भी महिलाएं सीख लेंगी।
डायल-100 के प्रभारी वीर सेन सिंह बताते हैं कि जब यह ऑफर आया, तो रेखा ने भी इसमें अप्‍लाई करने की इच्‍छा जाहिर की। पहले तो महिला होने के नाते थोड़ा संकोच हुआ, लेकिन इनका हौसला देखकर टेस्‍ट में भेजा गया और उनका परफारमेंस देखने के बाद सेलेक्‍शन हो गया। उन्‍होंने बताया कि वह बहुत ही अच्‍छे से डायल-100 गाड़ी चलाती हैं। जिसे देखकर किसी को भी हैरत हो सकती हैं।
लेकिन यह विभिन्‍न क्षेत्रों में कुछ अलग करने की सोच रखने वाली महिलाओं के लिए नजीर हैं।
रेखा के हौसले को देखकर यह साफ है कि अगर मन में कुछ अलग करने की ठान लिया जाए, तो असंभव काम को भी संभव बनाया जा सकता है। यह रेखा के इसी हौसले का नतीजा है कि वह गोरखपुर जोन की डायल-100 की अकेली महिला ड्राइवर हैं।

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