गोरखपुर

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने मेडिकल कॉलेज में किया सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल का शिलान्यास

inaugurationगोरखपुर: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों को आज एक बड़ी सौगात दी है। उन्होंने 150 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 8 ब्लॉक के सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल का शिलान्यास गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में किया। माना जा रहा है कि यह हॉस्पिटल जब 18 महीने बाद तैयार होगा तो गोरखपुर सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं में काफी लाभ होगा और उनको कुछ खास बीमारियों के इलाज के लिए दिल्ली या मुंबई का रुख नहीं करना पड़ेगा।
केन्‍द्र सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गोरखपुर में एम्‍स के बाद एक और तोहफा दिया है। जिसमें गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में आठ सुपर स्‍पेशलिटी विभाग बनाये जायेंगे। इसमें न्‍यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, गैस्‍ट्रो सर्जरी, कार्डियोथोरेसिक वैस्‍कुलर सर्जरी, कार्डियोलॉजी, न्‍यूरोलॉजी, गैस्‍ट्रोइंट्रोलॉजी और नेफ्रोलॉजी हैं।
केन्द्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा, स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और यूपी के चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री राधेश्याम सिंह ने इस अस्पताल की आधारशिला रखी। इस प्रोजेक्ट में 120 करोड़ रूपये केंद्र सरकार दे रही है और 30 करोड़ राज्य सरकार द्वारा दिया जा रहा है।
दरअसल आठों सुपर स्पेशियलिटी विभागों को मिला कर 200 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाया जाएगा। हर विभाग में 25-25 बेड के वार्ड होंगे। अभी आठ विभागों से सम्बन्धित रोगियों को विशेषज्ञ उपचार और आपरेशन के लिए लखनऊ, दिल्ली या कहीं और जाना पड़ता है। बीआरडी में आठ सुपर स्पेशियलिटी विभाग खुलने का तीन साल से इंतजार किया जा रहा था जो अब पूरा हुआ है।
प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत केन्द्र सरकार ने वर्ष 2013 में इसकी मंजूरी दी थी। इस कार्यक्रम में बोलते हुए स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि इस अस्पताल को बनाने का काम काफी तेजी से होगा और इसके खुले से पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित पश्चिमी विहार हो नेपाल के 5 करोड से अधिक लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। जेपी नड्डा ने कहा कि जापानी इंसेफलाइटिस या एइएस को लेकर भारत सरकार पूरी तरह से संवेदनशील है और इसे रोकने के लिए वह हमेशा प्रयास कर रही है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा की केंद्र सरकार ने इस बीमारी को नोटिफाइड डिजीज के रूप में चिन्हित किया है और प्रयास कर रही है सुविधाओं को और बढ़ाया जाए और फंड की कमी नहीं होने दी जाए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा केंद्र सरकार से राज्य सरकार ने जितना भी पैसा मांगा है वह सभी पैसा केंद्र सरकार ने हमेशा दिया है और हम किसी भी काम का शिलान्यास कोरे वादों से नहीं बल्कि उसके लिए पूरा रुपया लेकर आते हैं तभी शिलान्यास करते हैं।
भारत सरकार के इस कार्यक्रम में बोलते हुए राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार भारत सरकार के साथ मिलकर स्वास्थ्य सुविधाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रयास कर रही है यह दोनों सरकारों के आपसी सहयोग का ही नतीजा है कि उत्तर प्रदेश में 21 नए मेडिकल कॉलेज खुलने जा रहे हैं। राधेश्याम सिंह ने कहा कि आज यूपी के फैज़ाबाद और बस्ती में मेडिकल कालेज का शिलान्यास किया जा रहा है और इसके बाद फिरोजाबाद और बहराइच में भी मेडिकल कालेज जल्द ही शुरू किया जायेगा।
इस कार्यक्रम में अध्यक्षता कर रहे गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले 38 सालों में पूर्वी उत्तर प्रदेश के 50 हजार से अधिक मासूम इंसेफेलाइटिस के शिकार होकर अपनी जान गंवा चुके हैं। इस बीमारी से मरने वाले 90 प्रतिशत दलित और पिछड़े लोग हैं जो कई राजनितिक दलों का बड़ा वोट बैंक है पर यह बीमारी आजतक राजनितिक मुद्दा नहीं बन सकी है। यूपी के अस्पतालों में तमाम संसाधनों के होने के बाद भी मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता है और यही कारण है किसी सीएचसी और पीएचसी पर इलाज नहीं मिलने से मरीज गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में आते हैं जिसके कारण मेडिकल कालेज पर बोझ बढ़ता है।
योगी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मांग की कि केंद्र सरकार केवल यूपी में प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों पर दिए जा रहे बजट को भी बीआरडी मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े कॉलेजों में ही दें क्योंकि प्राथमिक केंद्र पर स्वास्थ्य सुविधाएं ना के बराबर मिल रही है और वहां मुर्गी पालन हो रहा है। वही इस कार्यक्रम में आई केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने केंद्र और राज्य के आपसी समन्वय पर जोर देते हुए कहा दोनों सरकारें अगर मिलकर काम करें तो ही समाज के लिए और इस देश के लोगों के लिए अच्छा होगा और जिस तरह से यूपी में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही है इस परंपरा को दूसरे प्रदेश की सरकारों को भी आगे बढ़ाना होगा।
गोरखपुर सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में स्वास्थ्य एक बड़ी समस्या है और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के नहीं मिलने के कारण यहां के लोगों को दिल्ली या फिर दूसरे महानगरों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में केंद्र और प्रदेश सरकार के आपसी सहयोग से बनने वाले इन अस्पतालों के शुरू होने के बाद निश्चित रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का बेहतर लाभ होगा और जापानी इंसेफ्लाइटिस से हर साल मर रहे सैकड़ों मरीजों की तादाद में भी काफी कमी आएगी।

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