गोरखपुर

धूमधाम से मनाया गया हरतालिका तीज का पर्व

गोरखपुर: अपने सहाग की लंबी आयु के लिए आज महिलाओं ने हरतालिका तीज का पर्व बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया। यूं तो पति के दीर्घायु होने और उनकी रक्षा के लिए धर्मशास्त्रों में कई व्रत-त्योहारों का जिक्र है, लेकिन इनमें सबसे अधिक महत्ता उत्तर भारत में धूम-धाम से मनाया जाने वाला पावन व्रत ‘हरितालिका तीज’ की है। आज के दिन महिलाएं अपने पतियों के लिए निर्जल व्रत रखती हैं।

सुहागिनों ने आज दिन भर व्रत रखने के बाद मंदिरों में शिव-पार्वती की पूजा की। इस अवसर पर सभी व्रती महिलाएं हरितालिका तीज कथा सुनती हैं। तीज का व्रत 24 घंटे निर्जल रहा जाता है। महिलाएं गुरुवार की सुबह पानी पीकर अपने व्रत को तोड़ेंगी। गर्भवती, बीमार अथवा बुजुर्ग महिलाएं जो निर्जल व्रत नहीं रह पाती हैं वो फल आदि का सेवन कर इस पर्व को मनाती हैं।

तीज पर्व भाद्रपद (भादो) महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। हर साल इस पर्व को लेकर बाजारों में चहल-पहल खूब बढ़ जाती है। तीज में महिलाओं के श्रृंगार का खास महत्व होता है। पर्व नजदीक आते ही महिलाएं नई साड़ी, मेहंदी और सोलह श्रृंगार की सामग्री जुटाने लगती हैं। पूर्वांचल में गोरखपुर सहित आस पास के सभी शहरों, कस्बों, गांवों और शहरों के बाजारों में पिछले एक सप्ताह से तीज के कारण खूब चहल-पहल रही। .

धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, इस पर्व की परंपरा त्रेतायुग से है। इस पर्व के दिन जो सुहागिन स्त्री अपने अखंड सौभाग्य और पति और पुत्र के कल्याण के लिए निर्जला व्रत रखती है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। धार्मिक मान्यता है कि पार्वती की तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने तीज के ही दिन पार्वती को अपनी पत्नी स्वीकार किया था। इस कारण सुहागन स्त्रियों के साथ-साथ कई क्षेत्रों में कुंवारी लड़कियां भी यह पर्व करती हैं।

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