गोरखपुर

महानगर मे जल जमाव बना लोगो के लिए मुसीबत, कौन है जिम्मेदार?

water-logging-in-gorakhpurगोरखपुर: महानगर में पहली बारिश ने ही नगर निगम की पोल खोल कर रख दी है। चाहे चौक चौराहें हो दुकानें या फिर जिलाधिकारी कार्यालय चारो तरफ जल ही जल है। जलजमाव से जहा आम आदमी परेसान है वही अधिकारी अलग ही राग अलाप रहे है।
गोरखपुर के जिलाधिकारी कार्यालय और जटेपुर की कई दुकानों, व्यव्सायिक प्रतिष्ठानो वाली जगहों पर पूरी तरह से जलभराव हो गया है। ये हाल तब है जब सम्बंधित विभाग द्वारा लाखो रूपये के सफाई कर्मचारी और मशीने रखकर नालों नालियो की सफाई करवाने का दम भरा जाता है। लेकिन मशीनों से किस कदर नाले नाली साफ़ हुए कि अभी भी नाले सिलतग्रस्त है और हल्की बरसात पुरे महानगर के सड़को पर पानी से लबालब भर जा रहा है।
water-logging-in-gorakhpur-जहां स्थानीय निवासी तो दुर्गत झेल ही रहे है। साथ ही जिला मुख्यालय पर आने वाले, कोर्ट कचहरी जाने वाले, स्कुल कालेजो के विद्यार्थी सभी इस मुसीबत से दो चार हो रहे है।
अभी बरसात की शुरुवात ही बस हुई है, तभी पुरे शहर में जलजमाव हुई है। जल जमाव से पुरे महानगर में सड़के पानी से डूबी है। राहगीरों का कहना है कि जब कचहरी और डीएम कार्यालय पर इस तरह की स्थिति होगी तो अन्य जगहो पर क्या स्थिति होगी इसका अंदाज लगाया जा सकता हैै।
जलजमाव से पूरा शहर अस्त व्यस्त हो गया है।
ऐसे में नगर निगम की महापौर डॉ सत्या पाण्डेय का कहना है कि प्लाटिक के इस्तेमाल के चलते नालिया चोक होती है और जलजमाव की स्थिति बनती है। उन्होंने डीएम कार्यालय पर जलजमाव के बाबत कहा कि वो जगह इनके कार्यक्षेत्र में नहीं है। फिर भी जलजमाव को निपटाया जायेगा।
जब भी बरसात का मौसम आता है इस तरह की समस्या आती है। ऐसे में केवल प्लास्टिक उपयोग और आम लोगों में जागरूकता की कमी ही जल जमाव की मुख्य वजह नही कही जा सकती है। जरुरत है गोरखपुर महानगर में बेहतर सीवर सिस्टम बनाकर इस समस्या से निजात पाने की।

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