गोरखपुर

जिला अस्पताल में परिजनों ने मरीज का किया झाड़-फुक से इलाज़, बगैर डिस्चार्ज कराए मरीज को ले कर हुए रफूचक्कर


गोरखपुर: अंधविश्वास किस कदर अभी भी लोगों पर हावी है इसकी जीती जागती मिसाल आज जिला अस्पताल मे देखने को मिली है। आप भी देखिए।
पूरे जिले में जहां लोग बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए जिला चिकित्सालय पहुंचतें हैं वहीँ इसी चिकित्सालय में एक मरीज़ का इलाज दवा के बजाय झाड़-फूक से किया जा रहा है। जिसका तमाशा देखने वालों की भीड़ जमा हो गयी।
Patient-attendenat-outside-बता दें कि चिलुवाताल थाना क्षेत्र के अहिरौली गांव का रहने वाला रामभरोसे कुछ दिन पहले रोजगार के चक्कर में बाहर मजदूरी करने गया हुआ था। जहां उसको बुखार की बीमारी हो गई। वह अपने गांव वापस लौट आया। पहले तो उसने आस पास के झोला छाप डॉक्टरों को दिखाया किन्तु बुखार उतरता न देख परिजन उसे 21 फरवरी की सुबह 11:30 बजे जिला अस्पताल की इमरजेंसी लेकर पहुंचे।
Patient-attendenatडॉक्टर ने उसे वार्ड के बेड नंबर 13 पर भर्ती किया।जहां उसका इलाज ठीक-ठाक चल रहा था।आज सुबह करीब साढ़े चार बजे जिला अस्पताल की इमरजेंसी के सामने अजीबोगरीब नजारा देखने को मिला। मरीज रामभरोसे जमीन पर पैर के बल बैठा था और एक महिला जो उसकी मां बताई जा रही है व दूसरा व्यक्ति (सोखा) सुदर्शन पुत्र मुन्नीलाल निवासी जाहिद बाबू का बंगला थाना पिपराईच झाड़ फूंक के द्वारा उसे ठीक करने का प्रयास कर रहे हैं।
बताते हैं कि रामभरोसे की मां सरस्वती देवी खुद सोखईती करती है। दोनो ही बगैर डिस्चार्ज कराए मरीज को झाड़-फूंक से ठीक कर लेने की बात कह कर रफूचक्कर हो गए।
Attendents-with-patient-in-इस दौरान किसी नर्सिंग स्टाफ की नज़र उनपर नही पड़ी जबकि स्टॉफ रूम ठीक सामने है।हद तो यह है कि इमरजेंसी गेट के ठीक सामने सोखईती का यह खेल करीब डेढ़ घण्टे तक चला लेकिन किसी जिम्मेदार ने इस तरफ ध्यान नही दिया। इस कारनामे से ठीक पन्द्रह मिनट पहले मरीज को पैरासिटामॉल (पीसीएम) का इंजेक्शन दिया गया था। मरीज़ का इलाज जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉक्टर वीके सुमन कर रहे थे।

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