गोरखपुर

सपा: पार्टी को विश्वास नहीं, उम्मीदवार को यकीन नहीं; कैसे होगी 2017 में फतह !

Samajwadi-party-meeting-in-गोरखपुर: उप्र विधान सभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है सियासत में भी काफी तब्दीलियां नजर आ रही है। ऊंट कब किस करवट बैठेगा यह कहना मुश्किल है। सबसे तेज बदलाव सत्तारुढ़ सपा में देखने को मिल रहा है।
गोरखपुर में पिपराईच विधानसभा को छोड़कर सपा ने सारे पत्ते तो जरुर खोले दिए है लेकिन अपने उम्मीदवारों पर भरोसा नहीं जमा पा रही है। इसलिए टिकट कटने की खबर गाहे बगाहे मिलती रहती है।
यानि यूं कहे कि सपा मुतमईन नहीं और उम्मदवारों को यकीं नहीं उम्मीदवारी पर। ऐसे में कैसे फतह होगी सियासत की जंग यह सोचना है सपा के खेवनहारों को।
टिकट के ऐलान के साथ शुरु हुआ टिकट बदलने का सिलसिला जो लगातार जारी है। पहले सहजनवां, गोरखपुर ग्रामीण और अब बांसगांव।
खबर है बदलाव की आशंका से कई जिलों में हलचल मची हुई है। इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर गोरखपुर में पड़ सकता है। शनिवार को गोरखपुर आये पर्यवेक्षकों ने इस तरफ इशारा कर दिया है कि कमजोर उम्मीदवार की छुट्टी हो सकती है।
उड़ती खबर है कि चौरीचौरा सीट पर मनुरोजन उम्मीदवार हो सकतें हैं। चिल्लूपार में भी पार्टी कशमकश में है। चिल्लूपार सीट पर पहलवान सिंह सपा के घोषित उम्मीदवार है लेकिन उनकी जगह एमएलसी सीपी चंद के भाई को उतारा जा सकता हैं।
गोरखपुर ग्रामीण सीट में भी फेरबदल संभव है और दिलचस्प है कि अभी तक सपा की एकमात्र विजयी सीट पिपराईच पर उम्मीदवार का ऐलान ना होना।
इसी क्रम में सपा और उम्मीदवार बदलती है तो कोई ताज्जुब नहीं होना चाहिए। बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, जौनपुर, महाराजगंज में भी कुछ सीटों पर बदलाव हो सकता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जो भी फैसला लेना है वह सपा हाईकमान यानि मुलायम, अखिलेश व शिवपाल की तिकड़ी को लेना है कि किसे टिकट मिलेगा या किसका टिकट कटेगा। बांसगांव से शारदा देवी पर भरोसा सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह ने जताया हैं।
ऐसे में उम्मीदवार को ही यकीं ही नहीं है कि चुनाव तक उनकी दावेदारी कायम रहेगी। कुछ के लिए खुशी भी है कि उनके लिए उम्मीद के दरवाजे खुले हुए है। सियासत है कुछ भी हो सकता हैं।

fb

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *