गोरखपुर

क्यों न हो लाइन लॉस, जब जिम्मेदारों की लापरवाही से सीएम के शहर में दिन में भी जलती हैं स्ट्रीट लाइटें

गोरखपुर: प्रदेश में विद्युत् आपूर्ति सही करने की बात की जा रही है, और बार बार सीएम योगी आदित्यनाथ विभागीय अफसरों को इसका निर्देश भी दे रहे है। किंतु उनके अपने ही शहर में नगर निगम की लापरवाही से रोजाना तकरीबन 60 हजार यूनिट बिजली खराब हो रही है। सीएम के शहर में 20 हजार स्ट्रीट लाइटें महानगर के लगभग सभी इलाकों में दिन में भी जलती नजर आती है।
12 घंटे में एक लाइट तीन यूनिट बिजली खपत करती है। ऐसे में 20 हजार स्ट्रीट लाइटें हर रोज खा रही 60 हजार यूनिट बिजली। करीब 30 दिन में 18 लाख यूनिट बिजली बर्बाद हो जाती है। नगर निगम अगर स्ट्रीट लाइटों को जलाने बुझाने की पर्याप्त व्यवस्था करें तो इस बर्बादी को रोका जा सकता है।
बता दें कि महानगर के छोटे-बड़े करीब 70 मुहल्लों और प्रमुख सड़कों पर लगीं स्ट्रीट लाइटों में से 20 हजार से अधिक दिन-रात जलती रहती है। 250 वाट की एक लाइट 12 घंटे में तीन यूनिट बिजली खपत करता है। ये लापरवाही तात्कालिक नही है,जिम्मेदार इसे वर्षो से करते आ रहे है। ये लाइन लॉस की जिम्मेदारी नगर निगम और विद्युत विभाग की है।जिनकी लापरवाही के कारण ऊर्जा की क्षति हो रही है।
वहीं शहर में बिजली की डिमांड में भी बढोत्तरी हो रहा है। जिसका नतीजा ओवरलोड के कारण फाल्ट और ट्रांसफार्मर जलने की घटनाएं बढ़ जाती है। महानगर के विभिन्न क्षेत्रों में लगी करीब 38 हजार स्ट्रीट लाइटों के खर्च होने वाली बिजली का बिल औसत खपत पर बनता है। विद्युत विभाग स्ट्रीट लाइटों को 12 घंटे इस्तेमाल मानकर खपत निकालता है।
अब एक औसतन नजर देखा जाये तो मोहल्ला खोखरटोला निवासी एक व्यक्ति के पास दो कमरे का मकान है। सात सदस्यों के इस परिवार में गर्मी से राहत के लिए दो पंखे, रोशनी को पांच सीएफएल और मनोरंजन के लिए टीवी का इस्तेमाल होता है। औसतन दो यूनिट बिजली रोजाना खर्च होती है। इस हिसाब से देखा जाए तो नगर निगम की स्ट्रीट लाइटों के दिन में जलने के कारण बर्बाद हो रही करीब 60 हजार यूनिट बिजली से 30 हजार घर प्रकाशवान हो सकते है।
जरूरत इस बात की है कि विद्युत और नगर निगम द्वारा संयुक्त प्रयास करके इस बर्बादी को रोकने की। इसमें आम नागरिकों की भूमिका भी अहम है। स्ट्रीट लाइट के पोल के नीचे पोल पर स्वीच लगा रहता है। जागरूक नागरिक चंद मिनटों में उसे आॅफ कर बिजली बचत में भागीदार बन सकते है।

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