गोरखपुर

यूपी सीएम फेस: तो क्या योगी के नाम पर बीजेपी में होगी बगावत !

Image-for-representation-4गोरखपुर (हरिकेश सिंह) : हाल के वर्षों में सिल्वर स्क्रीन पर बहुचर्चित फ़िल्म ‘ राजनीति’ में चरित्र अभिनेता बने नाना पाटेकर का एक सम्वाद ‘अर्जुन बनना है तो कर्ण का वध करना ही पड़ेगा’ मौजूदा दौर की भाजपा की सियासत पर सटीक बैठता है। ऐसा हम नही बल्कि प्रदेश में आसन्न विधानसभा चुनाव को देखते हुए सीएम कैंडिडेट की रेस में चल रही प्रतिक्रियाएं खुद ब खुद बयां कर रही है।
ये प्रतिक्रियाएं ही बता रही है कि चुनाव की रणभेरी बजते ही भाजपा के अंदरखाने में बगावत का भी बिगुल बजने की सम्भावनाएं है। मामला गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ से जुड़ा है और उनके नाम को लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के लगभग 3 दर्जन ज़िलों में कार्यकर्ता बगावत कर सकते है।
दरअसल, चुनाव को नजदीक देखकर इस समय बीजेपी की यूपी विंग में सबसे अधिक सिर फुटौव्वल मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर चल रही है। हर रोज एक नए नाम को आगे कर कार्यकर्ताओं की बेचैनी बढ़ा रही है। बीजेपी भी अब इससे छुटकारा पाना चाहती है। कारण राष्ट्रीय कार्यसमिति में सीएम उम्मीदवारी पर आम सहमति बनाना।
लेकिन पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से बीजेपी में समीकरण बदल रहे हैं, वह एक बगावत को चिंगारी देता दिखाई पड़ रहा है। इसी का नतीजा रहा कि योगी के कट्टर समर्थकों में से एक माने जाने वाले आजमगढ़ के रमाकांत यादव समाचार माध्यमों के आगे राजनाथ सिंह की खिलाफत पर उतर आये।
रमाकांत को पार्टी के एक बड़े गुट का समर्थन है। इसका कारण है , कुछ दिन से भाजपा के एक खेमे ने राजनाथ को मुख्यमंत्री के रूप प्रोजक्ट करने वाले मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल करने शुरू कर दिए। हालाँकि चुनाव में चर्चित और लोकप्रिय चेहरों को लेकर हुए सर्वेक्षणों में योगी आदित्यनाथ का नाम पहले पायदान पर है किन्तु इन सबके बावजूद बीजेपी नेतृत्व यह बिलकुल नहीं चाहता कि उन्हें मुख्य मंत्रित्व के लिए आगे लाया जाये।
ऐसे में दिल्ली में बैठे नेतृत्व के लोग सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे वाली युक्ति पर काम कर रहे है। हालाँकि पूर्व भाजपा अध्यक्ष व वर्तमान गृह मंत्री राजनाथ अब प्रदेश की राजनीति में वापस नहीं आना चाहते, लेकिन दिल्ली में बैठ एक खेमा उन्हें एक तीर से दो निशाना साधने के उद्देश्य से प्रदेश में भेजना चाहता है।
जिसमे पहला ये कि वो ज्योही उत्तर प्रदेश की राजनीती में सक्रीय होंगे तो यहीं के झंझावातों में फंस कर रह जायेंगे और दिल्ली में उनके विरोधी खेमे की राह आसान हो जायेगी, वही दूसरी चीज उनके मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित होते ही योगी खेमा भी उनके विरोध में अपनी शक्ति का उपयोग लड़ने भिड़ने में करके स्वतः निष्प्राण हो जायेगा।
इस बात को लेकर योगी खेमे में जबरदस्त नाराजगी है और इसके साथ ही विरोध की रणनीति भी तैयार भी होने लगी है। बीजेपी के लोगो की माने तो अब हिंदुत्व के मुद्दे पर काम करने वाले सारे संगठनो को एक मंच पर लाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में अगर सीएम कैंडिडेट के रूप में राजनाथ सिंह प्रोजक्ट होते हैं तो हिंदुवादी संगठन योगी के पक्ष में लामबंद होंगे। जिससे इसका नुकसान सीधे पार्टी को होगा।
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  1. Alok mishra says:

    Ye to hona sambhav hai ye mahanubhaav suru se hi bjp ke samanantar apani parti &sangathan chlate hai aur pahale bjp ke samane prati dwandi khda karate the .ye bjp walo ko dekhna chahiye nahi to purvanchal me bjp kafi kajor ho jayegi

  2. विपिन चौधरी says:

    घर वापसी की आड़ मे हिन्दू लड़को के मुस्लिम लड़कियों से शादी करने के बाद लड़कियों का ही अपरहण (प्रूफ़ लिंक https://m.youtube.com/watch?v=FIHCYtfaULY) पोस्ट को पढ़ना विश्वास ना हो तो खुद चाहो तो गूगल बाबा की मदद से खुद भी पता कर सकते हो सच्चाई क्या है इनकी ! क्या आपको पता है मुलायम सिंह के छोटे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी का पूरा नाम क्या है ? अर्पणा बिष्ट और योगी आदित्यनाथ के योगी का भगवा

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