गोरखपुर

आरटीआई से दिखायेंगे कहां जाता है सांसद निधि का पांच करोड़: विजय बहादुर यादव

Vijay-Bahadur-yadavगोरखपुर: बीजपी से निलंबित विधायक और सपा से गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा के प्रत्याशी विजय बहादुर ने कहा है कि सांसद निधि का 5 करोड़ रुपया कहाँ जाता है, आरटीआई के माध्यम से हम आइना दिखा देंगे।
विधायक विजय बहादुर ने पत्रकारों से वार्ता के दौरान कहा कि 9 साल से हम विधायक हैं। 9 साल में हमने दो सरकारें देखीं। बसपा की सरकार और सपा की सरकार। 5 साल जब हम सदन में थे तो बसपा के साथियों से कहा करते थे कि माननीय मुख्यमंत्री जी से हमको मिलवा दीजिए। हम भी क्षेत्र के विकास के लिए कुछ ले जाना चाहते हैं। उनके अंदर वेदना की पीड़ा थी और पीड़ा झलकती थी कि बसपा में और विधायक खुद को असहाय महसूस कर रहे थे।
उन्होंने कहा की जब पत्थर की मूर्तियां लगी और पार्क बने तो देश का कोई विकास नहीं हुआ। हम समाजवादी पार्टी के विधायक नहीं थे लेकिन उसके बावजूद मुलायम सिंह यादव शिवपाल यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कभी इस चीज का एहसास नहीं होने दिया। हमारा शहर दो हिस्सों में बटा हुआ था सूरजकुंड ओवरब्रिज जब कोई ऐसा मरीज जो चाहता था, कि हम शहर में आकर दवा करा ले। वह घंटों जाम में फंसा रहता था और उसका दम घुटने लगता था।
विधायक ने कहा की कभी-कभी जनप्रतिनिधि होने के बावजूद मुझे भी शहर में आने के लिए घंटों जाम में फस कर इंतजार करना पड़ता था। नन्हे मुन्ने बच्चे जाम में फस कर स्कूल नहीं जा पाते थे। दुर्गत देखते थे, तो अपने आप को असहाय महसूस करते थे, लेकिन हम सरकार का हिस्सा नहीं थे, उसके बावजूद भी जब हमने अपनी व्यथा को शिवपाल यादव मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से सुनाया तो उनका कलेजा इतना बड़ा है कि उन्होंने पुल के लिए 46 करोड़ रुपया दिया ही साथ एक इतिहास बना रेलवे की भूमि को खरीद करके पुल उतारा गया और एक मकान और एक दुकान भी क्षतिग्रस्त नहीं हुआ। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री आकर इस पुल का उद्घाटन करेंगे।
उनका कहना था की एम्स के मामले में मुख्यमंत्री ने अच्छी पहल की जो इतिहास लिखा जा सकता है केंद्र सरकार से जैसे ही सूचना आई, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एम्स के लिए जमीन और फॉरलेन सड़क के लिए पैसा स्वीकृत कर दिया। लेकिन कुछ कल्याण सरकारी था तो आज हमने एक विधायक का बयान भी सुना जिस ने बताया कि उस जमीन पर मुकदमा समाप्त हो गया था लेकिन आखिर वह कौन सा तत्व जमीन पर फिर से मुकदमा कर दिया यह सभी लोग जानते हैं।
उन्होंने कहा की जमीन पर मुकदमे हुआ करते है लेकिन जब मुकदमा समाप्त हो गया था और जमीन साफ हो गई थी तो आखिर कौन रोड़ा बन रहा है। उन्होंने कहा कि यहां के सांसद अपने निजी नर्सिंग कॉलेज के स्वार्थ में एम्स नहीं बनने देना चाहते हैं। तत्कालीन डीएम रंजन कुमार ने धुरियापार महावीर छपरा और खुटहन की जमीन का प्रस्ताव भेजा जिसमें खुटहन की जमीन को केंद्र सरकार नए मानक के अनुरूप पाया और कहा कि हम को सड़क दे दिजीये और बिजली दे दीजिए हम आपको एम्स दे देंगे। जब केंद्रीय टीम ने मानक पर खराब आया और फोरलेन और बिजली देने की मांग की गई उसके बाद जमीन पर पुनः मुकदमा करा दिया गया। जमीन पर मुकदमा किसके इशारे पर हुआ यह सभी लोग जानते हैं।
विजय बहादुर ने कहा कि पिछले तीन दशक में फर्टिलाइजर सहित कई अन्य फैक्ट्रियां बंद हो गई। एम्स पर ग्रहण लगा दिया, अपने निजी मेडिकल कालेज के लिए। लख़नऊ में था तो पढ़ा कि मेरे चित्र पर कालिख पोतने की बात कर रहे थे। जो समाज में, पूरी दुनिया में, पुरे विश्व में कालिख पोत रहा हो और हिन्दू-मुस्लिम जात-पात पर लड़ाता हो, वो अगर विजय बहादुर पर कालिख पुतने के बाद सुधर जाये तो हमें कोई गुरेज नहीं है। ऐसे लोग सुधर जाय, हमारे चेहरे पर कालिख पुतने से उनका चेहरा साफ़ हो जाता है, तो हमें कोई गुरेज नहीं है। लेकिन यहां के लोग बता देंगे क्या हिंदू मुस्लिम पर राजनीति नहीं चलेगी। काली पूछने वालों से मैं कहना चाहता हूं यदि विजयबहादुर के चेहरे पर कालिख पोतने से उनका चेहरा साफ हो जाता है तो चेहरा साफ होने से काम नहीं चलेगा । काम करके जनता को दिखाना पड़ेगा ,क्योंकि अब यहां हिंदू-मुस्लिम की राजनीति नहीं चलेगी।
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