गोरखपुर

गोरखपुर ग्रामीण से विपिन सिंह को जीता योगी ने कायम रखी अपनी प्रतिष्ठा, बागी को सिखाया सबक

गोरखपुर: गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विपिन सिंह ने बेहद नजदीकी मुकाबले में सपा के विजय बहादुर को हरा दिया। निषाद पार्टी ने वोटों में जमकर सेंधमारी की। इस सीट पर सदर सांसद योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थीं।
बता दें कि पिछले 2012 के चुनाव में बीजेपी के बैनर पर जित दर्ज करने वाले विजय बहादुर यादव ने जब बागी रुख दिखाकर भाजपा छोड़ सपा का दामन थामा तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर योगी आदित्यनाथ पर खूब शब्दबाण चलायें थे। वहीं बसपा छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले रामभुआल निषाद को जब पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो उसका इल्जाम उन्होंने योगी आदित्यनाथ पर मढ़ दिया था। रामभुआल समर्थकों ने योगी का पुतला तक फूंक दिया था। यहां रोचक मुकाबले के आसार थे।
मुस्लिम बाहुल्य इस क्षेत्र पर सपा, बसपा और निषाद पार्टी की निगाह मुस्लिम वोटरों पर थीं। लोग उम्मीद कर रहे थे कि मुस्लिम वोट सपा-बसपा में बट जायेंगे लेकिन ऐसा कम हुआ। यहां करीब एक लाख से ज्यादा मुस्लिम वोटर थे। वहीं निषाद वोटर 60 हजार से अधिक थे। यादवों की तादाद भी 20 हजार से ज्यादा थीं। ऐसे में यहां जाति समीकरण अहम माने जा रहे थे। गोरखपुर ग्रामीण सीट पर मुसलमानों का वोट अहम फैसला करता है। ये अलग बात है कि इस सीट से कोई मुस्लिम उम्मीदवार नहीं हो पाता इसकी अहम वजह वोट की तकसीम रहती है।
इस क्षेत्र से भाजपा बागी विधायक को हरा कर सबक भी सिखाना चाहती थीं। वहीं सीट सुरक्षित रखने का दबाव भी था। विजय बहादुर दो बार भाजपा टिकट से विधायक बन चुके थे। इस बार फेल हो गये। बसपा ने राजेश पांडे को खड़ा किया था। वहीं पीस पार्टी व निषाद दल गठबंधन ने डा. संजय निषाद को खड़ा किया था। इस बार यहां से 23 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया था। लेकिन 11 उम्मीदवारों का पर्चा खारिज हो गया जो चर्चा में भी रहा। कुल 12 उम्मीदवार मैदान में थे जिसमें 2 निर्दल शामिल हैं।
पिछले विधान सभा चुनाव की बात करें तो यहां कुल 20 उम्मीदवार थे। जिसमें 4 मुस्लिम थे। 2 निषाद थे। निषाद व मुस्लिम वोटों के बट जाने की वजह से भाजपा को जीत हासिल करने में दिक्कत नहीं हुई थीं। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो भाजपा से विजय बहादुर यादव चुनाव जीते थे। वहीं सपा से कमलेश पासवान दूसरी स्थान पर रहे थे।

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