अक्षय तृतीया आज, इन नियमों का करें पालन तो होगी उन्नति

गोरखपुर: हिन्दू धर्म मे विशेष महत्व रखने वाला अक्षय तृतीया आज 29 अप्रैल को है।आज के दिन सूर्योदय 5:32 बजे हुआ और तृतीया तिथि सुबह 10:42 बजे तक थी। सूर्योदय में तृतीया तिथि मिलने के कारण इसी दिन अक्षय तृतीया मनाई जाती है।

ज्योतिषाचार्य पं. शरदचंद्र मिश्र के अनुसार 29 अप्रैल को रोहिणी नक्षत्र दिन में 2:46 बजे तक तथा शोभन योग दिन में 12:03 बजे तक है। शनिवार को प्रात:काल रोहिणी नक्षत्र होने से श्रीवत्स नाम का महाशुभ योग बन रहा है। इस योग में शुभ कार्य करने से परिवार में संपन्नता व संतान की विद्या में वृद्धि होती है।

ज्योतिषाचार्य मिश्र के मुताबिक हिन्दू संस्कृति में इस पर्व का बड़ा महत्व है। पुराणों के अनुसार सतयुग व त्रेता युग का आरंभ इसी तिथि में हुआ था। अक्षय फल प्रदान करने वाली इस वैशाख शुक्ल तृतीया को यदि मांगलिक या शुभ कार्यो का मुहूर्त न भी मिले, शुक्र व गुरु अस्त हों तो भी विवाह किया जा सकता है। इसके अलावा गृह प्रवेश, वधू प्रवेश, गृहारंभ या कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है।इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों ग्रह अपने परम उच्च अवस्था पर रहते हैं।

सूर्य मेष राशि और चंद्रमा वृष राशि पर रहता है। ये दोनों सूर्य और चंद्रमा की परमोच्च राशिया हैं। कोई भी शुभ योग क्यों न हो, वे पूर्ण रूप से तब तक फलीभूत नहीं होते जब तक सूर्य और चंद्रमा में बल न हो। इस दिन किए जाने वाले जप, तप, दान सूर्य व चंद्रमा को बली करते हैं। ऐसा करने वाले व्यक्ति को सूर्य व चंद्रमा का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी दिन भगवान सूर्य ने पाडवों को अक्षय पात्र प्रदान किया था। भगवान कृष्ण और सुदामा का पुन: मिलाप हुआ था। इसी दिन भगवान राम व परशुराम का जन्म हुआ।

अक्षय तृतीया व्रत किस तरह हो
पं. शरदचंद्र मिश्र, ज्योतिषाचार्य के मुताबिक इस दिन भगवान विष्णु का षोडशोपचार पूजन करें। उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं, सुगंधित पुष्पमाला पहनाएं और नैवेद्य में नर-नारायण के निमित्त कोमल ककड़ी और चने की दाल अर्पित करें। हो सके तो उपवास या समुद्र स्नान या गंगा स्नान करें और जौ, गेहूं, चना, सत्तू, दही, चावल, ईख के रस और दूध से बने पदार्थ तथा स्वर्ण व जलपूर्ण कलश, धर्मघट, अन्न, सब प्रकार के रस और ग्रीष्म ऋतु के लिए उपयोगी वस्तुओं का दान करें। पितृ श्राद्ध करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं। इस प्रकार अक्षय तृतीया को जो भी दान किया जाता है, उसका अक्षय फल प्राप्त होता है।

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