मेडिकल कॉलेज हादसा: क्या अस्पताल प्रशासन ने छिपाई थी सीएम योगी से यह बात?

गोरखपुर: महानगर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कथित तौर पर ऑक्‍सीजन की कमी से हुई बच्चों की मौतों के मामले में अस्पताल के प्राचार्य को तत्काल प्रभाव निलंबित कर दिया है। आज प्रेस वार्ता करते हुए लखनऊ से आये दो मंत्रियों स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा की इस मामले की जांच के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक हाई लेवल जांच कमेटी का भी गठन कर दिया गया है और कोई भी दोषी बक्शा नहीं जायेगा।

वैसे तो दोनों मंत्री प्रेस कांफ्रेंस में लीपापोती ही करते रहे लेकिन एक बात उन लोगों ने बताई और वो यह थी की मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सीएम योगी आदित्यनाथ को ऑक्सीजन संकट की कोई जानकारी नहीं दी। जब की इससे सम्बंधित ख़बरें स्थानीय मीडिया में चल रही थी। हैरानी की बात यह है की बीते एक महीने में योगी खुद मेडिकल कॉलेज का दो बार दौरा कर चुके हैं लकिन कभी भी अस्पताल प्रशासन ने यह जानकारी नहीं दी।

मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि हर पहलू को बारीकी से देखा और उसको समझने का प्रयास किया गया है। इसके अंदर एक चीज और सामने आई है। सीएम योगी 9 जुलाई को बीआरडी मेडिकल कॉलेज आए थे। सबसे विस्तार से चर्चा की थी। 9 अगस्त को भी आए थे। मगर एक विषय जो सामने आना चाहिए था। गैस सप्लाई का उसका विषय किसी को ने सामने नहीं रखा था।

अस्पताल की लापरवाही पर दो चिट्ठियों के खुलासे ने भी सवाल खड़े किए हैं. अस्पताल के बाल रोग विभाग को इसकी सूचना चिट्ठी के जरिए दी गई थी. चिट्ठी में कहा गया था कि अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी है. जान गंवाने वाले बच्चों में 5 नवजात भी थे. मौतों की वजह आधिकारिक तौर पर भले ही नहीं बताई जा रही हो लेकिन कहा जा रहा है कि इसके पीछे ऑक्सीजन की कमी ही कारण है।

पहली चिट्ठी तीन अगस्त की है, जो अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर सप्लाई करने वाली कंपनी ने लिखी थी. इसमें लिखा गया है कि वे सिलिंडर की सप्लाई नहीं कर पाएंगे क्योंकि 63 लाख रुपए से ज्‍यादा का बकाया हो गया है. ये चिट्ठी बीआर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल के साथ साथ गोरखपुर डीएम और उत्तर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा विभाग महानिदेशक को भेजी गई है. दूसरी चिट्ठी 10 अगस्त की है जो ऑक्सीजन सिलेंडर सप्लाई करने वाली कंपनी के कर्मचारियों ने लिखी थी. ये कर्मचारी अस्पताल में सिलिंडर देने का काम करते थे. ये चिट्ठी अस्पताल के बाल रोग विभाग के प्रमुख को संबोधित करते हुए लिखी गई थी जिसमें ऑक्सीजन सिलेंडर सप्लाई कम होने की जानकारी दी गई है.

दरअसल अस्पताल में लिक्विड ऑक्सीजन तो गुरुवार से ही बंद थी और शुक्रवार को सारे सिलेंडर भी खत्म हो गए. इंसेफेलाइटिस वार्ड में मरीजों ने दो घंटे तक अम्बू बैग का सहारा लिया. हॉस्पिटल मैनेजमेंट की बड़ी लापरवाही के चलते पिछले 48 घंटों में 33 बच्चों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ऑक्सीजन सप्‍लाई करने वाली फर्म का 69 लाख रुपये का भुगतान बकाया था. हालांकि इस बारे में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा गैस एजेंसी की ओर से बकाए की बात से इनकार किया गया है.

पुष्पा सेल ने भुगतान नहीं होने पर आपूर्ति बंद कर दी थी. सरकार ने आज इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण किसी रोगी की मौत नहीं हुई है. मेडिकल कॉलेज में भर्ती 7 मरीजों की विभिन्न चिकित्सीय कारणों से 11 अगस्त को मृत्यु हुई. घटना की मजिस्ट्रेटियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं. वहीं डीएम ने 5 सदस्यीय टीम गठिक की जो कि आज अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।