जायका पूर्वांचल का

पति-पत्नी ने एक ठेले से शुरू किया था सफर, आज बेचते हैं महानगर का सबसे स्वादिष्ट मटन

हितेश गोस्वामी/प्रीति मिश्रा
गोरखपुर: बात आज से लगभग 48 वर्ष पहले की है जब शहर के ही निवासी एक दम्पति ने अपनी जीविका चलाने के लिए 1970 में एक ठेला लगा कर मटन और मछली बेचना शुरू किया था। आज 48 साल बाद वो मटन-मछली का ठेला एक ऐसे दुकान बदल गया है जो अपने नॉन वेज खाने के लिए ना केवल गोरखपुर में बल्कि पुरे पूर्वांचल में प्रसिद्द है। इनके यहाँ मटन खाने के लिए लोग दूर-दराज के जिलों से भी आते हैं।

जी हाँ हम बात कर रहे हैं अपने ही शहर के अदालत ढाबे की। 1970 में अदालत निषाद और उनकी पत्नी विमला देवी ने अपना जीवनयापन करने के लिए एक ठेले से नॉन वेज परोसना शुरू किया था। धंधा बहुत अच्छा नहीं चला तो दोनों पंहुच गए तरकुलहा मंदिर और वहां पर एक गुमटी लगाकर हांड़ी मटन बेचना शुरू किया। हाथ में स्वाद था इसलिए धीरे धीरे लोगों को इनका बनाया हुआ मटन पसंद आने लगा।

कुछ दिनों बाद पति-पत्नी ने सोचा की क्यों ना वापस शहर चला जाए और एक बार वहीँ पर अपना धंधा ज़माने की कोशिश की जाए। दोनों वापस आ गए महानगर और यूनिवर्सिटी पेट्रोल पंप के पास एक अपनी दुकान शुरू कर दी। वहां पर इनका धंधा चल निकला। लोगों को इनके बनाये हुए मटन खूब पसंद आने लगे। आलम यह हो गया की शहर के जब भी कोई मटन खाने की सोचता तो उसे बस अदालत ढाबे का ही ख्याल आता। यहीं पर निषाद दम्पति के बेटे मोनू निषाद ने भी अपने पारिवारिक धंधे में हाथ बटाना शुरू कर दिया।

कई वर्षों तक यूनिवर्सिटी पेट्रोल पंप के पास मटन बेचने के बाद एक दिन रेलवे पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से इनको दुकान हटाने को कहा। उसके बाद इन लोगों ने अपनी दुकान यहाँ से हटा कर रामगढ ताल पल के पास कूड़ाघाट में जमीन किराये पर लेकर अपनी दुकान फिर जमा ली।

कैसे बनाते हैं मटन

मोनू निषाद ने Gorakhpur Final Report से बात करते हुए बताया कि यह लोग लकड़ी पर खाना बनाते हैं। उनका कहना था कि बनाने के इस तरीके के कारण ही मटन बहुत स्वादिष्ट बनता है। उन्होंने बताया की जो भी मसाले वह इस्तेमाल करते हैं वो खुद उनके द्वारा ही बनाया जाता है। एक खास बात और है कि इन लोगों ने कुछ गृहणियों को भी रोजगार दिया है। गृहणियां दुकान में रोटी और चावल बनवाने में मदद करती हैं।

कब होती है सबसे ज्यादा भीड़, क्या है रेट

मोनू बताते हैं कि इनके यहाँ सबसे ज्यादा भीड़ दोपहर में होती है। वैसे तो इनका ढाबा सुबह 11 बजे शुरू होता है और रात 8 बजे तक खुला रहता है। लेकिन सबसे ज्यादा भीड़ दोपहर में ही होती है। यहाँ आपको बताते चलें की कोई भी मौसम हो, सर्दी या गर्मी इनके यहाँ खाने वालों की कमी नहीं होती है। एक दिन में तक़रीबन 200-250 ग्राहक अदालत ढाबे पर मटन का स्वाद चखते हैं और वाह वाह करते हुए जाते हैं।

यहाँ पर मटन का रेट भी कोई बहुत ज्यादा नहीं है। यहाँ हाफ प्लेट मटन खाने के लिए आपको 120 रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। वहीँ अगर आपको फुल प्लेट खाना हो तो आप को यहाँ 240 रुपये खर्च करना पड़ता है। हाफ प्लेट में 2 पीस और फुल प्लेट में 4 पीस मटन होता है।

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