जायका पूर्वांचल का

VIDEO: खाना हो भूजा के साथ फ्रेश फ्राइड फिश तो आइये कुशीनगर में यहाँ

मोहन राव/राकेश सिंह
कुशीनगर: सर्दी के मौसम में नॉन-वेज की डिमांड बढ़ जाती है। और जब बात तली हुई मछली की हो तो फिर पूछना ही क्या। तली हुई मछली लोग स्टार्टर के तौर पर भी खाते हैं तो वहीँ कई जगहों पर इसे कई अन्य चीजों के साथ भी खाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी तली हुई मछली और भूजे का स्वाद चखा है! आपमें से बहुत कम लोग होंगे जिन्होंने फ्राइड फिश और भुजे का स्वाद एक साथ लिया होगा।

जनपद का पनियहवा भूजा और मछली के लिए पूर्वांचल में धीरे-धीरे प्रसिद्ध हो रहा है । कई जिलों से यहां सैलानी मछली का जायका लेने और नारायणी नदी के तट के रेत का आनंद लेने आ रहे हैं। इसलिए लोगों द्वारा पनियहवा को पूर्वांचल का गोवा कहां जा रहा है।

पनियहवा कहां है

कुशीनगर जनपद के उत्तरी छोर पर बिहार सीमा के पास पनियहवा स्टेशन है पुरानी छितौनी से सटे यह जगह है। यह सड़क और रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है । गोरखपुर नरकटियागंज रेल मार्ग पर है । पडरौना से पनियहवा तक राष्ट्रीय राजमार्ग भी है। पनियहवा के बगल में नारायणी नदी (बड़ी गंडक) बहती है । इसी नदी पर पनियहवा के निकट सड़क और रेल पुल एक ही जगह पर बना है। नदी के उस पार बिहार राज्य का मदनपुर जंगल शुरू होता है जो बेत और खैर की लकड़ी के लिए जाना जाता है। इसी जंगल में वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना भी है। मदनपुर जंगल में एक शक्तिपीठ( देवी का मंदिर )है। जहां पर थारू जनजाति के लोग पाए जाते हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर लोग मंदिर परिसर में बकरो की बलि चढ़ाते हैं और वही पर प्रसाद के रूप में इसे ग्रहण करते हैं।

क्या है पनियहवा की चफुआ मछली

पनियहवा में एक विशेष प्रकार की मछली पायी जाती जो आकार में छोटी होती है। लेकिन अच्छे स्वाद के लिए मशहूर है। पनियहवा के पास बहने वाली नारायणी नदी में वर्ष भर पानी भरा रहता है। मछुआरे छोटी- छोटी नाव के सहारे नदी में मछली पकड़ते हैं और पनियहवा बेचते हैं। पनियहवा में दर्जनों दुकानों पर चफुआ मछलियों को फ्राई कर के चावल और भूजे के साथ बेचा जाता है।‌ दूर दूर से खाने पीने वाले लोग यहां आकर इसका जायका लेते हैं।

पुल के इस पार ही रोड के किनारे ही आपको कई ऐसे दुकान मिल जाएंगे जहाँ ताज़ी मछलियां फ्राई करके दी जाती हैं। यहाँ के लोग सुबह-सुबह मछली पकड़ते हैं और दिन भर उसे बेचते हैं। चफुआ के अलावा रोहू मछली भी यहाँ बेचीं जाती है। दूकानदार मछली को मसालों में लपेट कर रखे रहते हैं और ग्राहक की मांग के अनुसार उसे तल कर बेचते हैं। ग्राहकों को यहाँ मछली तौल कर फिर उसे फ्राई करके परोसा जाता है।

दूकानदार मछली को सरसो के तेल में फ्राई कर गरम-गरम परोसते हैं। फ्राई मछलियों का दाम यहाँ 400 से 700 रुपये किलो होता है। खास बात यह है कि आप यहाँ ताज़ी मछलियों का स्वाद लेकर यहीं से सटे वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना में घूमने का आंनद ले सकते हैं।

 

बढ़ रहा है नारायणी नदी का महत्व

नारायनी नदी नेपाल से निकलकर उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद में पनियहवा के निकट प्रवेश करती है । इसी पनियहवा में अब साधु संतों का शाही स्नान भी स्नान पर्वों पर शुरू हो गया है । गंगा आरती के तर्ज पर नारायणी आरती भी शुरू हो गई है । नारायणी नदी के कटान से लाए गए बलुई दोमट मिट्टी गन्ना और केले की फसलों के लिए वरदान है। इस क्षेत्र में गन्ना और केले की लहलहाती फसलें भी देखने को मिल रही हैं। नदी के पनियहवा रेल पुल के पास सैलानी मगरमच्छ भी देखने आते हैं।

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