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अधेड़ चीनी जोड़ों को दूसरा बच्चा पैदा करने में हो रही परेशानी

Image-for-representation-6बीजिंग: चीन में एक बच्चा नीति में बदलाव के बाद दूसरे बच्चे को पैदा करने की छूट दी गई है। लेकिन कई अधेड़ जोड़ों को अब दूसरा बच्चा पैदा करने में परेशानी हो रही है। इसका कारण मुख्यत: शुक्राणुओं की गुणवत्ता खराब होना जैसी समस्याएं हैं।
द चायना डेली की रिपोर्ट में कहा गया है कि आधिकारिक बयानों के मुताबिक नए कानूनों के बाद चीन के कम से कम 60 फीसदी जोड़े जो दूसरा बच्चा पैदा करना चाहते हैं वे 35 साल या उससे ज्यादा उम्र के हैं। इनमें से कई फर्टिलिटी विशेषज्ञ के पास पहुंच रहे हैं।
वूहान विश्वविद्यालय के फर्टिलिटी सेंटर के डॉक्टर लोंग वेन ने बताया कि उनके आधे से ज्यादा पुरुष मरीजों में कमजोर क्वालिटी के शुक्राणुओं की समस्या है।
लोंग आगे बताते हैं कि सामान्य तौर पर वह रोजाना 80 मरीजों को देखते हैं और उनका काम वीर्य में शुक्राणुओं की क्वालिटी और मात्रा को जांचना है।
चीन की राज्य परिषद ने मंगलवार को एक प्रस्ताव पारित कर चीन की एक बच्चा नीति में परिवर्तन करते हुए सार्वभौमिक दो बच्चा नीति लागू की थी।
लोंग आगे बताते हैं कि उनसे संपर्क करने वाले 40 सा उससे अधिक उम्र के पुरुषों में से 30 फीसदी के शुक्राणु अच्छी क्वालिटी के हैं। उनके मुताबिक जो आईटी तकनीक या मीडिया में काम करते हैं उनके शुक्राणुओं की गुणवत्ता कमजोर होने की ज्यादा संभावना है। इसका कारण मुख्यत: उनकी जीवनशैली है। वे लंबे समय तक बैठे रहते हैं, कसरत आदि काफी कम करते हैं, उन पर काम का ज्यादा बोझ होता है। साथ ही धूम्रपान से भी शुक्राणुओं की गुणवत्ता कमजोर होती है।
वहीं मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि 35 या उससे ज्यादा उम्र के बाद बांझपन और गर्भावस्था संबंधी जटिलताएं बढ़ जाती हैं। इसलिए 24 से 28 साल की उम्र के बीच ही बच्चा पैदा कर लेना चाहिए।
सिचुआन प्रांत के चेंगदू स्थित वेस्ट चाइना सेकंड विश्वविद्यालय अस्पताल के रिप्रोडक्टिव मेडिकल सेंटर के डॉक्टर क्विन लांग का कहना है कि उनसे संपर्क करने वाले जोड़ों में जिनकी उम्र 30 साल या उससे अधिक होती है उनमें से आधे पुरुषों की शुक्राणुओं की गुणवत्ता सामान्य से कम होती है।
चीन द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार चीन में गर्भधारण संबंधी समस्याओं में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। हालांकि शुक्राणुओं की गुणवत्ता पर अभी तक किसी प्रकार का राष्ट्रीय सर्वेक्षण नहीं किया गया है।
इस बयान में कहा गया है कि 5 करोड़ से ज्यादा लोग इनफर्टिलिटी की समस्या से परेशान हैं जिनमें से आधे पुरुषों की समस्या शुक्राणुओं की कमजोर गुणवत्ता का होना है।

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