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नए साल में संयुक्त राष्ट्र के समक्ष अवसर और चुनौतियां

United-Nationsसंयुक्त राष्ट्र: नए साल में संयुक्त राष्ट्र के सामने अगर चुनौतियां हैं तो वैश्विक शांति और विकास को बढ़ावा देने के लिए कई मौके भी हैं। इनमें सीरिया संकट का समाधान और वैश्विक स्थाई विकास की रुपरेखा पर अमल शामिल है। इस साल संयुक्त राष्ट्र के नए महासचिव का चुनाव भी होना है।
विश्व के सामने एक बड़ा संकट सीरिया का है। इस देश का गृहयुद्ध अब पांचवें साल में पहुंच चुका है। इस एक संकट ने दुनिया में शरणार्थियों की बाढ़ ला दी है। मार्च 2011 से अब तक यहां ढाई लाख लोग मारे जा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 18 दिसंबर को सर्वसम्मति से सीरिया संकट के राजनैतिक समाधान की एक कार्ययोजना के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसमें कहा गया है कि सीरिया में राष्ट्रीय एकता की सरकार का गठन किया जाए और शांति वार्ता को जनवरी से ही शुरू किया जाए। इसमें जोर देकर कहा गया है कि सीरिया के भविष्य का फैसला सीरिया के लोग ही करेंगे।
नए प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र को इस बात के लिए अधिकृत किया गया है कि वह सीरिया संकट के राजनैतिक समाधान के लिए देश के विपक्ष को साथ लेकर चले, जंगबंदी की समयसीमा तय करे, नए संविधान और नए चुनाव के लिए पहल करे।
सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत स्टाफन दे मिस्तुरा ने सीरिया संकट के समाधान के लिए जिनेवा में संबंद्ध पक्षों के बीच वार्ता के लिए 25 जनवरी की तारीख का लक्ष्य रखा है। वार्ता के लिए संयुक्त राष्ट्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती वार्ता के भागीदारों और आतंकवादियों की परिभाषा को लेकर सामने आएगी।
जिनेवा में इससे पहले भी दो बार सीरिया के संबद्ध पक्षों के बीच वार्ता हो चुकी है, लेकिन दोनों ही बार कोई नतीजा नहीं निकला था।
साल 2016 स्थाई विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने के वैश्विक प्रयासों के शुरू होने का भी गवाह बनेगा। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने एसडीजी को बेहतर विश्व के लिए सार्वभौमिक, एकीकृत और परिवर्तनकारी सोच बताया है।
इस योजना में संयुक्त राष्ट्र के सभी अमीर और गरीब देश शामिल हैं। इसके तहत गरीबी, गैरबराबरी के उन्मूलन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े 17 लक्ष्य और 169 काम तय किए गए हैं जिन्हें 15 साल में पूरा किया जाना है। बीते साल सितंबर में इसे विश्व द्वारा स्वीकार किए जाने पर बान ने कहा था कि मानवता के इतिहास में पहली बार दुनिया से बेहद गरीबी के खात्मे की इससे शुरुआत हो सकती है।
इस साल बान की-मून का कार्यकाल पूरा हो रहा है। उनकी जगह नए महासचिव का चुनाव होना है। स्वाभाविक सी लगने वाली यह प्रक्रिया भी इस बार कई बदलावों का गवाह बन रही है। कई हिस्से से यह आवाज उठी है कि वह वक्त आ गया है जब सदस्य देश इस विश्व संस्था के सर्वोच्च पद पर किसी महिला को नियुक्त करें।
जुलाई तक यह स्थिति साफ होगी कि मैदान में कौन-कौन प्रत्याशी हैं। लेकिन, बीते साल के मध्य दिसंबर से इसके चयन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही महासचिव के चयन में अधिक पारदर्शिता की आवाज उठने लगी है। तमाम देशों ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चयन पर पड़े रहस्य के पर्दे को हटाना होगा और पांच वीटो शक्ति प्राप्त देशों के एकाधिकार को खत्म कर चयन को लोकतांत्रिक बनाना होगा।
इसी के तहत 15 दिसंबर को महासभा अध्यक्ष मोग्नेस लइक्केतोफ्त ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देश नए महासचिव की चयन प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे। सभी देशों को हक होगा कि वे इस पद के प्रत्याशियों का खुले रूप से साक्षात्कार लेकर अपना मन बना सकें।
हालांकि, इस स्थिति में अब भी कोई बदलाव नहीं आया है कि महासचिव के नाम पर अंतिम मुहर लगाने का हक वस्तुत: पहले की ही तरह सुरक्षा परिषद के पांच वीटो शक्ति प्राप्त देशों को होगा।

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