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पठानकोट : सघन तलाशी के बाद भी 24 घंटे तक कैसे बचे आतंकी

Barricade-has-been-put-afteपठानकोट: पंजाब में सुरक्षा बलों ने इस बात की छानबीन शुरू की है कि शनिवार को वायु सेना अड्डे पर हमला करने से 24 घंटे पहले ही आतंकियों की तलाश शुरू हो जाने के बावजूद वे कैसे बचे रहे।
साथ ही इस बात की भी विशेष जांच होगी कि पाकिस्तान सीमा से भारत में दाखिल होकर वे किन संसाधनों की मदद से उच्च सुरक्षा वाले वायु सेना परिसर में घुसने में कामयाब हुए।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) समेत विभिन्न सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां 30-31 दिसंबर को 3.30 बजे तड़के से लेकर भारतीय वायु सेना अड्डे पर हुए हमले तक की घटनाओं को एक बार फिर से दुहरा कर मामले की तहकीकात करेंगे।
वे यह जानना चाहते हैं कि 5 संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकवादी खुफिया जानकारी मिलने के बावजूद उच्च सुरक्षा वाले वायु सैनिक अड्डे में इतनी आसानी से कैसे घुस पाए।
पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, “इस क्षेत्र में आतंकवादियों के दाखिल होने की पहली सूचना शुक्रवार (एक जनवरी) को ही मिल गई थी। लेकिन उसके बाद अगले 30 घंटे तक वे इस इलाके में घूमते रहे। यहां तक कि वायु सेना अड्डे पर किए गए हमले से 24 घंटे पहले ही उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी समेत दो अन्य लोगों का कार समेत अपहरण कर लिया था। वह नीली बत्ती लगी गाड़ी थी। नीली बत्ती लगी गाड़ी होने के कारण किसी भी बैरिकेड पर उसे रोका नहीं गया और वे पठानकोट वायु सेना अड्डे तक जाने में कामयाब हो गए।”
पुलिस विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक पहली चूक सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) से तब हुई जब वे पंजाब के गुरुदासपुर और जम्मू एवं कश्मीर के कठुआ जिले से लगे बामियाल सेक्टर में आतंकवादियों की घुसपैठ रोक नहीं पाए। अब सीमा के पास के क्षेत्रों में तैनात पंजाब पुलिस की उच्चस्तरीय जांच की जा रही है। उन इलाकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पंजाब पुलिस की है।
मामले की जांच में जुटे एक अधिकारी ने बताया कि आतंकवादियों ने एक टैक्सी ड्राइवर की हत्या कर दी और पुलिस अधिकारी के दोस्त का गला रेत कर उसे घायल कर दिया। उन्होंने इन वारदातों में एके-47 जैसे हथियारों का प्रयोग करने की बजाए दूसरे सामान्य हथियारों का प्रयोग किया ताकि उनकी पहचान जाहिर न हो और वह सामान्य अपराध की घटनाओं की तरह दिखें।
माना जा रहा है कि ये आतंकवादी पठानकोट से 35 किलोमीटर दूर रावी नदी से होकर भारत आए थे। हालांकि उस पूरे क्षेत्र की बाड़बंदी की गई है और चौबीसों घंटे उसमें करंट दौड़ता है।
संदेह है कि भारत में दाखिल होने के बाद उन्होंने एक पाकिस्तानी नंबर के माध्यम से टोयोटा इनोवा कार किराए पर लिया। पुलिस अधिकारी का कहना है, “दोनों ही तरफ के तस्कर अपनी गतिविधियां चलाने के लिए स्थानीय मदद पर निर्भर रहते हैं। उसी के माध्यम से इन आतंकवादियों की भी मदद की गई।”
सीमा के समीप भगवाल गांव के इकागार सिंह उस इनोवा के ड्राइवर थे, जिसे आतंवादियों ने किराये पर लिया था। जब वे आतंकवादी कार में बैठे तो उनका ड्राइवर से झगड़ा हो गया। बामियाल-पठानकोट रोड पर वह इनोवा एक पेड़ से टकरा गई जब ड्राइवर उन आतंकवादियों को रोकने की कोशिश कर रहा था। आतंकवादियों ने उसके बाद खामोशी से ड्राइवर की हत्या कर दी और उसका शव पास के खेतों में फेंक दिया। इनोवा के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण उसके दो टायर फट गए और वह चलाने लायक नहीं रहा।
इसके बाद आतंकवादी सड़क पर किसी दूसरी गाड़ी का इंतजार करने लगे। तभी पंजाब पुलिस के महानिरीक्षक सलविंदर सिंह अपनी महिंद्रा जायलो गाड़ी से वहां से गुजरे। वे पास स्थित एक गुरुद्वारे से लौट रहे थे। आतंकवादी जो कि सेना की वर्दी में थे उन्हें रुकने का इशारा किया। गाड़ी रुकने के बाद वे उसमें जबरदस्ती घुस गए और उनका अपहरण कर लिया। उसके बाद उन्होंने अधिकारी समेत उनके साथियों पर राइफल की बट से हमला किया और पठानकोट की तरफ गाड़ी ले जाते रहे। उस गाड़ी पर नीली बत्ती लगी थी इसलिए रास्ते में किसी भी चेकिंग प्वाइंट और बैरिकेड पर पंजाब पुलिस के सुरक्षाकर्मियों ने उसे नहीं रोका।
आतंकवादियों ने गाड़ी का अपहरण करने के बाद थोड़ी ही देर में अधिकारी को चलती गाड़ी से फेंक दिया। थोड़ा आगे जाकर आतंकवादियों ने अधिकारी के साथी राजेश वर्मा का गला काट दिया और उसे मरा समझ कर अकालगढ़ गांव के नजदीक फेंक दिया जो कि वायु सेना अड्डे के पास ही स्थित है। आतंकवादियों ने उसके बाद गाड़ी को अकालगढ़ गांव में छोड़ दिया।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “जब आतंकवादियों ने सरकारी गाड़ी का अपहरण किया और जब उन्होंने वायु सेना परिसर पर हमला किया। उसके बीच में 24 घंटों का वक्त था। इसका मतलब है कि आतंकवादी वायु सेना अड्डे के आसपास ही कहीं छुपे रहे। अगर वे खुली जगह में होते तो कोई न कोई उन्हें जरूर देखता। इसकी जांच करने की जरूरत है।”
अधिकारी ने कहा कि उस पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया था और पुलिस समेत सुरक्षा एजेंसियां आतंकवादियों की तलाश में जुटी थी। इसके बावजूद आतंकवादियों ने वायु सेना परिसर में पीछे की तरफ से दीवार फांद कर दाखिल होने में कामयाब हो गए। उन्होंने सैनिकों पर तड़के 3.30 बजे गोलियां बरसानी शुरू कर दी और वायु सेना अड्डे के एक हिस्से पर कब्जा जमा लिया।
हालांकि एनएसजी कमांडो, आईएएफ कमांडो और आर्मी स्पेशल फोर्स के कमांडो ने उन सभी आतंकवादियों को मार गिराया, लेकिन सुरक्षा बलों के साथ आतंकवादियों की यह लड़ाई 15 घंटे तक चलती रही। शनिवार को सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों पर काबू पा लिया। लेकिन रविवार की सुबह वायु सेना परिसर में फिर गोलीबारी होने लगी। उसके बाद यह पता लगा कि अभी एक-दो और आतंकवादी छुपे हुए हैं। आखिरकार रविवार शाम तक सुरक्षा बलों ने सभी आतंकवादियों को मार गिराया।

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