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गंगा जमुनी तहजीब का प्रतीक बाले मियां का मेला आज से शुरु

गोरखपुर: गंगा जमुनी तहजीब का प्रतीक बाले मियां का मेला आज से शुरु हो गया । एक माह तक चलने वाले इस मेले में सभी समुदाय के अकीकतमंद भारी संख्या में शिरकत किये।
गोरखपुर के तिवारीपुर क्षेत्र के बहरामपुर स्थित दरगाह परिसर में भव्य मेला लगता है। हजरत सैयद सलार मसूद गाजी मियां रहमतुल्ला अलेह जनसामान्य में बांले मियां के नाम से जाने जाते हैं समाज में एकता का संदेश देने वाले कुरीतियों को दूर करने और मानव धर्म की स्थापना के लिए प्रयत्नशील आध्यात्मिक शक्ति वाले मियां का मेला महानगर के बहरामपुर में स्थित दरगाह परिसर में आज से शुरु हो रहा है। जो एक माह तक चलेगा मेले में दूर दराज से आए अकीकत मंदों के अलावा शहर के लोग भी शिरकत करते हैं।
मेले में झूला, चरखों जैसे मनोरंजन के साधन आर्टिफिशियल ज्वेलरी ,श्रृंगार व घरेलू सामानों खाने-पीने की दुकानों से लेकर क्राकरी की दुकानें सज गयी है । मदरसा हुसैनिया के अध्यापक मोहम्मद हुसैन बताते हैं कि बाले मियां की दरगाह बहराइच में है ।गाजी मियां उर्फ़ बाले मियां रहमतुल्लाह अलैह सद्भाव की अलख जगाने के लिए मध्य भारत, उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को संदेश देने के लिए निकले थे।
बाले मियां की शादी की रस्म के पीछे कहा जाता है कि बाराबंकी के रुधौली के नेत्रहीन जोहरा बीबी को बाले मियां के यहां आने से रोशनी मिल गई थी। जिससे वह बाले मियां से शादी करना चाहती थी । तभी से हर साल रस्म पलंग पीढ़ी के रूप में मनाई जाती है। महानगर में बहरामपुर के बड़े मैदान में हर साल ज्येष्ठ माह के महीने में मेला लगता है । यहां पर आस पास के क्षेत्रों के अलावा दूर दराज से भारी संख्या में श्रद्धालु जन आते हैं । खास बात यह है कि चाहे मुसलमान हो या हिंदू सभी धर्मो के लोगो की अच्छी तादाद में आकर आस्था प्रकट करते हैं।
गौरतलब है यहां पर मुसलमानों से ज्यादा हिन्दू समुदाय के अक़ीक़तमंद शिरकत करते है।ऐसा माना जाता है कि आंधी पानी के कारण बाले मिया की शादी किसी साल नहीं हो पाती है और हर बर्ष ज्येष्ठ माह में रस्म पलंग पीढ़ी के साथ मेला लगता है और लोग अपनी मन्नत मांगते है और वो पूरा भी होती है।
दरगाह के मुतवल्ली मोहम्मद इस्लाम हाशमी व प्रबंधक मोहम्मद खलीक अबरार अहमद ने बताया कि बांले मिया की रस्म शादी की पलंग पीढ़ी के साथ मेले का शुभारंभ होता है ।एक माह तक चलने वाले इस मेले में भारी संख्या में अक़ीक़त मंद आते है और अपनी मन्नत मांगते है। जो पूरी होती है।

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