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पहली बार किसी धरने में शामिल हुए पंडित हरिशंकर तिवारी, आज भी दिखा उनके अतीत का जलवा

गोरखपुर: 1980 के दशक से लगातार पूर्वांचल की क्षितिज पर चमकने वाले पंडित हरिशंकर तिवारी का आज भी जोशोखरोश जस का तस है। आज अपने परिवार के सम्मान पर हुए छापेमारी के विरोध में जब वह पैदल ही धरनास्थल पर पहुंचे तो उन के शुभेच्छुओं का ताँता लग गया। शायद ही किसी को आज तक याद होगा कि वह कभी किसी धरने में शामिल हुए हों।
मालूम होगी कभी 1980 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली के तौर पर जाने वाले पंडित हरिशंकर तिवारी का जलवा आज भी बरकरार है । ऐसा आज के धरने में शामिल होने वाले लोगों के असीम और अटूट प्रेम को देखते हुए प्रतीत हुआ है । बाद के दिनों में राजनीतिक गलियारों में बेरोकटोक सत्ता के काबीना मंत्री तक के सफर में उन्होंने कभी भी हाता छोड़ कर किसी भी धरना प्रदर्शन रैली में भाग नहीं लिया था, किंतु अब जबकि उनके कनिष्ठ पुत्र पंडित विनय शंकर तिवारी जिले की एकमात्र व बसपाई विधानसभा सीट चिल्लूपार से वर्तमान विधायक हैं। बावजूद इसके उनके आवास पर गत शनिवार को एक अपराधी की तलाश में एसपी सिटी के नेतृत्व में पड़े छापे से उनके सम्मान पर कहीं ना कहीं चोट पहुंची।
नतीजा यह हुआ कि पूरे जनपद में उनके इष्ट मित्र, शुभचिंतक समेत बसपा कार्यकर्ताओं ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया और आज भारी तादाद में इकट्ठा होकर प्रशासन से कार्यवाही का जवाब मांगने के लिए जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। जिसमें 89 वर्षीय पंडित हरिशंकर तिवारी भी खुद हाता से निकलकर भीड़ की अगुवाई करते हुए धरना स्थल पर आकर कुछ देर बैठ गए।
किंतु गर्मी के प्रकोप को देखते हुए उनके शुभचिंतकों ने कुछ देर बाद वहां से हटा कर पेड़ की छाया में बैठा दिया। इस दौरान पंडित हरिशंकर तिवारी का हाल चाल लेने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए शुभचिंतकों का ताता लग गया।
आज जिस तरह से तिवारी परिवार के सम्मान में क्षेत्रीय जनता और शुभचिंतक धरना स्थल पर पहुंचे थे , उसे देख कर लगता है कि आज भी उनका ग्लैमर लोगों के सिर चढ़ बोल रहा है। इस दौरान धरना स्थल पर आए तमाम बुजुर्ग और अधेड़ लोगों से भी बात की गई तो किसी ने भी कभी पंडित जी को किसी धरना या रैली में शामिल होने की बात नही स्वीकार की।

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