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गोरखपुर में भी जवाहरबाग, बड़हलगंज में उद्यान विभाग के पार्क पर वर्षो से है अवैध अतिक्रमण, प्रशासन लाचार


गोरखपुर: एक वर्ष पूर्व सपा शासन में प्रदेश का मथुरा शहर अचानक सुर्खियों में आ गया था। इसका कारण वहां के जवाहरबाग नामक स्थान पर अवैध अतिक्रमणकारी रामबृक्ष ने पुलिस और प्रशासन से दो दो हाथ किये थे। कुछ इसी तरह से गोरखपुर जनपद के बड़हलगंज कस्बे में मेन रोड पर बने व स्थानीय निवासियों के आमोद-प्रमोद के लिए स्थापित नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क पर बगल के गांव निवासी राम लाल यादव पिछले एक दशक से कब्जा जमाए बैठे हैं। उनके दबंगई का आलम यह है कि पार्क में बनी पुलिस बैरक को भी उन लोगो ने हटवा दिया ।अब भी यह बदहाल पार्क इनकी हनक का शिकार है।
बता दें कि गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर जनपद के सीमाई उपनगर बड़हलगंज में करीब दो दशक पूर्व स्थानीय नागरिकों के मनोरंजन हेतु अंबेडकर चौराहे पर लोक निर्माण विभाग द्वारा ग्राम सभा की भूमि पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क की स्थापना कराई गई थी। तत्कालिक विधायक हरिशंकर तिवारी के प्रयास और विधायक निधि के 835000 रुपये इस पार्क में खर्च हुए।

इतना ही नहीं पार्क में उद्यान विभाग द्वारा विभिन्न प्रकार के फूल पौधों व् लोगों के बैठने के लिए बेंच आदि लगवाये गये। जिस की देख रेख के लिए विभाग के कर्मचारी भी तैनात किये गए थे। सायं काल स्थानीय उपनगर के निवासी परिवार सहित उस पार्क में समय गुजारते थे । मगर इसके कुछ ही दिनों बाद बगल के भैसौली गांव के राम लाल यादव ने अपना अधिकार जमाते हुए पार्क में अपना कब्ज़ा जमा लिया।
लोगों की शिकायत पर तहसील व पुलिस प्रशासन ने कई बार कब्जा हटवा ते हुए उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की लेकिन उसके बाद भी हर बार रामलाल का कब्जा उस पार्क में बरकरार रहा । उसकी इस दबंगई को देखते हुए पुलिस ने वहां अपना बैरक बनवा दिया। किन्तु कुछ ही महीनों बाद किसी कारणों के चलते पुलिस को बैरक खाली करना पड़ा। इसके बाद रामलाल यादव पार्क पर पूरी तरह से काबिज हो गया। अब उस पार्क में पेड़ पौधों के नामो-निशान तो है ही नहीं, अलबत्ता पार्क की जमीन पर खेती के काम किये जा रहे हैं । वही स्थित पुलिस बैरक को रामलाल ने अपने आवास के रूप में तब्दील कर लिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मथुरा के जवाहरबाग की तरह सुभाष चंद्र बोस पार्क को लेकर प्रशासन संजीदा नहीं दिख रहा है।

वही स्थानीय नागरिक लाल बहादुर मिश्रा ने बताया कि 10 ,15 वर्ष पहले यह पर हरा भरा था और बहुत बढ़िया था आज के समय में उस पार्क के कुछ अराजक तत्व आ कर काबिज हो गए है और वह के पेड़ पौधों को उजाड़ कर अपने समानों और गाये भैस को रखे हुए है ।इतना की नहीं पार्क के ज़मीन पर वह लोग खेती भी करते हैं ।कई बार प्रशासन ने इस पार्क कों खाली कराया है लेकिन ये लोग वापस इस पार्क में आ जाते हैं। इस पार्क को प्रशासन द्वारा खालीं नहीं करने का मतलब यही है कि प्रशासन इन लोगो के सामने लाचार दिखती नजर आरही है ।
वही दूसरी तरफ पार्क पर अपना कब्जा जमाए बैठे राम लाल यादव का कहना है कि हम बचपन से ही इस पार्क की जमीन पर रहते हैं। यह जमीन पहले जमींदारों की थी हम लोग यहाँ पर बसे हुए हैं। प्रशासन ही नहीं पत्रकार लोग भी हम लोगों को हटवाने में लगे हुए है ।यह विवाद सन 1998 से चल रहा है। 4 वर्षों तक पुलिस फोर्स यहाँ पर रही है ।यहाँ बिजली का बिल हम जमा करते हैं। यहाँ पर जमींन, घर, जानवर, दुकान सब हमारा है। जो जहाँ रहता है जमींन उनकीं ही होती हैं। वैसे भी क़ानूनी किताब में भी लिखा है कि जो 100 वर्ष तक एक जमीन पर रहेगा, वो उसका हो जाता है ।दो वर्ष पहले ही पुलिस वाले यहाँ से गए है ।प्रेस वाले ही हम लोगो को यहाँ से हटवाना चाहते है।यह पार्क नहीं है ,यहाँ पर जानवरों का चारा भी हम लोगों ने बोया है। एसडीएम ने कई बार हम लोगो की खेती को कटवा लिया था।
वही एसडीएम गौरव श्रीवास्तव का कहना है कि यहाँ पर एक पार्क बना हुआ है इसकी जांच कराई गई है ।मौके पर जा कर देखा गया तो संज्ञान में आया कि राम लाल नाम का एक व्यक्ति है । जो बने हुए मकान में अपने परिवार वालों के साथ रह रहा है ।जिसमे पहले भी कार्यवाही की गई थी । यह मामला अभी सिविल न्यायालय में विचाराधीन है ,इस लिए अभी कोई कार्यवाही किया जाना उचित नहीं है।
पार्क के सम्बन्ध में विभागीय आंकड़ो के मुताबिक कुछ खास बातें:-
–तात्कालिक डीएम राजन शुक्ला ने इस पार्क का उद्घाटन किया था।
–कैबिनेट मंत्री पंडित हरिशंकर तिवारी ने पार्क के लिए विधायक निधि से 8,35000 ₹ दी थी।
–यह पार्क लगभग एक एकड़ में स्थित है।
–उद्यान विभाग ने भी लगभग 2.5 लाख रुपये इस पार्क में खर्च किया था और इस पार्क में देख-रेख के लिए दो माली भी नियुक्त किए थे।

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