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गंगा दुनिया की सबसे संकटग्रस्त नदी

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय स्तर के एनजीओ वर्ल्ड वाइड फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने गंगा को दुनिया की सबसे संकटग्रस्त नदी करार दिया है। ये केंद्र सरकार के लिए झटका है, क्योंकि गंगा की बेहतरी के लिए नमामि गंगा जैसी परियोजना के जरिए भारी-भरकम धनराशि खर्च कर रही है।

इसके पीछे तर्क देते हुए संस्था ने कहा है कि गंगा विश्व की सबसे अधिक संकटग्रस्त नदी इसलिए है, क्योंकि लगभग सभी दूसरी भारतीय नदियों की तरह गंगा में भी लगातार पहले बाढ़ और फिर सूखे की स्थिति पैदा हो रही है। इस अंतरराष्ट्रीय संस्था का गंगा को लेकर जारी यह बयान सरकार के लिए झटका माना जा रहा।

मौजूदा भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार 2014 में कई बड़े वादों के साथ सत्ता में आई, जिसमें से एक था गंगा की सफाई का वादा। लेकिन अभी भी गंगा का हाल वैसा ही लगता है। देश में 2,071 किलोमीटर क्षेत्र में बहने वाली नदी गंगा के बारे में वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (World Wildlife Fund) का कहना है कि गंगा विश्व की सबसे अधिक संकटग्रस्त नदियों में से एक है क्योंकि लगभग सभी दूसरी भारतीय नदियों की तरह गंगा में लगातार पहले बाढ़ और फिर सूखे की स्थिति पैदा हो रही है।

उल्लेखनीय है कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद से ही गंगा सफाई का मामला काफी बार उठा चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने चुनावी वादे में गंगा की सफाई की बात कही थी लेकिन इस पर अभी तक जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ है। उत्तराखंड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुंदरवन तक गंगा विशाल भू-भाग को सींचती है। गंगा भारत में 2,071 किमी और उसके बाद बांग्लादेश में अपनी सहायक नदियों के साथ 10 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के अति विशाल उपजाऊ मैदान की रचना करती है।

गंगा नदी के रास्ते में पड़ने वाले राज्यों में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं. गंगा में उत्तर की ओर से आकर मिलने वाली प्रमुख सहायक नदियों में यमुना, रामगंगा, करनाली (घाघरा), ताप्ती, गंडक, कोसी और काक्षी हैं जबकि दक्षिण के पठार से आकर मिलने वाली प्रमुख नदियों में चंबल, सोन, बेतवा, केन, दक्षिणी टोस आदि शामिल हैं. यमुना गंगा की सबसे प्रमुख सहायक नदी है, जो हिमालय की बन्दरपूंछ चोटी के यमुनोत्री हिमखण्ड से निकलती है।

गंगा उत्तराखंड में 110 किमी, उत्तर प्रदेश में 1,450 किलोमीटर, बिहार में 445 किमी और पश्चिम बंगाल में 520 किमी का सफर तय करते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है।

समाचार एजेंसी IANS द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, जहां तक प्रदूषण की बात है तो गंगा ऋषिकेश से ही प्रदूषित हो रही है। गंगा किनारे लगातार बसायी जा रही बस्तियों चन्द्रभागा, मायाकुंड, शीशम झाड़ी में शौचालय तक नहीं हैं. इसलिए यह गंदगी भी गंगा में मिल रही है, कानपुर की ओर 400 किमी उलटा जाने पर गंगा की दशा सबसे दयनीय दिखती है. इस शहर के साथ गंगा का गतिशील संबंध अब बमुश्किल ही रह गया है।

ऋषिकेश से लेकर कोलकाता तक गंगा के किनारे परमाणु बिजलीघर से लेकर रासायनिक खाद तक के कारखाने लगे हैं, जिसके कारण गंगा लगातार प्रदूषित हो रही है।

भारत में नदियों का ग्रंथों, धार्मिक कथाओं में विशेष स्थान रहा है. आधुनिक भारत में नदियों को उतना ही महत्व दिया जाता है और लाखों श्रद्धालु त्योहारों पर इन पवित्र नदियों में डुबकी लगाते हैं लेकिन वर्तमान हालात में नदियों के घटते जलस्तर और प्रदूषण ने पर्यावरणविदों और चिंतकों के माथे पर लकीरें ला दी हैं।

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