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ज़रूर पढ़े: युवाओं को आध्यात्म से जोड़ते एक युवा सन्यासी!

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गोरखपुर: बदलते दौर के साथ सन्यास जीवन भी बहुत बदला है। आज कल सन्यासी भी अध्यात्म मार्ग पर नई खोज में लगे हुए हैं ताकि नई पीढ़ी को आसानी से जोड़ सके। आज हम आप को मिलाने जा रहे है एक ऐसे युवा सन्यासी से जो शास्त्रो के भीतर ही नहीं बल्कि डिजिटल एवं कम्यूटर की दुनिया में भी शानदार दखल रखते  है।  यह है युवा सन्यासी स्वामी रामशंकर दास जो अपनी कई खूबियों के कारण सोशल मिडिया पर भी बेहद लोकप्रिय है l
वेदांत का ज्ञान हो या योग का कुशल अभ्यास अथवा हो भावपूर्ण संगीत का गान इन सब पर अच्छा -खासा अधिकार रखते है। भगवान श्री राम को ईष्ट एवं अपना आदर्श मानाने वाले स्वामी राम शंकर बहुत ही रोचकता एवं सामाजिक उपयोगिता से युक्त संगीतमय श्री राम कथा के सुरीले प्रवचनकार है l

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अभी तक पुरे देश के १२ राज्यों में संगीतमय श्री राम कथा का प्रवचन कर चुके है वे इस कार्य को प्रभु की सेवा मानकर करते है l
जीवन की यात्रा में हर समय पढ़ते रहने वाले स्वामी राम शंकर को संगीत से बेहद लगाव है, इसी वजह से इन दिनों विश्वप्रसिद्ध इंदिरा कला संगीत विश्विद्यालय में स्थाई रूप से निवास कर संगीत को गहराई से जानने- सीखने एवं समझने हेतु संगीत गुरु श्री नमन दत्त जी से तालीम प्राप्त कर  रहे है l
माथे पर वैष्णव तिलक, पुरे शरीर में गेरू वस्त्र युक्त परिधान में  विश्विद्यालय परिसर के भीतर  एक युवा सन्यासी का अध्ययन रत होना समस्त विद्यार्थी जनो के लिये  आज भी किसी कौतुहल  से कम  नहीं है l   स्वामी जी कहते है, संगीत तो हम किसी अन्य शहर में रह कर भी सिख सकते थे किंतु वहा दो चीजे कभी नही मिल पाती , पहली खैरागढ़ सदृश्य संगीत का वातावरण एवं दूसरी इतनी बड़ी संख्या में युवाओ का संग जिनके साथ हमें ढेर सारे  विचार – विमर्श करने का सहज अवसर यहाँ सुलभ है l

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उनका कहा है,” मेरा सपना था , कि युवाओ के बीच कुछ वर्ष जीवन जी सकू क्योंकि तभी हमें  पता चलेगा कि  हमारे देश के युवा पीढ़ी किस मानसिकता के साथ जीवन जी रहे है, जिसके अनुसार भविष्य में मुझे अपने युवा साथियो के साथ मिल कर किस प्रकार कार्य करना है, ये बात हम पता कर रहे हैl”
”एक बात हमने महसूस किया कि  सन्यासी के रूप में कुछ समय सामन्य – जन के मध्य व्यतीत करने से सन्यास के विषय में एक बेहतर सम्प्रेषण लोगो के बीच बन पायेग इस उद्देश्य हेतु भी मेरा विश्विद्यालय प्रवास सार्थक सिद्ध होगा। ”

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स्वामी राम शंकर का जन्म 
सन 1987 को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के ग्राम खजुरी भट्ट में आपका जन्म हुआ। गोरखपुर के दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से बी काम की पढाई करते समय ही स्वामी जी ने सन्यास ले कर, सनातन धर्म-संस्कृति के अध्ययन में तल्लीन हो गए।
पिछले 8 सालों में भारत वर्ष के अनेक प्रांतो में स्थित गुरुकुलों में रह कर वेद, पुराण, एवं योग शास्त्र का अध्ययन कर वर्तमान में एशिया के सर्वप्रथम सबसे बड़े संगीत विश्वविद्यालय ” इन्दिरा कला संगीत विश्विद्यालय ”खैरागढ़ , में दाखिला ले कर भारतीय संगीत शास्त्र का साहित्यिक एवं प्रायोगिक अध्ययन कर रहे है l
जिला मुख्यालय देवरिया से १२ दूरी पर स्थित टेकुआ चौराहा के निकट ग्राम खजुरी भट्ट में स्वर्गीय श्री राम सेवा मिश्रा जी निवास करते थे l जिनको तीन पुत्र क्रमशः आद्याप्रसाद , विद्याधर तथा नंदकिशोर मिश्र प्राप्त हुये l नंदकिशोर मिश्रा जी कर्मकांड के आचार्य है जो गोरखपुर शहर में रहते है l आपके दो पुत्र रामप्रकाश तथा उदय प्रकाश व एक पुत्री विजयलक्ष्मी जी है l रामप्रकाश जी का जन्म 1 नवम्बर 1987 को खजुरी भट्ट में हुआ, आपके पिता जी आपको पढ़ाने के लिए गाव से आपको ले कर गोरखपुर चले आये यही आप महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज से 12वी तक की पढ़ाई संपन्न किये।

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आगे जब आप पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से बी काम द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे तभी 1 नवम्बर 2008 को प्रातः काल में छुप कर अयोध्या आ गये जहा 11  नवम्बर को लोमश ऋषि आश्रम के महंथ स्वामी शिवचरण दास महाराज से सन्यास की दीक्षा प्राप्त कर भगवन की साधना में लीन हो गयेl
हलाकि दोस्तों के कहने पर आपने बी काम. की पढ़ाई 2009 में पूरी कर लीl
अब रामप्रकाश से स्वामी राम शंकर दास हो गये स्वामी जी के ह्रदय में विचार प्रगट हुआ की सनातन धर्म का ठीक प्रकार से अध्यन करना चाहिए जिसके फल स्वरुप स्वामी जी अयोध्या  छोड़ कर गुजरात चले गये वहा आर्य समाज के ”गुरुकुल वानप्रस्थ साधक ग्राम आश्रम ” रोजड़  में रह कर योग दर्शन की पढ़ाई व साधना किये l
इसके बाद आप कुछ समय हरियाणा के जींद में स्थापित गुरुकुल कालवा में रह कर संस्कृत व्याकरण की पढ़ाई किये इसी जगह प्रख्यात योग गुरु स्वामी राम देव जी भी अपना बाल कॉल बिता चुके है l

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सिप्तम्बर 2009  को हिमाचल के कांगड़ा जिला में स्थित चिन्मय मिशन के द्वारा संचालित गुरुकुल ” संदीपनी हिमालय” में प्रवेश प्राप्त कर गुरुकुल आचार्य संत शिरोमणि पूज्य पाद स्वामी गंगेशानन्द सरस्वती जी के निर्देशन में तीन वर्ष तक रह कर वेदांत उपनिषद्, भगवद्गीता ,रामायण आदि सनातन धर्म के शास्त्रो का अध्ययन संपन्न कर 15 अगस्त 2012  को आप शास्त्र में स्नातक की योग्यता प्रात किये l
अभी भी आपके भीतर की योग विषयक पिपासा शांत नहीं हो पायी थी, जिसके कारण ही योग को समझने के लिये योग के प्रसिद्ध केंद्र ” बिहार स्कूल ऑफ़ योगा” मुंगेर ( रिखिआ पीठ ) में फरवरी 2013 से मई 2013 तक साधना किये l
आगे अपनी पिपाशा शांत करने हेतु विश्व प्रसिद्ध ”कैवल्य धाम” योग विद्यालय लोनावला पुणे ,महाराष्ट्र में रह कर जुलाई 2013  से अप्रैल 2014   तक डिप्लोमा इन योग के पाठ्यक्रम में रह कर योग से सम्बंधित पतंजलि योग सूत्र , हठप्रदीपिका , घेरण्ड संहिता आदि प्रमुख शास्त्रो का अध्यन कर स्वयं में शांति का अनुभव  करने के फलस्वरूप पूज्य स्वामी जी वर्तमान समय में प्रभु श्री राम के चरित्र को रोचकता के साथ संगीतमय प्रस्तुति कर समाज के नागरिको को सत्यनिष्ठ , सदाचारी बनने  की प्रेरणा प्रदान कर रहे है,
स्वामी जी युवाओ के साथ रहने एवं उनके साथ, उनके लिये कार्य करने में विशेष रूचि रखते है l
बकौल स्वामी राम शंकर आज धर्म का अत्यंत बिगड़ा रूप लोगो के मनमस्तिष्क में व्याप्त हो चुका है जिसे दूर करना अत्यंत आवश्यक हो गया है और यह तभी संभव है जब हम युवाओ के साथ धर्म से जुड़े मुख्य विन्दुओ पर स्वस्थ चर्चा करे एवं उनके भीतर व्याप्त धर्म सम्बन्धी गलतफहमियों को निदान हो, तभी जा कर अखंड भारत के अंतिरिक अखंडता को हमसब कायम रख सकेंगे l

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