योगी आदित्यनाथ: एक चेहरा, अनेक व्यक्तित्व

गोरखपुर: देश के सबसे बड़े सूबे की सत्ता सम्हालने वाले नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विविध व्यक्तित्व है। जहाँ एक तरफ लोग उन्हें कठोर निर्णय लेने वाले व्यक्तित्व के बारे में जानते है, तो दूसरी तरफ वह छोटे बच्चों से कौतूहल करने में भी आगे है।

कुछ इसी तरह के व्यक्तित्वों के बारे में एक रिपोर्ट:-

योगी आदित्यनाथ भाजपा के फायरब्रांड नेताओं में शुमार हैं। पूर्वांचल की राजनीति में उनकी पकड़ अच्छी मानी जाती है। गोरखपुर से सांसद और गोरक्षनाथ पीठ के महंत योगी आदित्यनाथ कई बार अपने बयानों को लेकर भी चर्चा में रहते हैं। लव जेहाद, पलायन, धर्मांतरण जैसे मसलों पर उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। पौड़ी के छोटे से गांव में जन्मे अजय सिंह के योगी से सीएम की कुर्सी तक पहुंचने का सफर दिलचस्प है।

उत्तराखंड गढ़वाल के एक राजपूत परिवार और वन विभाग के कर्मचारी के घर में जन्मे सात भाई बहनों में पांचवें नंबर पर रहे योगी आदित्यनाथ का नाम उनके माता-पिता अजय सिंह रखा था। बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के अजय सिंह विष्ट ने गढ़वाल विश्वविद्यालय से बीएससी गणित की पढ़ाई की। बीएससी करने के बाद अजय सिंह ने गुरु गोरखनाथ के बारे में अध्ययन शुरू किया। इसी दौरान वह गोरक्षपीठा धीश्वर महंत अवैद्यनाथ के सम्पर्क में आए। नौजवान अजय सिंह के अध्यात्म की तरफ बढ़ते अनुराग ने गोरक्ष पीठाधीश्वर को प्रभावित किया। धीरे-धीरे एक-दूसरे के प्रति दोनों का स्नेह बढ़ता गया और अंतत: 26 साल की उम्र में उन्होंने सन्यास ले लिया।

अजय सिंह विष्ट ने योगी आदित्य नाथ बनने के बाद आम सन्यासियों से अलग हटकर अपने लिए एक और कठिन रास्ता चुना। यह रास्ता उन्हें धर्म और राजनीति के बीच संतुलन साधते हुए मंदिर में साधना के साथ चौबीसों घंटे की जनसेवा के लिए बाध्य करता रहा। योगी को उत्तराधिकारी बनाने के चार साल बाद ही महंत अवैद्यनाथ ने सक्रिय राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही योगी के नौजवान कंधों पर गोरक्षपीठ की धार्मिक जिम्मेदारी के साथ-साथ राजनीतिक विरासत को संभालने की जिम्मेदारी भी आ गई। गोरक्षपीठ की परम्परा के अनुसार योगी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में व्यापक जनजागरण अभियान चलाया। सहभोज के जरिए छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया। इसी दौरान घरवापसी का अभियान छेड़ने के चलते योगी पर धर्मानान्तरण कराने के आरोप भी लगे।

1998 में सबसे कम उम्र का एमपी का ख़िताब

योगी 1998 का लोकसभा चुनाव जीतकर सबसे कम उम्र के सांसद बने। अपने विवादित बयानों के चलते योगी की छवि कट्टर हिन्दूवादी फायरब्रांड नेता की है। 2017 के विधानसभा चुनाव में वह भाजपा के स्टार प्रचारक रहे। उन्होंने यूपी पूर्वी और पश्चिमी इलाकों में 175 से ज्यादा सभाएं कीं। भाजपा को प्रचंड बहुमत दिलाने में उनका बड़ा योगदान माना जा रहा है।

नौजवानों के प्रेरणाश्रोत :-
हियुवा से नौजवानों को जोड़ा
योगी आदित्यनाथ ने हिन्दू युवा वाहिनी (हियुवा) का गठन कर बड़ी तादाद में नौजवानों को अपने साथ जोड़ा। घरवापसी, गोरक्षा और हिन्दू पुनर्जागरण के अभियान में यह संगठन योगी आदित्यनाथ का बड़ा आधार बना। पूर्वी उत्तर प्रदेश के गांवों में बड़े पैमाने पर हियुवा की इकाइयां बनीं। इन इकाइयों में बड़ी संख्या में नौजवान शामिल हुए। इसके कई नेता आगे चलकर भाजपा के जरिए सक्रिय राजनीति में भी आए। 2017 के चुनाव में भाजपा के टिकट वितरण से नाराज होकर इसके प्रदेश अध्यक्ष ने ही बगावत भी कर दी। हालांकि योगी का हमेशा कहना रहा कि हियुवा राजनीतिक नहीं सिर्फ सांस्कृतिक संगठन है।

आजमगढ़ यात्रा के दौरान हुआ जानलेवा हमला :-

सात सितंबर 2008 को आजमगढ़ में उनपर जानलेवा हमला हुआ। उस हमले में वह बाल-बाल बच गए थे। उन्हें 2007 में गोरखपुर में दंगों के बाद तब गिरफ्तार किया गया जब मोहर्रम के दौरान फायरिंग में एक हिन्दू की जान चली गई।

विभिन्न विषयों पर लेखनी भी चलाते रहे योगी :-
योगी आदित्यनाथ एक अच्छे लेखक भी हैं। योगी नियमित रूप से अपनी दैनन्दिनी ( डायरी )भी लिखते हैं। उन्होंने योगी जीवन जीते हुए इसके विभिन्न स्वरूपो पर ‘राजयोग: स्वरूप एवं साधना’, ‘यौगिक षटकर्म’, ‘हठयोग: स्वरूप एवं साधना’और ‘हिन्दू राष्ट्र नेपाल’ शीर्षक से पुस्तकें लिखीं। वह गोरखनाथ मन्दिर की वार्षिक पुस्तक ‘योगवाणी’ के प्रधान संपादक की हैसियत से सम्पादन कार्य भी करते रहते हैं।

बड़े बयान जो योगी की प्रसिद्धि बने:-गरीबों की पीड़ा के साथ मजाक करने वाला कभी सुखी नहीं रह सकता।

हिन्दुत्व मेरे जीवन का मिशन और राजनीति सेवा का माध्यम है। धर्म और राजनीति एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
कोई काम चाहे जितना अच्छा किया गया हो उसे और अच्छा करने की गुंजाइश बनी रहती है।

इस तरह से होती है योगी की दिनचर्या:-
3:30 बजे सुबह योगी सोकर उठ जाते हैं। स्नान-ध्यान के बाद पांच बजे तक विशेष पूजा करते हैं। इसके बाद मंदिर परिसर में भ्रमण के बाद 6 बजे से 8.30 बजे तक स्वाध्याय
करते हैं।

8:30-9:30 बजे तक गोरक्षपीठ से जुड़ी संस्थाओं के काम और उनका निरीक्षण और फिर अल्पाहार।
10:00 बजे से जनता की बातें सुनना, अधिकारियों से बात करना,क्षेत्र में भ्रमण और शाम को गौशाला में गायों की सेवा।
7:00 बजे से रात 9 बजे तक पूजा पाठ, आरती। रात के भोजन के बाद 11.30 बजे तक स्वाध्याय के बाद सोना।

शुरू से रहा विवादों से चोली-दामन का साथ:-
2007 में गोरखपुर दंगों के बाद कर्फ्यू तोड़ने के बाद गिरफ्तार हुए।
दादरी हत्याकांड मामले आजम खां के बयान पर उन्हें बर्खास्त करने की मांग की।
2014 में लव जिहाद को लेकर एक वीडियो में कथित तौर कहते दिखे कि अगर वे एक हिंदू लड़की का धर्म परिवर्तन कराएंगे तो हम 100 मुस्लिम लड़कियों का धर्मांतरण कराएंगे।
योग का विरोध करने वालों को भारत छोड़ देना चाहिए।
अगस्त 2015 में योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि मुस्लिमों के बीच ‘उच्च’ प्रजनन दर की वजह से जनसंख्या असंतुलन हो सकता है।

पसंद
गोशाला में गायों के साथ समय बिताना पसंद है। उन्हें बच्चों के साथ मिलना-जुलना भी भाता है।लिखने के शौक के साथ उन्हें बैडमिंटन खेलना भी अच्छा लगा है।योगी आदित्यनाथ को अक्सर पशु—पक्षियों के साथ आत्मीय संवाद करते हुए भी देखा जा सकता है।

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