ढाई दशक बाद पिपराइच में भी महेंद्र पाल ने खिलाया कमल

गोरखपुर: वर्ष 1991में लल्लन प्रसाद त्रिपाठी की जीत के 26 वर्षों बाद जनपद की महत्वपूर्ण विधानसभा सीट पिपराइच में भी कमल खिल चुका है और इसका श्रेय मोदी,योगी और बीजेपी टीम के साथ प्रत्याशी महेंद्र पाल सिंह को जाता है।

ज्ञातव्य है कि पिपराइच विधानसभा सीट से भाजपा के महेंद्र पाल सिंह ने बसपा के आफताब आलम को कड़े संघर्ष के बाद हराया है।जबकि सपा के अमरेंद्र निषाद का तीसरा स्थान रहा।आफ़ताब आलम ने शुरू से अंत तक बीजेपी को कड़ी टक्कर दिया था।इसी क्रम में पूर्व मंत्री और हैट्रिक मार चुके जीतेन्द्र जायसवाल की निर्दल पत्नी अनीता जायसवाल चौथे स्थान पर ही रह गयी।

बता दें कि पूर्व विधायक जितेंद्र जायसवाल की पत्नी अनीता जायसवाल को जब बीजेपी से टिकट नही मिला तो इसका सीधा आरोप उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में योगी आदित्यनाथ पर लगाया था,जिसका फायदा उठाकर हियुवा के बागी गुट ने उन्हें अपना समर्थन भी दिया था।यहां से 19 उम्मीदवारों में 8 निर्दल भी थे। किंतु किस्मत ने महेंद्र पाल सिंह का साथ दिया।

हालाँकि पूर्व के वर्षों में 1991 में यहां से बीजेपी के लल्लन प्रसाद त्रिपाठी जीते थे। उसके बाद के वर्षों में जीतेन्द्र कुमार जायसवाल और यमुना निषाद और उनके बाद उनकी पत्नी श्रीमती राजमती निषाद ने यहां की सीट अपने नाम किया था।

शुरू से ही धनबल से जीते जाने का दंश झेल रही इस विधानसभा सीट पर इस बार बीजेपी ने ईंट भट्ठा व्यवसायी महेंद्र पाल सिंह को चुना और उनकी जित के लिए जनपद से लगायत क्षेत्रीय बीजेपी कार्यकर्ताओं ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। साथ में स्थानीय सांसद योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के स्टार प्रचारको ने इस क्षेत्र में धुंआधार जनसभाएं करके आमजनता का विश्वाश अपने पक्ष में कर लिया। जिसका नतीजा कड़ी चुनौतियों के बावजूद महेंद्र पाल सिंह ने जीत अपने नाम कर ढाई दशक का कलंक धो दिया।