कुशीनगर: मदरसा की मान्यता आसमान में, पढ़ाई गैरेज में

कुशीनगर (मोहन राव): जनपद में दर्जनों फर्जी मदरसे पकड़े जाने के बाद अभी भी जिले में कई जगहों पर फर्जी मदरसे चल रहे हैं जो कागजों में ही है। प्रदेश सरकार की सक्रियता के चलते मदरसों में हड़कंप मचा हुआ है।

ऐसा ही एक मामला रामकोला विकासखंड के ग्राम सभा सपहा महतो अंसारी टोला में मदरसा अरबिया दरशा उलूम की सत्र 2008-09 से अस्थाई मान्यता जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा दिया गया है। जिसमें विगत माह तक मदरसे का गांव में अस्तित्व नहीं था।

जब प्रदेश में भाजपा सरकार बनी और जनपद में फर्जी मदरसों की जांच शुरू हुई तो आनन-फानन में इस मदरसे को जमीनी रुप देने की कोशिश की गई । मदरसे के नाम से जमीन और कमरे नहीं होने पर प्रबंधक अपने टैक्टर रखने के गैरेज में दो अध्यापकों के सहारे कक्षा एक लेकर पांच तक की पढ़ाई करवा रहे हैं।

मान्यता लेते वक्त खूब कागजी खानापूर्ति की गई है मदरसे के नाम पर पांच कमरो की पक्की छत के मकान का नक्शा भी मान्यता की कॉपी में लगाया गया है। यह नक्शा नहर के किनारे मदरसे का लोकेशन इंगित करता है जबकि मदरसा गांव में एक गैरेज में वर्तमान में चल रहा है। जिस भवन का नक्शा मान्यता में दिया गया है वह नसरुल्लाह अंसारी पुत्र इस मोहम्मद का है जिसका खसरा नंबर 592 है। इस जमीन मे से चार डिसमिल ईद नमाज अदा करने के लिए ख्वाजा गरीब के नाम से दान दिया गया है । उसी जमीन को दिखाकर फर्जीवाड़ा करते हुए मान्यता ली गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि गत माह में यहां कुछ अध्यापक एका- एक पढ़ाने पहुंचे तो हम लोगों को पता चला कि इस टोले पर भी किसी मदरसे की अस्थाई मान्यता दी गई है । हालांकि इस संबंध में इसी गांव के निवासी नसरुल्लाह अंसारी पुत्र ईश मोहम्मद ने जिला अल्पसंख्यक अधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर जांच कराने की भी मांग की है।

सूत्रों की माने तो जिला अल्पसंख्यक अधिकारी के ऑफिस में एक व्यक्ति की सह पर यह मदरसा कागजी रुप से चल रहा था । इस कागजी रूपी मदरसे में 61 बच्चों का नामंकन भी दर्ज किया गया है । अगर सही से जांच किया जाए तो इस फर्जीवाड़े में कई लोग नपेंगे । इस मदरसे की चर्चा अगल-बगल के गांव में खूब हो रही है।