महराजगंज

VIDEO महराजगंज: शिक्षकों की मेहनत ला रही है रंग, इस प्राथमिक विद्यालय ने कानवेंट स्कूल को पछाड़ा

महराजगंज: कहते हैं जहां चाह हैं, वहीं राह है। एक प्राथमिक विद्यालय के अध्यापक ने अपनी मेहनत ने एक छोटे से गांव के सरकारी प्राइमरी स्कूल को सीमित संसाधनों से कॉन्वेंट स्कूल से बेहतर बना दिया है। महराजगंज के इस स्कूल में बच्चों को वो सभी सुविधाएं दी जा रही हैं जो कि एक कॉन्वेंट स्कूल में मिलती हैं । यहां की हाई-टेक सुविधाओं का श्रेय प्रिंसिपल नागेंद्र चौरसिया को जाता है। जिसने अपनी मेहनत और टीम वर्क से आज इस प्राथमिक विद्यालय की कायाकल्प ही बदल दी जिससे बच्चों के साथ आज उनके अभिभावक भी खुश है ।

कहने को तो ये एक सरकारी स्कूल है, लेकिन शिक्षकों की सूझ-बूझ और कर्तव्यनिष्ठा ने इसे आम सरकारी स्कूलों से अलग ला खड़ा किया है। महराजगंज के फरेंदा तहसील के मोहनगढ़ का यह प्राथमिक स्कूल अच्छे खासे कान्वेंट स्कूलों को पीछे छोड़ता नजर आ रहा है। स्कूल में पढ़ाई का स्तर, शिक्षकों की सक्रियता और बेमिसाल अनुशासन के अलावा स्मार्ट क्लासेस और अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं इसे विशिष्टता दे रही हैं।

यह अभिनव प्रयोग यहां के शिक्षकों ने स्वयं शुरू किया, जो अब एक नजीर के रूप में सामने है । इस विद्यालय को जब नागेंद्र चौरासिया ने डेढ़ वर्ष पहले जब दूसरे जिले से ट्रांसफर होकर आए थे तो इस विद्यालय में केवल 20 से 25 बच्चे थे और शिक्षा का स्तर निम्न था । लेकिन आज उनके मेहनत, लगन और टीम वर्क से महज डेढ़ साल में 220 बच्चें हो गए । इस विद्यालय की शिक्षा किसी भी कान्वेंट स्कूल से बेहतर होती है।

बच्चे प्रतिदिन स्कूल समय से आते है और हिंदी और अंग्रेजी में प्रेयर करते है और उसके बाद इन बच्चों की शुरू होती है पढ़ाई, जो और विद्यालयों से कुछ अलग होती है । यहाँ अध्यपको द्वारा स्मार्ट क्लासेस चलाई जाती है जिसको एलईडी टीवी से आडियो और वीडियो के माध्यम से समझाया जाता है। जिसको बच्चे काफी आसानी से समझते और सिखते है । इस विद्यालय में बच्चों को योगा, संगीत जैसे तमाम ज्ञान दिया जाता है। जिससे आज इस स्कूल के बच्चे काफी खुश है और वो आज मन लगा कर पढ़ाई कर रहे है जो कभी स्कूल ही नही आते थे।

वहीँ गुरुजी के इस पहल का लाभ आज गांव के लोगो को मिल रहा है।जो अपने बच्चों को कान्वेंट स्कूल में पढ़ाई के लिए गांव से दूर भेजते थे,आज वहा से उनका नाम कटा कर अपने गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ा रहे है ।

प्राथमिक विद्यालय के छात्र छात्राओं का कहना है कि हमें यहां पर इंग्लिश मीडियम स्कूल की तरह यहां पढ़ाया जाता है ।इंग्लिश में प्रार्थना होती है, स्मार्ट क्लास चलाए जाते हैं, योगा सिखाया जाता है। इस विद्यालय में कानवेंट स्कूल की तरह सारी सुविधाएं हम लोगों को मिलती है और यहां के टीचर भी हमारी पढ़ाई के लिए काफी मेहनत करते हैं।

जिम्मेदारों में इच्छा शक्ति हो तो सरकारी स्कूलों को भी प्रतिष्ठित निजी स्कूलों को टक्कर देने वाला मॉडल स्कूल बनाया जा सकता है इसको साबित किया है मोहनगढ़ प्राथमिक विद्यालय के प्रिंसिपल नागेंद्र चौरासिया ने जिनको उनकी शिक्षा के प्रति निष्ठा और अपने विद्यालय को स्मार्ट विद्यालय बनाने को लेकर कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है। एक तरफ जहां कई सरकारी स्कूलों में नामांकन नहीं हैं, वहीं यहां बच्चों के बढ़ते नामांकन के चलते आज जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।

प्रधानाध्यापक नागेंद्र चौरसिया ने बताया कि आज अपनी टीम के साथ मिलकर इस स्कूल को सीमित संसाधनों में एक बेहतर स्कूल बनाने का प्रयास किया है। अपने निजी प्रयासों से आज इस विद्यालय के हर कमरों में पंखा लगा है जिससे बच्चे गर्मी में भी पढ़ाई कर सके । स्कूल में इन्वर्टर लगा है स्मार्ट क्लास के लिए एलईडी टीवी लगा है और प्रेयर के लिए माइक भी लगा है । हर क्लास रूम को एक शहीदों के नाम दिया गया है जिससे बच्चे उनके महत्व को समझे। आज इन गुरुजी के मेहनत से बच्चो को बेसिक जानकारी के साथ अंग्रेजी भी फर्राटेदार बोल लेते है जिसका सरकारी स्कूल से कल्पना ही नही जा सकता।

वही नागेंद्र की लगन और मेहनत की सराहना अधिकारियों से लेकर लोगों की जुबानों पर है कि बिना किसी सरकारी मदद से अपने मेहनत से इस अति पिछड़े इलाके में शिक्षा की अलख जगाए हुए है । वही महाराजगंज के जिला अधिकारी अमरनाथ उपाध्याय ने बताया कि इस तरह सरकारी स्कूलों में हर टीचर मेहनत से बच्चों को पढ़ाये तो वो दिन दूर नही जब अभिवाहक अपने बच्चो को सरकारी स्कूलों में भेजने से कतराएंगे नही।

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