महराजगंज

सिसवा विधानसभा: भाजपा में अंतर्कलह की स्थिति, ऐसे में किस करवट बैठेगा ऊंट

महराजगंज: सभी प्रमुख पार्टियों द्वारा उम्मीदवारों की घोषणा के बाद जनपद का सिसवा विधानसभा रोमांचक मुकाबले के लिये तैयार है। सपा, बसपा और भाजपा की त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा में अंतर्कलह की स्थिति उत्पन्न होने से ऊंट किस करवट बैठेगा। इस बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।
सपा ने उम्मीदवारों की अंतिम लिस्ट में शिवेन्द्र सिंह को अपना प्रत्याशी चुना है तो बहुजन समाज पार्टी ने राघवेन्द्र प्रताप सिंह को चुनावी अखाड़े में उतारा है। देर थी तो भाजपा के उम्मीदवार की घोषणा की।
विगत एक सप्ताह से पार्टी में प्रेमसागर पटेल को टिकट दिये जाने का अटकलों का बाजार गर्म था। निचलौल और मिठौरा में तो कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर ज़मीनी कार्यकर्ताओं को नज़रंदाज़ किये जाने का आरोप लगाकर उनका और प्रेमसागर पटेल का पुतला तक जला डाला।
मंगलवार को शाम को जैसे ही भाजपा ने प्रेमसागर पटेल को उम्मीदवार बनाये जाने की घोषणा किया। वैसे ही पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं और भाजपा समर्थकों का विरोध सोशल मीडिया पर व्यक्त होने लगा। यहाँ पार्टी सूत्रों की मानें तो कार्यकर्ताओं में विरोध जताने वालों में दो गुट था। जिनमें कुछ कार्यकर्ता टिकट की लाइन में खड़े अजय श्रीवास्तव तो कुछ कार्यकर्ता आर के मिश्रा के समर्थक थे।
बताया जा रहा है विगत 2007 में बसपा और 2012 के विधानसभा चुनाव में पीस पार्टी से चुनाव लड़कर हार का स्वाद चखने वाले आर के मिश्रा निर्दल प्रत्याशी के तौर पर इस विधानसभा में ताल ठोंकने वाले हैं। ऐसे में अगर आर के मिश्रा निर्दल चुनाव मैदान में आते हैं तो त्रिकोणीय मुकाबला चतुष्कोणीय मुकाबले में तब्दील हो जायेगा। और उसमें भी भाजपा में कार्यकर्ताओं के असंतोष के चलते उपजे अंतर्कलह से प्रेमसागर पटेल को जूझना पड़ सकता है।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस बार अगर आर के मिश्रा चुनाव मैदान में आते हैं तो उनको और 2012 के चुनाव में हारने वाले बसपा प्रत्याशी राघवेन्द्र प्रताप सिंह को कुछ हद तक मर्सी वोट मिलने की सम्भावना है। अब ऐसे में इस विधानसभा में ऊंट किस करवट बैठेगा, ये तो मतगणना दिन ही स्पष्ट हो पायेगा।

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