महराजगंज

VIDEO: सैकड़ों मगरमच्छों का बसेरा देखना हो तो आइए महराजगंज के दर्जनिया ताल में

 मगरमच्छों का बसेरा देखना हो तो आइए महराजगंज के दर्जनिया ताल में

ओंकार निरंजन
महराजगंज: यूं तो मगरमच्छों का झुंड आपको हॉलीवुड, बॉलीवुड के फिल्मों में या डिस्कवरी चैनल पर देखने को मिला होगा। लेकिन यदि आप को वास्तविक रूप में मगरमच्छों का झुंड देखने को मिल जाये तो सोचिये कि नज़ारा क्या होगा। अगर इन्हें वास्तविक रूप में देखना है तो महराजगंज के सोहगीबरवा वन्य प्रभाग के दर्जनियां ताल आइये। जहां दिन में रेत के टीलों पर झुंड के झुंड मगरमच्छ नज़र आएंगे।

आए दिन जहां जंगलों तालाबों से मगरमच्छों की संख्या कम होती जा रही है, वहीं सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग निचलौल क्षेत्र के दर्जनियां ताल में सैकड़ों मगरमच्छों का एक साथ होना स्वयं में आश्चर्य है। जिसे देख यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि दर्जनिया ताल मगरमच्छों के निवास के लिए वातावरण के अनुकूल प्रकृति द्वारा बनाई गई है। इस ताल में लगभग 350 मगरमच्छों का बसेरा है।

प्रतिदिन सूरज की पहली किरण निकलने के साथ ही मगरमच्छों का झुंड जब रेत के ऊँचे टीलों पर धूप सेंकने के लिए बाहर निकलते हैं तो उस समय का नज़ारा ही कुछ और होता है। यहां मगरमच्छों को देखने के लिए प्रतिदिन दूर-दराज के हज़ारों सैलानियों का आवागमन शुरू हो गया है। बताया जाता है कि वर्ष 1962 में आई बाढ़ में नेपाल से निकली बड़ी गंडक की शाखा से मिलान दर्जनियां ताल के बीच हुई। और प्रत्येक वर्ष बरसात के मौसम में नदी का पानी दर्जनिया से मिलने लगा। जिसके कारण नेपाल के पहाड़ियों व झीलों से पानी के तेज बहाव के साथ काफी संख्या में मगरमच्छ दर्जिनिया ताल में आ पहुंचे।

समय के साथ मगरमच्छों को यह स्थान उनके अनुकूल लगा। और तभी से यह ताल मगरमच्छों का बसेरा बन गया। यहां मगरमच्छों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विगत वर्ष जनवरी 2017 में इसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से वन विभाग ने भारत सरकार को ताल के बॉर्डर एरिया के सुंदरीकरण हेतु 14 लाख का प्रोजेक्ट बनाकर भेजा। जिसे सरकार ने स्वीकृति प्रदान करते हुए धन भी अवमुक्त कर दिया है। जिसके उपरांत वन विभाग ने लगभग 10 हेक्टेयर में फैले ताल को अलग-अलग हिस्से में विभाजित कर मगरमच्छों के प्रजनन और विकास हेतु रेत के टीले और सैलानियों के लिए प्लेटफार्म बनाकर आकर्षक स्वरूप दिया है।

ताल के चारों तरफ कंटीले तारों का घेरा बनाया गया है। ताल के संरक्षण हेतु अगल-बगल के झाड़ियों व झुरमुटों को काटकर बाड़बन्दी की गई है। इस संदर्भ में वन अधिकारी निचलौल अशोक चंद्रा ने बताया कि दर्जनियां ताल को पर्यटक स्थल बनाने हेतु कुछ तकनीकी कारणों से कार्य अवरुद्ध था। किंतु मार्च में सुंदरीकरण कार्य में फिर से तेज़ी आएगी।

अभी यहां मगरमच्छ देखने हेतु आने वाले सैलानियों के लिए लोहे का प्लेटफार्म, ओवरब्रिज, स्टैंड, पार्किंग, तथा बैठने की समुचित व्यवस्था एक से दो माह में पूरी कर ली जाएगी।

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