योगीराज में नजरें टेढ़ी होते ही प्राइवेट प्रेक्टिस करने वाले कई डॉक्टर कर सकते है सरकारी नौकरी को अलविदा

गोरखपुर: प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सरकारी नौकरी करने वाले चिकित्सको के लिए प्राइवेट प्रेक्टिस बवाले जान बन चुका है। प्रदेश सरकार का डंडा इनकी तरफ घूमने के बाद अब प्राइवेट प्रैक्टिस के नाम पर दिन दूनी रात चौगुनी कमाई करने वाले ये चिकित्सक किसी अप्रिय कार्रवाई के डर से इनदिनों सहमे हुए हैं और अब अपना नफा नुकसान की गुणा गणित कर नौकरी को अलविदा करने की सोच रहे है।

इस सम्बन्ध में प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ शासन ने तेवर सख्त होने के बाद गोरखपुर ही नही पूर्वी क्षेत्र के इस इकलौते बीआरडी मेडिकल कॉलेज के लगभग एक दर्जन बड़े डॉक्टर वीआरएस ले सकते हैं। इन प्राइवेट प्रेक्टिस करने वाले चिकित्सको में मेडिसिन, पीडिया, आर्थो,जनरल सर्जरी, गायनी, ईएनटी और साईकेट्री के डॉक्टर शामिल हैं।

बता दे कि नौ सौ बेड की क्षमता वाले अस्पताल के चलते बीआरडी मेडिकल कालेज की पहचान पूर्वांचल के एक मात्र मेडिकल कालेज के रूप में है। इसमें रोजाना करीब पांच हजार मरीज ओपीडी में इलाज कराने आते हैं। मरीजों की भारी भीड़ होने के कारण इस अस्पताल के डॉक्टर कालेज कम्पाउंड सहित शहर के कई क्षेत्रों में खुल कर प्राइवेट प्रेक्टिस भी करते रहे हैं।

जिसकी सुचना मिलने पर प्रदेश शासन द्वारा कराये गये स्टिंग ऑपरेशन में प्राइवेट प्रैक्टिस करते ईएनटी के डॉ. आरएन यादव फंस भी चुके है। हालाँकि केवल वही नही बल्कि उनके अलावा कैंपस के लगभग तीन दर्जन डॉक्टर इसमें संलिप्त हैं। देखा जाय तो मेडिसिन विभाग के कुछ डॉक्टर तो कैंपस में बने सरकारी आवासों पर ही धड़ल्ले से मरीजों का इलाज करते हैं।

इनमे से भी मेडिकल कालेज में कार्यरत पीडियाट्रिक्स, आर्थो, ईएनटी और गायनी के एक दर्जन डॉक्टरों के निजी अस्पताल हैं। जबकि कालेज के कुछ डॉक्टरों की क्लीनिक महानगर के पाश इलाके बेतियाहाता में चलती है। साथ ही साथ शहर से सटे कुछ इलाकों गोरखनाथ, चरगांवा और करीम नगर में कुछ निजी अस्पतालों में सरकारी डॉक्टर मरीजों का इलाज करते हैं।

सबसे बड़ी बात कि कालेज में कार्यरत कुछ एनेस्थिसिया के डॉक्टर निजी अस्पतालों से भी जुड़े हैं।सूत्रों के मुताबिक कालेज के मेडिसिन विभाग में तैनात रहे न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पवन सिंह ने शासन के डंडे के चलते ही इस्तीफा दिया। हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफा देने का कारण निजी बताया है। जबकि दूसरे चिकित्सक न्यूरोसर्जरी विभाग में एक मात्र डॉ. विजय शंकर मौर्या ने भी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मांगी है। अब दूसरे विभागों के चिकित्सकों में भी शासन के रवैये को देखकर खलबली मची हुई है।अब ऐसे चिकित्सक स्वैच्छिक सेवानिवृति के लिए होने वाले अपने घाटा-मुनाफा का आंकलन कर रहे हैं। इसके बाद ही वे कोई फैसला करेंगे।

हालाँकि बीआरडी मेडिकल कालेज में दो दर्जन से अधिक डॉक्टर कांट्रेक्ट के माध्यम से सेवाएं द़े रहे हैं। इसमें डॉक्टरों को कॉलेज की ड्यूटी के बाद प्राइवेट प्रैक्टिस करने की छूट मिलती है।कालेज के चर्म रोग और रेडियोलॉजी विभाग में तो सभी डॉक्टर संविदा पर ही है। विभाग में कोई रेग्यूलर डॉक्टर ही नहीं है। कुछ घंटे कालेज में सेवा देने के बाद ये डॉक्टर खुलकर बेरोक टोक प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं।

हालाँकि कुछ दिनों पूर्व इस तरह की परिस्थियां उतपन्न होने के सवाल पर प्रदेश के चिकित्सा-शिक्षा महानिदेशक,डॉ. वीएन त्रिपाठी ने खुलकर कहा भी था कि कॉलेज में तैनात रेग्यूलर डॉक्टर किसी कीमत पर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकता। इसके एवज में उसे नॉन प्रैक्टिसिंग एलाउंस मिलता है। ऐसे डॉक्टरों की खुफिया जांच कराई जा रही है। कोई डॉक्टर अगर इस्तीफा देकर जाना चाहता है तो वह जा सकता है। उनकी जगह पर नए डॉक्टरों की भर्ती की जाएगी।

Martia Jewels
Martia Jewels
Martia Jewels